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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-143 को सफल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद ।"
18 hours ago
सूबे सिंह सुजान left a comment for Samar kabeer
"वाह वाह वाह बहुत खूब। ओ बी ओ"
Friday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"दोस्तो आदाब, आज मेरी तबीअत ठीक नहीं है,इसलिये इस आयोजन में आपकी सेवा करने में असमर्थ हूँ,माज़रत चाहता हूँ ।"
Friday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"जनाब अनिल कुमार सिंह जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"सकगत है"
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है, और इस विधा में भी आप कामयाब हुए,हार्दिक बधाई स्वीकार करें । अरकान आपने ग़लत लिखे हैं,इस ग़ज़ल के अरकान ये हैं:- 2122 2122 2122 212 'भर गए झोली  हमारी ग़र्द  की  जागीर …"
May 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, दोहा ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'आँखें   को   देती  रहीं , आँखें  ये  संदेश '-- इस पंक्ति को यूँ कहें:- आँखों   को   देती  रहीं ,…"
May 14
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'पास तेरे रहने का हासिल नहीं है वक़्त पर' इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें :- 'वक़्त तेरे पास रहने का नहीं हासिल मगर ' 'याद आ जाता है मुझको तब तेरी…"
May 14
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"''अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ" अब मिसरा ठीक है ।"
May 12
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहा मुक्तक लिखे आपने, बधाई स्वीकार करेI "
May 11
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"मुहतरमा अमिता जी , सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें I "
May 11
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मनोरम छंद में मुक्तक ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मनोरम छंद पर मुक्तक का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  ये सीखने सिखाने का मंच है इसलिये रचना के साथ उसका विधान भी लिख देना उचित होता है, इससे नये सीखने वालों को आसानी होती है I "
May 11
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर गजल -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  'गीता कुरान बाँचना तब ही सफल समझमन माँ का पढ़के जब हुआ इन्सान आदमी'--इस शे`र का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है, क्योंकि "क़ुुुरआन" शब्द का वज़्न २२१ होता…"
May 11
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"मुहतरमा रचना भाटिया जी अआदाब , ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  'अपने दिल का जोर उसके दिल पर चलता है कहाँ'--ये मिसरा बह्र में नहीं देखें I  'मन मुआफ़िक ज़िन्दगी में जीना मरना है…"
May 10
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (इबादतों में अक़ीदत की सर-कशी न मिला)
"जनाब अमीरूद्दीन 'अमीर' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'वो वक़्त याद किया ख़ुद सिहर उठा मैं जब'-- मुझे इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं लगा, उचित लगे तो यों कर सकते हैं :- 'वो वक़्त…"
May 9
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें I  'देखे थे जो आपके , स्वप्न करो साकार'--मुझे ये पंक्ति ठीक लगी ,अर्थात :-यानी मैंने जो आपके सपने देखे थे उन्हें साकार करो I "
May 9

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ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

212 212 212

तू है इक आइना ओबीओ

सबने मिल कर कहा ओबीओ

जो भी तुझ से मिला ओबीओ

तेरा आशिक़ हुआ ओबीओ

तुझसे बहतर अदब का नहीं

कोई भी रहनुमा ओबीओ

जन्म दिन हो मुबारक तुझे

मेरे प्यारे सखा ओबीओ

यार बरसों से रूठे हैं जो

उनको वापस बुला ओबीओ

हम तेरा नाम ऊँचा करें

है यही कामना ओबीओ

जो नहीं सीखना चाहते

उनसे पीछा छुड़ा ओबीओ

और जो सीखते हैं उन्हें

अपने…

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Posted on April 2, 2022 at 9:00pm — 31 Comments

'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 / 112

यही समाज की उलझन है क्या किया जाए

कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए

हर एक शख़्स गरानी के दौर में देखो

ख़ुद अपने आप से बदज़न है क्या किया जाए

सभी ये कहते हैं यारो हम आशिक़ों के लिये

ये शब अज़ल ही से बैरन है क्या किया जाए

सफ़र प जाने से पहले ये सोचना है हमें

हर एक गाम प रहज़न है क्या किया जाए

जो तू नहीं है तो…

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Posted on August 2, 2021 at 3:59pm — 23 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22/112

सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआ

हज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआ

 

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो

हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ

 

लिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तुम

तुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआ

 

हुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की है

कि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल हुआ

 

ज़बाँ से कह न सके वो मगर सुना ये है

हमारे जाने का उनको बहुत मलाल…

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Posted on July 24, 2021 at 6:30pm — 17 Comments

"ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

जिसने देखा वो ये बोला ओबीओ

कोई नहीं है तेरे जैसा ओबीओ

जब तक ज़िंदा हूँ मैं साथ निभाऊँगा

है ये तुझ से मेरा वादा ओबीओ

'बाग़ी' जी के साथ सभी ने मिलजुल कर

नाज़ों से तुझको है पाला ओबीओ

दुनिया के कोने कोने में फैल गया

तू ने जो भी पाठ पढ़ाया ओबीओ

तेरा नाम शिखर पर दुनिया लिखती थी

मैंने कल शब ख़्वाब में देखा…

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Posted on April 1, 2021 at 2:52pm — 18 Comments

Comment Wall (41 comments)

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At 4:41pm on May 27, 2022, सूबे सिंह सुजान said…

वाह वाह वाह बहुत खूब।

ओ बी ओ

At 9:30pm on January 31, 2021, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय मित्र समीर साहिब जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है





डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त

At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

 
 
 

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