For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

स्वतंत्रता दिवस पर कुछ दोहे :

15.8.20
स्वतंत्रता दिवस पर कुछ दोहे :

जाने कितने चढ़ गए, फाँसी माँ के लाल ।
मिट कर उन्नत कर गए, भारत माँ का भाल ।।

धधक रहा है आज भी ,जलियाँवाला बाग ।
जहां गूँजते आज भी, आजादी के राग ।।

चुपके -चुपके आज भी, हम पर होते वार ।.
नव भारत हर हाल में, रहता अब तैयार ।।

दुश्मन की हर चाल को, हम करते नाकाम ।
बदले भारत को सभी, करते आज सलाम ।।

आजादी की दे गए , मिट कर जो सौगात ।
रात गुलामी की गई, रोशन हुआ प्रभात ।।



सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 901

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 26, 2020 at 8:33pm

आदरणीय आशीष यादव जी सृजन पर आपकी हृदयग्राही प्रतिक्रिया का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 1:22am

बहुत अच्छे दोहे बने हैं। congratulations स्वीकार कीजिए।

Comment by Sushil Sarna on August 20, 2020 at 9:53pm

आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार। त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार। 

Comment by Samar kabeer on August 19, 2020 at 8:13pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

'धधक रहा है आज भी ,जलियाँवाला बाग ।
जहां गूँजते आज भी, आजादी के राग'

इस दोहे में 'बाग़' और 'राग' की तुकांतता सहीह नहीं है,देखियेगा ।

कुछ उर्दू शब्दों में आपने नुक़्ते नहीं लगाए हैं,देखियेगा ।

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2020 at 5:38pm

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 19, 2020 at 5:27pm

वाह बहुत ही सुन्दर दोहे आदरणीय..

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2020 at 5:25pm
आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 18, 2020 at 8:21am

आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on August 17, 2020 at 9:40pm
आदरणीय जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से शुक्रिया ।
Comment by नाथ सोनांचली on August 17, 2020 at 4:41pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। समयानुकूल बेहतरीन दोहे सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
16 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
16 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
17 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
22 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
22 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service