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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
  • 72, Male
  • धमतरी , छत्तीसगढ़
  • India
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी आपकी दूसरी प्रस्तुति भी विषय के अनुरूप शानदार है। हार्दिक बधाई"
Oct 11, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीया  अंजलीजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
Oct 11, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीया अंजलीजी विषय पर अच्छी कुंडलिया हुई है। हृदय से बधाई। भाव के अनुसार मिलता की जगह आता शब्द ज्यादा सटीक है।"
Oct 11, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय भाई छोटेलाल अच्छी गजल हुई हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय जवाहर भाई सुंदर  है दोहावली, दोहे पूरे पाँच। इक से बढ़कर एक है, साँच को नहीं आँच॥"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय भाई  छोटेलाल रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय  जवाहर  भाई रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी प्रायः हर दोहे में अवसर शब्द का सुंदर प्रयोग। हृदय से बधाई बहती गंगा में न जो, धो पाया निज हाथ ...... बहती गंगा में नहीं, धो पाया जो हाथ"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार  आपका"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"आदरणीय  चेतन भाई अवसरवादी नेताओं  पर सुंदर कटाक्ष। हार्दिक  बधाई कूट नीति .खाद्य .जिसकी,.........गेयता कुछ बाधित  है इसका विन्यास   3 3 2 3 2 में करके देखिए है .जन - जन को अवसर। ....... मात्रा कम है"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"अवसर है अच्छा बनने का   .................................     सजग रहें सब कोरोना से, कुछ दिन कहीं न जाइए। मांस मदिरा सभी त्याग दें, शाकाहार अपनाइए॥     घर में कुत्ता ना पालें, न गोद में उसे खिलाइए। छोड़ो बुरी आदतें सारी, हाथ…"
Oct 10, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी तीनों छंद की सभी पंक्तियाँ चित्र को साकार करती और नारियों के उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। आप देर से आए पर दुरस्त आए । हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर"
Sep 20, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ  भाईजी मुझे भी लगा कि उसी पँक्ति में संशोधन के स्थान पर पूरी  पँक्ति को बदल देना ही उचित था। सच है गेयता की दृष्टि से प्रवाह दो स्थानों पर बाधित है। उत्साहवर्धन और उचित सलाह के लिए धन्यवाद आभार आपका सादर"
Sep 20, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका।"
Sep 20, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आपका।"
Sep 20, 2020
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी चल वर्जनाओं को लगायें, लात जमकर आ सखी मन की खिलायें धूप भागे, रात डरकर आ सखी ............. अति सुंदर दो पँक्तियाँ सुंदर सार्थक छंद की हृदय से बधाई"
Sep 19, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
छत्तीसगढ़
Native Place
धमतरी
Profession
सेवा निवृत्त
About me
कविता / सामयिक हास्य व्यंग्य / भजन/ आदि लेखन कार्य

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Blog

बीते बरस का लेखा जोखा [अखिलेश कृष्ण ]

प्याज सब्जियाँ आलू दाल, किया हमें सब ने बेहाल।

खट्टी मीठी कड़वी यादें, देकर बीता पिछला साल॥

चारों तरफ से कर्जा उस पर, सभी फसल बर्बाद हुए।

आत्महत्या किसानों ने की, बात दुखद गंभीर सवाल॥

दस राज्य केंद्र में शासन है, पर बढ़ा मांस निर्यात।

चौंकाने वाली ये खबर है, गौ माता भी हुई हलाल॥

करोड़ों खर्च हुए संसद पर, काम के नाम पे ठेंगा है।

बस नारेबाजी बहिर्गमन, पुतलों का दहन, हड़ताल॥

आरोप और प्रत्यारोप हुए, मंत्री विधायक…

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Posted on January 1, 2016 at 7:37pm — 4 Comments

साहित्यकार कलाकार या गिरगिट के अवतार [व्यंग्य]. अखिलेश कृष्ण

अजी सुनते हो ..... पप्पू के पापा ।

 

धीरे बोलो भागवान, पड़ोसी क्या सोचेंगे।

 

मैंने कहा छोटे बड़े मँझले साहित्यकारों और पुरस्कृत कुछ लोग लुगाइयों में सम्मान लौटाने की होड़ लगी है। इन सब के थोपड़े हर चैनल्स में बार बार दिखाया जा रहा है। आप भी अपना सम्मान लौटा दीजिये।

 

कौन सा सम्मान ?

 

ये लो, ऐसे पूछ रहे हो जैसे 10–20  पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुके हो और सिर्फ नोबेल पुरस्कार ही लेना बाकी है। अरे जीवन में एक ही बार तो सम्मानित…

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Posted on November 20, 2015 at 2:19pm — 9 Comments

भारत की कुण्डली में तीन अमंगल ग्रह ( आल्हा छंद ) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

आल्हा छंद 

बरसों पहले बंधु बनाकर, चाउ -माउ चीनी मुस्काय।                                       

और उसे हम बड़े प्यार से,  भैया कहकर गले लगाय।।                            

 

हर आतंकी पाकिस्तानी, चाल चीन की समझ न आय ।                                                             

दो मुँह वाला अमरीका है, विकिलीक्स दुनिया को बताय।।                       

 

एक ओर है  पाक समस्या , और कहीं चीनी घुस जाय ।                           

*राम -…

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Posted on October 1, 2014 at 3:30pm — 12 Comments

हिन्दी - अपने ही घर में दासी (अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव)

अपने ही घर में दासी हिंदी                           

   हिंदी धीरे- धीरे समृद्ध हुई और फली फूली है। संस्कृत के सरल शब्दों, क्षेत्रीय बोलियाँ / भाषाओं को लेकर आगे बढ़ी, पवित्र गंगा की तरह लगातार कठिनाईयों को पार करते हुए । उर्दू , अरबी, फारसी आदि भी छोटी नदियों की तरह इसमें शामिल होती गईं जिससे हिंदी और मधुर हो गई। आज हिंदी के पास विश्व की किसी भी भाषा से अधिक शब्द हैं। लेकिन आजादी के बाद से सरकार की नीति से हिंदी निरंतर उपेक्षित होती गई। हिंदी के शब्द कोष में…

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Posted on September 3, 2014 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 7:03pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:15pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माफ करें गलत जगह कमेन्ट दे दिया।
At 12:13pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हमारी ओर से आ. अखिलेश जी आपको शत शत बधाइयाँ।
At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 3:32pm on January 7, 2014, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय अखिलेश जी ..महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें ..नव बर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ...सादर 

At 1:55pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री अखिलेश जी माह का सक्रिय सदस्य पुरस्कार  प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:52pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय अखिलेश जी

आपको माह का सक्रिय सदस्य बनाने पर कोटि-कोटि बधाई i

आपकी उर्जा ऐसी ही बनी रहे यही ईश्वर से प्रार्थना है i

 

At 12:17pm on January 5, 2014, Sushil Sarna said…

aa.Akhilesh Krishan Srivastav jee maheene ka skriy sadasy chune jaane pr aapko haardik badhaaee

At 9:39am on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:24pm on November 24, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

अखिलेश जी

मालिनी छंद पर आपकी सराहना का शत शत आभार  i

 
 
 

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