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sunanda jha
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  • प्रशांत "दीक्षित"
  • सुरेश अग्रवाल
  • Chetan Prakash
 

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sunanda jha replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"बहुत दुःखद! ईश्वर दिवंगत की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को धैर्य व साहस प्रदान करें ।ॐ शान्ति !"
Oct 17, 2020
sunanda jha is now friends with प्रशांत "दीक्षित" and Chetan Prakash
Sep 14, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आपका कोटिशः आभार आदरणीय! रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Sep 13, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"हृदयतल से आभारी हूँ आदरणीय ! रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Sep 13, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"हृदयतल से आभार आदरणीय ! रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Sep 13, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"प्रदत्त विषय पर मनभावन अतुकांत सृजन किया है आदरणीय! कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"प्रदत्त विषय पर सरसी छंद आधारित बहुत सुंदर रचना हुई है आदरणीय ।कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।विनम्र ध्यानाकर्षण-- पहले पद के तीसरे चरण में कुश शब्द टाइप होने से रह गए हैं सादर ।"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"प्रदत्त विषय पर अनुपम ग़ज़ल हुई है आदरणीय ! कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर।"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"हृदयतल से आभारी हूँ आदरणीय !रचना की सराहना कर ;मान बढ़ाने के लिए सादर ।"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"काश! दुबारा जी पाते हम,बचपन वाले दिन ।हो -हल्ला- हुड़दंग मचाते ,वो मतवाले दिन । ईंट जोड़कर विकिट बनाते,गेंद रबर की होती ।चंदा कर के नई दिलाते ,अगर गेंद वह खोती ।छिपन -छिपाई, गिल्ली-डंडा,कंचे खेले जमकरबिन सीढ़ी के बंदर जैसे ,चढ़ जाते थे छत पर।छज्जे पर…"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"जी आप बिलकुल प्रेषित कर सकते हैं सादर ।"
Sep 12, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"'जरा याद उन्हें भी कर लो' हृदय पगा हो देशभक्ति में ,बासन्ती परिधान रहे ।भारत -रज से तिलक करूँ नित,अधरों पर यशगान रहे। भारत की अनुपम संस्कृति ने, अंग्रेजों को ललचाया ।दास -प्रथा का तभी युगों तक रहा हमारे सर साया ।रक्त उबलकर वीर -हृदय का…"
Aug 16, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"वाहहहह!आज के विषयानुसार अनुपम सृजन किया है आदरणीय ;कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।"
Aug 16, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आज के विषयानुकूल बहुत ही सुंदर सृजन किया है आदरणीय ।"
Aug 16, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"वाहह!आदरणीय एक से बढ़कर एक बहुत सुंदर दोहे रचे आपने ।"
Aug 16, 2020
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"बहुत सुंदर सृजन किया है आदरणीय ,कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।"
Aug 16, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

समानिका छंद

यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।



21 21 21 2 ,21 21 21 2





चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।

नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।



प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।



तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।

सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।



ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है… Continue

Posted on August 28, 2017 at 7:41pm — 10 Comments

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 10 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

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