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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Page

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s blog post लावणी छन्द,संपूर्ण वर्णमाला पर प्रेम सगाई
"शुचि बहन यह अनूठा प्रयोग करते हुए इस सुंदर छंद बद्ध सृजन की बहुत बहुत बधाई।"
Jun 10
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion रास छंद "कृष्णावतार" in the group धार्मिक साहित्य
"शुचि बहन रचना की सराहना के लिए धन्यवाद।"
Jun 3
शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post पावन छंद "सावन छटा"
"सावन में प्रकृति की छटा का सुंदर वर्णन करती सुंदर रचना भैया।"
May 31
शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post शारदी छंद "चले चलो पथिक"
"बहुत सुंदर उत्साहवर्धक रचना। नए नए छंदों पर आपका लेखन अति प्रसंसनीय एवं संग्रहनीय है।"
May 31
शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion रास छंद "कृष्णावतार" in the group धार्मिक साहित्य
"वाहः भैया रास छन्द में भगवान कृष्ण के जन्म का बहुत ही सटीक वर्णन हुआ है।"
May 31
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
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रास छंद "कृष्णावतार"

(रास छंद)हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ। हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।।यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी। विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी। मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया। कारा-गृह में, जन्म लिया था, मझ रतिया।।घोर परीक्षा, पहले लेते, साँवरिया। जग को करते, एक बार तो, बावरिया। सीख छिपी है, हर विपदा में, धीर रहो। दर्शन चाहो, प्रभु के तो हँस, कष्ट सहो।।अर्जुन से बन, जीवन रथ का, स्वाद चखो। कृष्ण सारथी, रथ हाँकेंगे,…See More
May 29
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s discussion #सरसी_छन्द, उपहार in the group धार्मिक साहित्य
"शुचि बहन सरसी छंद में बहुत सरस सृजन।"
May 26
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s discussion #लावणी_छन्द, निधिवन in the group धार्मिक साहित्य
"वाह शुचि बहन लावणी छंद में निधिवन की अपार महिमा का सुंदर वर्णन।.बधाई हो।"
May 26

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर and बासुदेव अग्रवाल 'नमन' are now friends
May 25
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s blog post #रसाल_छन्द, प्रकृति से खिलवाड़
"शुचि बहन इस कष्ट साध्य छंद में बिगड़ते पर्यावरण पर बहुत सार्थक सृजन।"
May 23
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion रक्ता छंद "शारदा वंदन" in the group धार्मिक साहित्य
"शुचि बहन धन्यवाद।"
May 23
शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion रक्ता छंद "शारदा वंदन" in the group धार्मिक साहित्य
May 22
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हवा भी दिलजली होगी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी इस खूबसूरत ग़ज़ल की बधाई स्वीकारें।"
May 19
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post शारदी छंद "चले चलो पथिक"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपके रचना पसंद करने और प्रोत्साहन का हार्दिक आभार"
May 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post शारदी छंद "चले चलो पथिक"
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन। बहुत सुन्दर रचना हुई है । नये छंद से परिचित कराने के लिए हार्दिक बधाई।"
May 19
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

शारदी छंद "चले चलो पथिक"

(शारदी छंद)चले चलो पथिक।बिना थके रथिक।।थमे नहीं चरण।भले हुवे मरण।।सुहावना सफर।लुभावनी डगर।।बढ़ा मिलाप चल।सदैव हो अटल।।रहो सदा सजग।उठा विचार पग।।तुझे लगे न डर।रहो न मौन धर।।प्रसस्त है गगन।उड़ो महान बन।।समृद्ध हो वतन।रखो यही लगन।।===========*शारदी छंद* विधान:-"जभाल" वर्ण धर।सु'शारदी' मुखर।।"जभाल" = जगण  भगण लघु।2। 2।। । =7 वर्ण, 4चरण दो दो सम तुकान्त*****************मौलिक व अप्रकाशितSee More
May 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं।

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

शारदी छंद "चले चलो पथिक"

(शारदी छंद)

चले चलो पथिक।

बिना थके रथिक।।

थमे नहीं चरण।

भले हुवे मरण।।

सुहावना सफर।

लुभावनी डगर।।

बढ़ा मिलाप चल।

सदैव हो अटल।।

रहो सदा सजग।

उठा विचार पग।।

तुझे लगे न डर।

रहो न मौन धर।।

प्रसस्त है गगन।

उड़ो महान बन।।

समृद्ध हो वतन।

रखो यही लगन।।

===========

*शारदी छंद* विधान:-

"जभाल" वर्ण धर।

सु'शारदी' मुखर।।

"जभाल" = जगण  भगण लघु

।2। 2।। । =7…

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Posted on May 18, 2021 at 4:01pm — 3 Comments

पावन छंद "सावन छटा"

(पावन छंद)

सावन जब उमड़े, धरणी हरित है।

वारिद बरसत है, उफने सरित है।।

चातक नभ तकते, खग आस युत हैं।

मेघ कृषक लख के, हरषे बहुत हैं।।

घोर सकल तन में, घबराहट रचा।

है विकल सजनिया, पिय की रट मचा।।

देख हृदय जलता, जुगनू चमकते।

तारक अब लगते, मुझको दहकते।।

बारिस जब तन पे, टपकै सिहरती।

अंबर लख छत पे, बस आह भरती।।

बाग लगत उजड़े, चुपचाप खग हैं।

आवन घर उन के, सुनसान मग हैं।।

क्यों उमड़ घुमड़ के, घन व्याकुल…

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Posted on May 13, 2021 at 9:00am — 1 Comment

सायली (कोरोना)

सायली (कोरोना)

आसुरी

कोरोना मगरूरी

कायम रखें दूरी

मास्क जरूरी

मजबूरी!

*****

महाकाल

कोरोना विकराल

देश पर भूचाल

सरकारी अस्पताल

बदहाल।

*****

चमगादड़ी

कोरोना जकड़ी

संकट की घड़ी

आफत बड़ी

पड़ी।

*****

भड़की

कोरोना कलंकी

चमगादड़ से फड़की

मासूमों की

सिसकी।

*****

लाचारी

कोरोना महामारी

भर रही सिसकारी

दुनिया…

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Posted on April 29, 2021 at 10:18am — 4 Comments

समान सवैया "रस और कविता"

विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामना।

32 मात्रिक छंद "रस और कविता"

मोहित होता जब कोई लख, पग पग में बिखरी सुंदरता।

दाँतों तले दबाता अंगुल, देख देख जग की अद्भुतता।।

जग-ज्वाला से या विचलित हो, वैरागी सा शांति खोजता।

ध्यान भक्ति में ही खो कर या, पूर्ण निष्ठ भगवन को भजता।।

या विरहानल जब तड़पाती, धू धू कर के देह जलाती।

पूर्ण घृणा वीभत्स भाव की, या फिर मानव हृदय लजाती।।

जग में भरी भयानकता या, रोम रोम भय से कम्पाती।।

ओतप्रोत…

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Posted on March 21, 2021 at 11:44am — 4 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 11:03pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय हौसला बढ़ने का
At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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