For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
  • 74, Male
  • धमतरी , छत्तीसगढ़
  • India
Share on Facebook MySpace

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Friends

  • RENU BHARTI
  • seemahari sharma
  • harivallabh sharma
  • krishna kant baxy
  • M Vijish kumar
  • ARVIND BHATNAGAR
  • गिरिराज भंडारी
  • Sushil Sarna
  • शिज्जु "शकूर"
  • annapurna bajpai
  • anwar suhail
  • विजय मिश्र
  • Ashish Srivastava
  • मिथिलेश वामनकर
 

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी  यह एक दिन और एक ही बैठक में किये गये प्रयास का परिणाम् है। मैं न ज्यादा समय दे पाया न सोच पाया।  प्रोत्साहन और सुझाव के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार ।"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाई रचना की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार।"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी रचना की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार।"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार।"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम भाईजी आकाश धरती चांद सबको लेकर सुंदर छंद की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।  बज रहा मधुर साज। ...... मधुर बज रहा साज। ........बजता कोई साज। इसी पँक्ति में टंकण त्रुटि भी है"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी आपकी चिंता स्वाभाविक है। आज के बच्चे दादा दादी नाना नानी के पास न देर तक बैठते हैं न कहानी सुनते हैं। चांद तारे बादल आकाश पशु पक्षी आदि के बारे में जानने की उनमें उत्सुकता ही नहीं है। हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर।  "
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी इस सुंंदर चित्र को बाल छंद के रूप में प्रस्तुत कर आपने सराहनीय सुंदर रचना की है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।   "
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी चित्र के  अनुरूप बादल और चांद के बीच की प्राकृतिक सुंदरता का सुंदर वर्णन। हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर।  माँद का अर्थ आपने क्या लिया है,दूसरे चरण का भाव स्पष्ट नहीं है।   "
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद  +++++++++ श्वेत श्याम बादल लाते हैं, पावस का संदेश। पल भर में ही बदल गया है,धरती का परिवेश॥ बारिश होने से पहले ही, घिरी घटा घनघोर। लगता छत पर छाये बादल,करें भयानक शोर॥ दूर गगन से चांद बुलाये, सावन भादो मास। मेघों का किल्लोल देखने,…"
Jan 22
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी सुंदर सरसी छंद की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।   हवा विष घुली चहुँदिश फैली ,,,,,,,,, हर वातावरण अब प्रदूषित, ...... इन दोनों में लय बाधित है "
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी छंद की प्रशंसा  के लिये हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। विषैला सही है .... धन्यवाद "
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी छंद की प्रशंसा  के लिये हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक बधाई इस सुंदर प्रस्तुति पर। जाम फेफड़े हुए धड़कते,..... प्रवाह तो है पर अर्थ स्पष्ट नहीं ........  सहज न धड़के जाम फेफड़े ....... या ऐसा ही कुछ  नहीं सुरक्षित कोई घर है, नगर गली या गाँव।…"
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी छंद आधारित सुंदर गीत लय के साथ प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। है भाग में इसके भागना ......  "
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी छंद की प्रशंसा  के लिये हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Nov 20, 2022
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 139 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश भाईजी छंद की प्रशंसा  के लिये हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Nov 20, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
छत्तीसगढ़
Native Place
धमतरी
Profession
सेवा निवृत्त
About me
कविता / सामयिक हास्य व्यंग्य / भजन/ आदि लेखन कार्य

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Blog

बीते बरस का लेखा जोखा [अखिलेश कृष्ण ]

प्याज सब्जियाँ आलू दाल, किया हमें सब ने बेहाल।

खट्टी मीठी कड़वी यादें, देकर बीता पिछला साल॥

चारों तरफ से कर्जा उस पर, सभी फसल बर्बाद हुए।

आत्महत्या किसानों ने की, बात दुखद गंभीर सवाल॥

दस राज्य केंद्र में शासन है, पर बढ़ा मांस निर्यात।

चौंकाने वाली ये खबर है, गौ माता भी हुई हलाल॥

करोड़ों खर्च हुए संसद पर, काम के नाम पे ठेंगा है।

बस नारेबाजी बहिर्गमन, पुतलों का दहन, हड़ताल॥

आरोप और प्रत्यारोप हुए, मंत्री विधायक…

Continue

Posted on January 1, 2016 at 7:37pm — 4 Comments

साहित्यकार कलाकार या गिरगिट के अवतार [व्यंग्य]. अखिलेश कृष्ण

अजी सुनते हो ..... पप्पू के पापा ।

 

