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2121 2122 2121 212

खो गया सुकून दिल का कार हो गया जहाँ
गुम गया सनम भँवर में ख़ार हो गया जहाँ

कामयाबी तौलती दुनिया भरोसे जऱ ज़मी
फार्म जिनके हैं नहीं गुड़मार हो गया जहाँ

ज़िन्दगी जिसे कहा हमने कहीं छुपा गया
है निशान अपने ज़ालिम पार हो गया जहाँ

कार-ए-दुनिया और कुछ हैं और कुछ दिखें ख़ुदा
मारकाट हाल कारोबार हो गया जहाँ

तोड़ हद रहे सभी अब तो अदब जहान में
लाज लुट रही घरों मुरदार हो गया जहाँ

लाखआँख नम दिखे जज़्बात मर गये कहीं
प्यार खो रहा अभी इसरार हो गया जहाँ

मशविरा करूँ तो किससे राबते रहे नहीं
गुम गये निशान उनके रार हो गया जहाँ

मौलिक व अप्रकाशित
प्रोफ. चेतन प्रकाश चेतन

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