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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//क्या इस बह्र को किसी और प्रचलित बह्र में बदला जा सकता है?// बिल्कुल बदला जा सकता है, आपका मतला देखें:- 'जिसका अपना यहाँ दायरा कम हैआसमाँ को भी  वो  मानता कम है' अब आपके इस मतले को हम 2122 1212 22/112 पर ऐसे कर सकते…"
6 hours ago
Samar kabeer posted a blog post

एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल2212 1122 1212 22/112सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआसुख़न में तेरे बता कैसे ये कमाल हुआहज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआतमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारोहमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआलिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तूमतुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआहुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की हैकि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल हुआज़बाँ से कह न सके वो मगर सुना ये हैहमारे जाने का उनको बहुत मलाल हुआख़ज़ाने हुस्न के रब ने अता किये जो उसेतो मैं भी इश्क़ की दौलत से माला माल हुआ'समर' वो फूल बड़ा ही नसीब…See More
7 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ये प्रचलित बह्र नहीं है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । "
Wednesday
Samar kabeer commented on Om Parkash Sharma's blog post दोहे
"जनाब ओमप्रकाश जी आदाब,दोहों का अच्छा प्रयास है,लेकिन अभी आपको इसके विधान का अध्यन करना होगा, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे कहे आपने, बधाई स्वीकार करें । 'नैनों से नैना करे'--'करे' को "करें" कर लें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'एक बेहिस को दिल दिया हमने कह के अपना उसे ख़ुदा हमने' मतले के ऊला को सानी और सानी को ऊला कर लें । खफ़ा--"ख़फ़ा""
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी प्रस्तुति है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post सुलगते अन्धेरे. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । अन्धेरे --''अँधरे'' 'अब अच्छी नहीं लगती मुझेआहटें' इस पंक्ति में 'लगती' को "लगतीं" कर लें ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on Om Parkash Sharma's blog post दोहे
"जनाब ओमप्रकाश शर्मा जी आदाब, दोहों का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों पर ध्यान दें ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रात भर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'बजती हवा से दूर जो मंदिर की घन्टियाँ' इस मिसरे में 'बजती' को "बजतीं" कर लें । 'साकी गगन से जाम गिराती है रात…"
Jul 17
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'है रक्त बेबशों  का  भी  इन में लगा हुआ' इस मिसरे में 'बेबशों' को "बेबसों" कर लें ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मन का साहिल. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । अब आपकी तबीअत कैसी है?"
Jul 17
Samar kabeer commented on Rahul Dangi Panchal's blog post उठा लाये फिर हम फ़सानों के पत्थर- ग़ज़ल
"//वैसे एहसानों काफिया मैंने rekhta की काफिया संग्रह से लिया था जहां पर इसका 2122 दर्शाया गया,  मैं भी 222 ही का ही उपयोग किया है पहले// रेख़्ता पर अधिकतर जानकारियाँ ग़लत दी हुई हैं,उन पर भरोसा न किया करें । आख़री शैर हटाना ही उचित होगा ।"
Jul 12

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poet

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एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल

2212 1122 1212 22/112

सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआ

सुख़न में तेरे बता कैसे ये कमाल हुआ

हज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआ

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो

हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ

लिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तूम

तुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआ



हुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की है

कि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल…

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Posted on July 24, 2021 at 6:53pm

"ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

जिसने देखा वो ये बोला ओबीओ

कोई नहीं है तेरे जैसा ओबीओ

जब तक ज़िंदा हूँ मैं साथ निभाऊँगा

है ये तुझ से मेरा वादा ओबीओ

'बाग़ी' जी के साथ सभी ने मिलजुल कर

नाज़ों से तुझको है पाला ओबीओ

दुनिया के कोने कोने में फैल गया

तू ने जो भी पाठ पढ़ाया ओबीओ

तेरा नाम शिखर पर दुनिया लिखती थी

मैंने कल शब ख़्वाब में देखा…

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Posted on April 1, 2021 at 2:52pm — 18 Comments

तरही ग़ज़ल

दोस्तो गर ज़िन्दगी में कामरानी चाहिए

ज़ह्न-ओ-दिल से गर्द नफ़रत की हटानी चाहिए



अर्ज़ कर दूँ आख़िरी ख़्वाहिश इजाज़त हो अगर

एक शब मुझको तुम्हारी मेज़बानी चाहिए



ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो

हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए



मूँद कर आँखें न चलना याद रखना ये सबक़

ज़िन्दगी में हर क़दम पर सावधानी चाहिए



ज़िन्दगी में लाज़मी तो है मगर इंसान को

दफ़्न करने के लिये भी माल पानी चाहिए



फ़ज़्ल से रब के मुकम्मल हो गई मेरी ग़ज़ल

दोस्तो…

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Posted on November 9, 2020 at 5:30pm — 23 Comments

"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

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Posted on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

Comment Wall (40 comments)

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At 9:30pm on January 31, 2021, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय मित्र समीर साहिब जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है





डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त

At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

 
 
 

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