धीरे बोलो भागवान, पड़ोसी क्या सोचेंगे।

 

मैंने कहा छोटे बड़े मँझले साहित्यकारों और पुरस्कृत कुछ लोग लुगाइयों में सम्मान लौटाने की होड़ लगी है। इन सब के थोपड़े हर चैनल्स में बार बार दिखाया जा रहा है। आप भी अपना सम्मान लौटा दीजिये।

 

कौन सा सम्मान ?

 

ये लो, ऐसे पूछ रहे हो जैसे 10–20  पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुके हो और सिर्फ नोबेल पुरस्कार ही लेना बाकी है। अरे जीवन में एक ही बार तो सम्मानित…

Continue

Posted on November 20, 2015 at 2:19pm — 9 Comments

भारत की कुण्डली में तीन अमंगल ग्रह ( आल्हा छंद ) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

आल्हा छंद 

बरसों पहले बंधु बनाकर, चाउ -माउ चीनी मुस्काय।                                       

और उसे हम बड़े प्यार से,  भैया कहकर गले लगाय।।                            

 

हर आतंकी पाकिस्तानी, चाल चीन की समझ न आय ।                                                             

दो मुँह वाला अमरीका है, विकिलीक्स दुनिया को बताय।।                       

 

एक ओर है  पाक समस्या , और कहीं चीनी घुस जाय ।                           

*राम -…

Continue

Posted on October 1, 2014 at 3:30pm — 12 Comments

हिन्दी - अपने ही घर में दासी (अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव)

अपने ही घर में दासी हिंदी                           

   हिंदी धीरे- धीरे समृद्ध हुई और फली फूली है। संस्कृत के सरल शब्दों, क्षेत्रीय बोलियाँ / भाषाओं को लेकर आगे बढ़ी, पवित्र गंगा की तरह लगातार कठिनाईयों को पार करते हुए । उर्दू , अरबी, फारसी आदि भी छोटी नदियों की तरह इसमें शामिल होती गईं जिससे हिंदी और मधुर हो गई। आज हिंदी के पास विश्व की किसी भी भाषा से अधिक शब्द हैं। लेकिन आजादी के बाद से सरकार की नीति से हिंदी निरंतर उपेक्षित होती गई। हिंदी के शब्द कोष में…

Continue

Posted on September 3, 2014 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:03pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:15pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माफ करें गलत जगह कमेन्ट दे दिया।
At 12:13pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हमारी ओर से आ. अखिलेश जी आपको शत शत बधाइयाँ।
At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 3:32pm on January 7, 2014, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय अखिलेश जी ..महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें ..नव बर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ...सादर 

At 1:55pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री अखिलेश जी माह का सक्रिय सदस्य पुरस्कार  प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:52pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय अखिलेश जी

आपको माह का सक्रिय सदस्य बनाने पर कोटि-कोटि बधाई i

आपकी उर्जा ऐसी ही बनी रहे यही ईश्वर से प्रार्थना है i

 

At 12:17pm on January 5, 2014, Sushil Sarna said…

aa.Akhilesh Krishan Srivastav jee maheene ka skriy sadasy chune jaane pr aapko haardik badhaaee

At 9:39am on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:24pm on November 24, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

अखिलेश जी

मालिनी छंद पर आपकी सराहना का शत शत आभार  i

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
5 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते // सानी…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
yesterday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर नमस्कार। आपकी शिरकत ग़ज़ल में हुई, प्रसन्नता हुई। आपकी आपत्ति सही है,…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।  क्या "शाइर" शब्द…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
yesterday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service