For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

sunanda jha
Share

Sunanda jha 's Friends

  • सुरेश अग्रवाल
 

sunanda jha 's Page

Latest Activity

sunanda jha commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (2)
"आदरणीया बहुत प्यारी ग़ज़ल हुई है पर मुझे एक शुब्हा है जो गुणी जत्न दूर करेंगे ,आपकी ग़ज़ल के तीसरे शेर में तुकाबले रदीफ़ दोष आ रहा है तो इस मिसरे को ' मेरा जीवन इस गुलशन के फूलों जैसा ' यूँ करें तो ?"
Sep 25
sunanda jha commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (2)
"हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना जी बहुत प्यारी ग़ज़ल हुई ।'रौनक'बहुत प्यारा उपनाम ।"
Sep 25
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"बहुत प्यारी ग़ज़ल लिखी जनाब रिजवान साहब दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ ।"
Sep 23
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आदरणीय महेंद्र सर मुशायरे का आगाज़ प्यारी ग़ज़ल से करने के लिए हार्दिक बधाई सादर ।"
Sep 23
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर सर दिल से शुक्रिया हौसलाफजाई के लिए ।आपको रचना पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हुआ सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले सर ,रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए हृदय तल से आपका आभार सादर ।रचना आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ आदरणीय ।लिखते समय खचाखच ही सूझा आदरणीय ,आपका सुझाव उत्तम है संशोधित कर लूँगी सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ़ सर हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया आपका सादर ।रचना आपको पसंद आई लेखन सार्थक हुआ ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ सर, हृदय तल से आपका आभार रचना की सराहना कर मान देने के लिए सादर ।आपके सुझावों को नोट कर लिया है आदरणीय,बस आप सब का आशीष मिलता रहे ,कोशिश जारी रहेगी सादर।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"दिल से शुक्रिया आदरणीया प्रतिभा जी ,रचना की सराहना कर मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले सर बहुत ही सटीक व सार्थक वर्णन दिए गए चित्र का ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर सर बहुत सुंदर चित्राधारित सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेश सर बहुत सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी दिए गए चित्र को सार्थक करता बहुत ही सुंदर सृजन ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तसदीक़ अहमद सर दोनों ही विधा में उत्तम सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतीश सर चित्राधारित बहुत ही सुंदर सृजन के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सर बहुत ही सुंदर प्रस्तुति चित्र को शब्द देती हुई ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Sep 16

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

समानिका छंद

यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।



21 21 21 2 ,21 21 21 2





चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।

नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।



प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।



तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।

सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।



ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है… Continue

Posted on August 28, 2017 at 7:41pm — 9 Comments

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 10 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

Comment Wall (6 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"शीर्षक सुझाव : //कृत्रिम उपलब्धियां//"
31 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"हालांकि प्रथम पात्र /जी हुजूर/, /जी-जी हुजूर/कहता हुआ आदरपूर्वक खड़े हुए ही बात कर रहा है, फिर भी…"
34 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"बेहतरीन व्यंग्यात्मक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।"
39 minutes ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सत्यमेव् जयते - डॉo विजय शंकर
"आभार , आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , सादर।"
39 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"वाह। शीर्षक और उस गरिमामय अभिवादन/नारे 'जय हिन्द' के साथ आज के सत्य को पिरोकर बेहतरीन…"
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -कहीं वही तो’ नहीं वो बशर दिल-ओ-दिलदार
"सादर आभार आ सलीम जी "
1 hour ago
SALIM RAZA REWA commented on dr neelam mahendra's blog post क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें
"आ. नीलम जी, ख़ूबसूरत लेख के लिए बधाई."
1 hour ago
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर

उप-शीर्षक -आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस से आर्टिफिशल हँसी तक।प्रकृति ,अनजान ,पाषाण ,ज्ञानविज्ञान ,गूगल…See More
1 hour ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सवालों का पंछी सताता बहुत है-गीत
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार"
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सवालों का पंछी सताता बहुत है-गीत
"आदरणीय बाऊजी आपने सही ध्यान धराया है, सादर प्रणाम"
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तब सिवा परमेश्वर के औ'र जला है कौन-----गज़ल, पंकज मिश्र
"आदरणीय आशुतोष सर सादर आभार"
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तब सिवा परमेश्वर के औ'र जला है कौन-----गज़ल, पंकज मिश्र
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत आभार"
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service