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"212      212     212     212 भूल जाये दुनिया वो किसी  के लिए  है  ज़रूरी  नहीं  आदम…"

Chetan Prakash replied Jan 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151

681 Jan 28
Reply by Samar kabeer

"असल कामयाबी :  विष्णुछंद  गूढ़ प्रश्न है जीवन की क्या, असल कामयाबी । योग भोग  दो मा…"

Chetan Prakash replied Jan 14 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-147

14 Jan 15
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"नमस्कार,  संजय शुक्ल साहब,  आपने उम्दा ग़ज़ल कही, इस नाते आप सहज ही दिली मुबारकबाद क…"

Chetan Prakash replied Dec 28, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150

376 Dec 29, 2022
Reply by DINESH KUMAR VISHWAKARMA

"सु श्री जी, खूबसूरत ग़ज़ल  कही आपने, आदाब  ! हाँ, मतले में अलिफ वस्ल का आपका प्रयास …"

Chetan Prakash replied Dec 28, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150

376 Dec 29, 2022
Reply by DINESH KUMAR VISHWAKARMA

"सप्रेम वन्दे, 'मुसाफिर' साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने ! आप  मुझे कुछ  जल्दबाजी में…"

Chetan Prakash replied Dec 28, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150

376 Dec 29, 2022
Reply by DINESH KUMAR VISHWAKARMA

"आदाब,  आदरणीय रवि शुक्ल साहब,  आपने ग़ज़ल तक पहुँचने की ज़हमत की, इसके लिए आपका  बहु…"

Chetan Prakash replied Dec 28, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150

376 Dec 29, 2022
Reply by DINESH KUMAR VISHWAKARMA

"तरही ग़जल हमारे देश का बच्चा कोई बच़्चा नहीं रहता चलाता रोज़ मोबाइल बड़ा अच्छा नहीं…"

Chetan Prakash replied Dec 28, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150

376 Dec 29, 2022
Reply by DINESH KUMAR VISHWAKARMA

"        कुण्डलिया छंद  दिल का रिश्ता हे नहीं, सियासत का गुलाम  ! बिछें खूब जग गोटिय…"

Chetan Prakash replied Dec 18, 2022 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-146

14 Dec 18, 2022
Reply by Saurabh Pandey

"तरही ग़ज़ल  : 221     2121     1221    212 बाक़ी न दुख कोई न वो उसका सवाल हो वो मे…"

Chetan Prakash replied Nov 25, 2022 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149

307 Nov 26, 2022
Reply by Samar kabeer

"दिवास्वप्न......एक ग़ज़ल  122     122     122    122 बह्र ए मुतकारिब मुसम्मन सालिम…"

Chetan Prakash replied Nov 12, 2022 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-145

8 Nov 14, 2022
Reply by indravidyavachaspatitiwari

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दोहा पंचक. . . . .

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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
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"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
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"//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते // सानी…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
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Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर नमस्कार। आपकी शिरकत ग़ज़ल में हुई, प्रसन्नता हुई। आपकी आपत्ति सही है,…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।  क्या "शाइर" शब्द…"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
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