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Sushil Sarna
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मुक्तक (आधार छंद - रोला )
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई। "
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

तकरार- (कुंडलिया) ....

रहने भी दो अब सनम, आपस की तकरार । बीत न जाए व्यर्थ  में, यौवन  के  दिन  चार । यौवन के दिन  चार,  न लौटे  कभी  जवानी । चार  दिनों   के  बाद , जवानी  बने  कहानी । कह  'सरना'  कविराय,  पड़ेंगे  ताने   सहने । फिर   सपनों के   साथ, लगेंगी   यादें   रहने ।सुशील सरना / 25-10-21मौलिक एवं अप्रकाशित See More
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

अनपढ़े ग्रन्थ

कुछ दर्द एक महान ग्रन्थ की तरह होते हैं पढना पड़ता है जिन्हें बार- बार उनकी पीड़ा समझने के लिए ।ऐसे दर्द अट्टालिकाओं में नहीं सड़क के किनारों पर पत्थर तोड़तेया फिर चन्द सिक्कों की जुगाड़ में सिर पर टोकरी ढोते हुएया फिर पेट और परिवार की भूख के लिए किसी चिकित्सालय के बाहर अपना रक्त बेचते हुएया फिर रिश्तों के बाजार में अपने अस्तित्व की बोली लगाते हुए अक्सर मिल जाते हैं।अनपपढ़े ही रह जाते हैंअक्सर ये ग्रन्थ दर्द केसुशील सरना /22-10-21मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Friday
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी , सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।सारा सार तो इसमें है , बहुत खूब , हार्दिक बधाई ! सादर।"
Oct 20
JAWAHAR LAL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post वादे पर चन्द दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी, समसामयिक दोहे के लिए बधाई स्वीकारें!"
Oct 19
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post वादे पर चन्द दोहे .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब , अच्छे दोहे लिखे आपने , इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I  एक निवेदन ये है कि पटल पर आई हुई रचनाओं पर भी कमेन्ट करना आपकी अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है , इस पर ध्यान दें I "
Oct 19
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब , दोहों का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें I  `पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान`---इस मिसरे के दुसरे हिस्से का वाक्य विन्यास ठीक नहीं , देखें I `पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।मात-पिता की साधना, भूल गया…"
Oct 19
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वादे पर चन्द दोहे .......

मीठे वादे दे रही, जनता को सरकार । गली-गली में हो रहा, वादों का व्यापार ।1।जीवन भर नेता करे, बस कुर्सी से प्यार । वादों के व्यापार में, पलता भ्रष्टाचार ।2।जनता को ही लूटती,जनता की सरकार । जम कर देखो हो रहा, वादों का व्यापार ।3।जनता जाने झूठ है, नेता की हर बात । झूठे वादों को मगर, माने वो सौगात ।4।भाषण में है दक्ष  जो ,नेता वही महान । वादों से वो भूख का, करता सदा निदान ।5।सुशील सरना / 17-10-21 मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Oct 19
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वादे पर चन्द दोहे .......

मीठे वादे दे रही, जनता को सरकार । गली-गली में हो रहा, वादों का व्यापार ।1।जीवन भर नेता करे, बस कुर्सी से प्यार । वादों के व्यापार में, पलता भ्रष्टाचार ।2।जनता को ही लूटती,जनता की सरकार । जम कर देखो हो रहा, वादों का व्यापार ।3।जनता जाने झूठ है, नेता की हर बात । झूठे वादों को मगर, माने वो सौगात ।4।भाषण में है दक्ष  जो ,नेता वही महान । वादों से वो भूख का, करता सदा निदान ।5।सुशील सरना / 17-10-21 मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Oct 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर । सादर नमन"
Oct 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय छोटे लाल सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Oct 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, बहुत अर्थपूर्ण और संदेशप्रद दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Oct 17
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही दमदार दोहे वह भी सन्देशप्रद दिल से बधाई"
Oct 17
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अपने दोहे .......

