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वागीश्वरी सवैये

वागीश्वरी सवैये सूत्र : यगण X 7 + ल गा

अभी तो अकेले चले हैं मियाँ जी ,न कोई वहां है न कोई यहां ।
यहां कौन है जो बताये जहां को,कि बाबू चले हैं अकेले कहां ।

जहाँ जा रहे हैं रहेंगे अकेले,मिलेगा न साथी उन्हें तो वहाँ ।
पता है हमें ख़ूब यारों यक़ीं है, करेगा उन्हें याद सारा जहाँ ।।
_________

निगाहें उठाके ज़रा देख तो लो ,बताओ यहाँ क्यूँ अकेले खड़े ।
हमें ये बता दो बिना बात के ही,भला जान देने यहाँ क्यूँ अड़े।

जहाँ में न कोई हमें तो मिला है,कहो कौन ऐसे क़ज़ा से लड़े ।
हमारा कहा मान लो देख लो जी,यहाँ भी वहाँ भी शिकारी बड़े ।।

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Ravi Shukla on December 15, 2016 at 2:48pm

आदरणीय समर साहब बहुत सुन्‍दर सवैया छंद लिखा है आपने । इस सुन्‍दर प्रस्‍तुति पर हार्दिक बधाई स्‍वीकार करें । सादर   

Comment by रामबली गुप्ता on December 15, 2016 at 12:29pm
वाह वाह आद0 भाई समर जी सुंदर सवैये हुए हैं। सादर बधाई लीजिये।
Comment by नाथ सोनांचली on December 15, 2016 at 2:52am
आद0 समर कबीर साहब आदाब, आप इतना अच्छा छंद भी लिखते है, वाह, बेहतरीन भाव और लय लिए उत्तम सर्जना के किये मेरी अशेष बधाइयाँ निवेदित है।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on December 14, 2016 at 8:52pm
आ0 समर साहिब दोनों ही सवैये बहुत ही उम्दा लिखें हैं। खूबसूरत सवैयों की हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
Comment by Mahendra Kumar on December 14, 2016 at 9:40am
आपके सवैये पढ़ के आनन्द आ गया आदरणीय समर सर। इस शानदार प्रस्तुति पर मेरी तरफ से ढेरों बधाई। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 14, 2016 at 12:47am

आदरणीय समर कबीर जी, छंदों पर आपकी पकड़ खूब बन गई है. क्या खूब सवैया लिखा है आपने. लघु-गुरु-गुरु की आवृत्ति को बहुत बढ़िया निभाया है. इस शानदार प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई. सादर 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 13, 2016 at 9:57pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,  बहुत ही अच्छे सवैये हुए हैं , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं  --

Comment by Sushil Sarna on December 13, 2016 at 6:03pm

अभी तो अकेले चले हैं मियाँ जी ,न कोई वहां है न कोई यहां ।

यहां कौन है जो बताये जहां को,कि बाबू चले हैं अकेले कहां ।

जहाँ जा रहे हैं रहेंगे अकेले,मिलेगा न साथी उन्हें तो वहाँ ।

पता है हमें ख़ूब यारों यक़ीं है, करेगा उन्हें याद सारा जहाँ ।।

वाह आदरणीय समर साहिब वाह मुझे इस सवैये के बारे में तो अधिक पता नहीं मगर भाव शब्द और लय तीनों ही कमाल का असर छोड़ती हैं। इस दिलकश प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई सर जी।

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