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Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय ब्रज जी बस कोशिश जारी है आपका आभार ग़ज़ल तक आने के लिये ऐसा लगता है की शायद दोषरहित ग़ज़ल लिखना असंभव है अभी तक तो बाकी तो सब गुणीजनों की इस्लाह से इतना हुआ है कोशिश रहेगी आगे भी सुधार हो समर गुरु जी जैसे निस्वार्थ इस्लाहकारों को ख़ुदा…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय अमीर जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल तक आने के लिये आपका दिल से आभार"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सहृदय शुक्रिया आ नूर जी आपकी ग़ज़ल मुझे बहुत पसंद आती है ग़ज़ल तक आने के लिये शुक्रिया मैं इस ग़ज़ल को जल्द ही दुरुस्त कर दूंगा कोशिश जारी है"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"भाई आजी तमाम जी जिस तरह से आप मेहनत कर रहे हैं...निश्चय ही एक दिन दोषरहित ग़ज़ल कहेंगे...ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।"
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ग़ज़ल की अच्छी कोशिश हुई है बधाई स्वीकार करें। मुहतरम समर कबीर साहिब ने मुकम्मल इस्लाह कर दी है।  सादर। "
Thursday
Aazi Tamaam's blog post was featured

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लियेकिसी के हुस्न का सैलाब देखने के लियेकहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आयेवो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लियेन जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमकोन जाने कब से थे बेताब देखने के लियेछुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारोबचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लियेकरीब जा के हर एक चीज खोयी है हमनेलुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के लियेकटी है ज़िंदगी अपनी भी यूँ उसूलों परफ़ज़ा में रह गया तल्ख़ाब देखने के लियेहाँ एक बार किया था भरम निग़ाहों नेदिली पसंद का आदाब देखने…See More
Thursday
Nilesh Shevgaonkar commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"आ. आज़ी साहबमतला क्या कहना चाहता है यह स्पष्ट नहीं है..बाकी सब समर सर कह ही चुके हैं..प्रयास के लिए बधाई सादर "
Thursday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सादर प्रणाम गुरु जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल पर बारीकी से गौर फरमाने के लिये दिल से आभार मैं कोशिश करूँगा दुरुस्त करने की"
Oct 11
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है , बधाई स्वीकार करें  I  `किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये किसी के हुस्न का सैलाब देखने के लिये` मतला नहीं हुआ , दोनों मिसरे अलग अलग हैं इनमें रब्त पैदा नहीं हो सका ,…"
Oct 11
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लियेकिसी के हुस्न का सैलाब देखने के लियेकहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आयेवो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लियेन जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमकोन जाने कब से थे बेताब देखने के लियेछुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारोबचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लियेकरीब जा के हर एक चीज खोयी है हमनेलुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के लियेकटी है ज़िंदगी अपनी भी यूँ उसूलों परफ़ज़ा में रह गया तल्ख़ाब देखने के लियेहाँ एक बार किया था भरम निग़ाहों नेदिली पसंद का आदाब देखने…See More
Oct 10
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नहीं कर कुन्द पाओगे कलम की धार नेता जी
"सुंदर ग़ज़ल के लिये ह्रदय से बधाई धामी सर ये ग़ज़ल मुझे आपकी बेहद पसंद आई आ अमीर जी से सहमत हूँ सुधार के विषय में"
Aug 12
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मेरी माँ)
"बेहद भावपूर्ण सुंदर ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें आ"
Aug 12
Mamta gupta and Aazi Tamaam are now friends
Jul 30
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"हौसला अफ़ज़ाई का सहृदय शुक्रिया जनाब सादर"
Jul 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"सहृदय शुक्रिया आ हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार जी आ सर की इस्लाह सर आँखों पर"
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Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"सहृदय शुक्रिया आ rozina जी हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार"
Jul 29

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Male
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Uttar Pradesh
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CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
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ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112

किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

किसी के हुस्न का सैलाब देखने के लिये

कहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आये

वो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लिये

न जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमको

न जाने कब से थे बेताब देखने के लिये

छुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारो

बचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लिये

करीब जा के हर एक चीज खोयी है हमने

लुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के…

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Posted on October 10, 2021 at 12:15pm — 8 Comments

ग़ज़ल: ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

1222 1222 1222 1222

ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

मिरी जाँ ये तो बस शाहों कि पोशाकें सजाता है

रिआया भी तो देखो कितनी दीवानी सी लगती है

उसी को ताज़ कहती है जो इनके घर जलाता है

नगर में नफ़रतों के भी महब्बत कौन समझेगा

ए पागल दिल तू वीराने में क्यों बाजा बजाता है

हमारे हौसले तो कब के आज़ी टूट जाते पर

ये नन्हा सा परिंदा है जो आशाएँ जगाता है

कोई बेचे यहाँ आँसू तो कोई…

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Posted on June 24, 2021 at 6:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है

122 122 122 122

उठाकर शहंशह क़लम बोलता है

चढ़ा दो जो सूली पे ग़म बोलता है

ये फरियाद लेकर चला आया है जो

ये काफ़िर बहुत दम ब दम बोलता है

जुबाँ काट दो उसकी हद को बता दो

बड़ा कर जो कद को ख़दम बोलता है

गँवारों की वस्ती है कहता है ज़ालिम

किसे नीच ढा कर सितम बोलता है

बिठाता है सर पर उठाकर उसी को

जो कर दो हर इक सर क़लम बोलता है

बड़ी बेबसी में है जीता वो ख़ादिम

बड़ाकर जो…

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Posted on June 15, 2021 at 4:30pm — 6 Comments

नग़मा: दिल

1222 1222 1222 1222

अज़ीब इस दिल की बातें हैं अज़ीब इसके तराने हैं

अज़ीब ही दर्द है इसका अज़ीब ही दास्तानें हैं

अज़ीब अंज़ाम है इसका अज़ीब आग़ाज़ करता है

अगर जो टूट भी जाये तो ना आवाज़ करता है

कभी सुरख़ाब करता है कभी बेताब करता है

दिल ए नादाँ............. दिल ए नादाँ...........

दिल ए नादाँ हर इक ख़्वाहिश को ही आदाब करता है

ये करतब कितनी आसानी से यारो दिल ये करता है

कभी ये ज़ख़्म देता है,…

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Posted on June 10, 2021 at 10:23am — 2 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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