अपने  दोहे .......पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान ।कैसे ऐसे जीव का, भला करे भगवान ।1।पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।मात-पिता की साधना, भूल गया नादान ।2।पूजा सारी व्यर्थ है, दुखी अगर माँ -बाप ।इससे बढ़कर  सृृष्टि में , नहीं दूसरा  पाप।3।सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।मन से जो पूजा करे, मिल जाएँ भगवान ।पत्थर के भगवान में, आ जाते हैं प्रान ।5।झूठी पूजा से प्रगट , कैसे हों भगवान ।धन लोलुप तो माँगता, धन का बस वरदान ।6।चाहे पूजो राम तुम, चाहे पूजो…See More
Oct 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मुक्तक (आधार छंद - रोला )
"आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर । सहमत"
Oct 16
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तो रो दिया .......

तो रो दिया .......मौन की गहन कंदराओं में मैनें मेरी मैं को पश्चाताप की धूप में विक्षिप्त तड़पते देखातो रो दिया ।खामोशी के दरिया पर मैंने मेरी मैं को तन्हा समय की नाव पर अपराध बोध से ग्रसित तिमिर में लीन तीर की कामना में लिप्त व्यथित देखा तो रो दियाक्रोध के अग्नि कुण्ड में स्वार्थघृत की आहूति से परिणामों कोजब धू- धू कर जलते देखा तो रो दियासच , क्रोध की सुनामी के बाद जब तबाही का मंजर देखा तो साथ मेरे मेरा मैं भी रो दिया ।सुशील सरना / 30-9-21मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Oct 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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तकरार- (कुंडलिया) ....

रहने भी दो अब सनम, आपस की तकरार ।
बीत न जाए व्यर्थ  में, यौवन  के  दिन  चार ।
यौवन के दिन  चार,  न लौटे  कभी  जवानी ।
चार  दिनों   के  बाद , जवानी  बने  कहानी ।
कह  'सरना'  कविराय,  पड़ेंगे  ताने   सहने ।
फिर   सपनों के   साथ, लगेंगी   यादें   रहने ।

सुशील सरना / 25-10-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on October 25, 2021 at 1:30pm

अनपढ़े ग्रन्थ

कुछ दर्द

एक महान ग्रन्थ की तरह होते हैं

पढना पड़ता है जिन्हें बार- बार

उनकी पीड़ा समझने के लिए ।

ऐसे दर्द

अट्टालिकाओं में नहीं

सड़क के किनारों पर

पत्थर तोड़ते

या फिर चन्द सिक्कों की जुगाड़ में

सिर पर टोकरी ढोते हुए

या फिर पेट और परिवार की भूख के लिए

किसी चिकित्सालय के बाहर

अपना रक्त बेचते हुए

या फिर रिश्तों के बाजार में

अपने अस्तित्व की बोली लगाते हुए

अक्सर मिल जाते…

Continue

Posted on October 22, 2021 at 1:30pm

वादे पर चन्द दोहे .......

मीठे वादे दे रही, जनता को सरकार ।

गली-गली में हो रहा, वादों का व्यापार ।1।

जीवन भर नेता करे, बस कुर्सी से प्यार ।

वादों के व्यापार में, पलता भ्रष्टाचार ।2।

जनता को ही लूटती,जनता की सरकार ।

जम कर देखो हो रहा, वादों का व्यापार ।3।

जनता जाने झूठ है, नेता की हर बात ।

झूठे वादों को मगर, माने वो सौगात ।4।

भाषण में है दक्ष  जो ,नेता वही महान ।

वादों से वो भूख का, करता सदा निदान ।5।

सुशील सरना /…

Continue

Posted on October 17, 2021 at 4:30pm — 2 Comments

अपने दोहे .......

अपने  दोहे .......

पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान ।

कैसे ऐसे जीव का, भला करे भगवान ।1।

पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।

मात-पिता की साधना, भूल गया नादान ।2।

पूजा सारी व्यर्थ है, दुखी अगर माँ -बाप ।

इससे बढ़कर  सृृष्टि में , नहीं दूसरा  पाप।3।

सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।

बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।

मन से जो पूजा करे, मिल जाएँ भगवान ।

पत्थर के भगवान में, आ जाते हैं प्रान…

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Posted on October 16, 2021 at 3:21pm — 6 Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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