For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
Share

Aazi Tamaam's Friends

  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • सुचिसंदीप अग्रवालl
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

Aazi Tamaam's Page

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ नहीं रहा है अगर कुछ अच्छा ज़हन में आता है तो अवश्य कोशिस करूँगा"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता) बाधित हो रही है । बदलाव का प्रयास करे। सादर.."
22 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती हैमैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जानामाँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती हैदुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जबमाँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती हैमाँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारामाँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती हैऔर बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की महिमामाँ से ही जग जन्मा है माँ अवतारी होती हैइन सांसों और इस प्रकृति का सार यही है मौलामाँ से ही माँ जन्मे रोज़…See More
yesterday
सुचिसंदीप अग्रवालl and Aazi Tamaam are now friends
May 3
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दुखद समाचार है सभी आदरणीय गुरुजन एवं मित्रगण अपना ध्यान रक्खे बेहद कठिन समय है गुजर जायेगा आदरणीय नारायण जी को प्रकृति आत्मीय शांति प्रदान करे"
May 2
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालोहमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगेतुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगेमिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगेजरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे कोये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगेयहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहराअगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगेहमें आदत है पीने की सो हम तो ज़ह्र भी पी लेंमगर तुम ज़िंदगी के घूँट कड़वे पी न पाओगेहवाएँ गर्म भी होंगी हवाएँ सर्द भी होंगींकभी होंगी खिलाफ़त…See More
Apr 30
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आ धामी सर आपकी ग़ज़लों में एक अलग ही बात होती है सुंदर ग़ज़ल है कहीं कहीं टंकण त्रुटियां हैं एक बार देख लीजियेगा सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post "करो उजागर प्रतिभा अपनी"
"सादर प्रणाम आ सुचसंदीप जी बेहद उत्तम रचना है बधाई स्वीकारें सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam posted a blog post

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसेइक झील दिन में लगती है किंदील के जैसेहर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों परमर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाईदिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे हैसूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसेहै तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तकसब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहदसब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद कोमैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसेचलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसेहै धरती के अंदर लावा किंदील के जैसेऊपर भी काशी कावा है किंदील के जैसेकिंदील ही तो हैं जो बातें दिल जलाती…See More
Apr 28
Aazi Tamaam commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"सुंदरता से कांटे की अहमियत का वर्णन करती रचना अच्छी लगी सादर प्रणाम आ सरना जी"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय बसंत जी सुंदर ग़ज़ल है सादर"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़र (ग़ज़ल)
"सादर प्रणाम आदरणीय धर्मेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई है"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर हौसला अफ़ज़ाई व सराहना के लिये सहृदय शुक्रिया ये मेरी पहली छंद रचना है सादर"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"आ. भाई आजी तमाम जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26
Aazi Tamaam posted a blog post

गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

14-12रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गयेखुशनुमा इंसान दहशत, के निशाने हो गयेबेबसी का हाल देखा, दिल दहल कर रह गयामुफ़्लिसी में ज़िंदगी का, ख़्वाब जल कर रह गयाडर से कोरोना के भी, वो भला अब क्या डरेनित्य जो रोटी कि खातिर, मौत से सौदा करेइंसानों के बीच भाव, घृणा का पैदा कियाधर्म के इन रक्षकों ने, देश का सौदा कियापर ये धर्मांध किसी का, साथ याँ देते नहींइंसानियत को धर्म से, ऊपर ये रखते नहींआज मंज़र है भयावह, मौत बन फ़ैली बबाकोई तो हो मोजिज़ा कि, अब यहाँ भेजे दवाज़िंदगी उन जंगलों में, मस्त भी थी टास्क…See More
Apr 25
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"सादर प्रणाम धामी सर अच्छी ग़ज़ल हुई है सादर"
Apr 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

Aazi Tamaam's Photos

  • Add Photos
  • View All

Aazi Tamaam's Blog

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22

माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती है

माँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती है

मैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जाना

माँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती है

दुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जब

माँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती है

माँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारा

माँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती है

और बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की…

Continue

Posted on May 9, 2021 at 3:29pm — 2 Comments

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222

जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

हमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगे

तुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगे

मिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगे

जरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे को

ये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगे

यहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहरा

अगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगे

हमें आदत है पीने की सो हम तो…

Continue

Posted on April 30, 2021 at 11:22am

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसे

इक झील दिन में लगती है किंदील के जैसे

हर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों पर

मर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाई

दिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे है

सूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसे

है तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तक

सब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहद

सब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद को

मैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसे

चलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसे

है धरती के…

Continue

Posted on April 28, 2021 at 10:59am

गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

14-12

रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

खुशनुमा इंसान दहशत, के निशाने हो गये

बेबसी का हाल देखा, दिल दहल कर रह गया

मुफ़्लिसी में ज़िंदगी का, ख़्वाब जल कर रह गया

डर से कोरोना के भी, वो भला अब क्या डरे…

Continue

Posted on April 24, 2021 at 11:30pm — 2 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"ख्याल बहुत उम्दा हैं गज़ल में। हार्दिक बधाई, भाई लक्ष्मण जी।"
3 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आपकी यह गज़ल पढ़ कर भी आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, मेरे भाई, लक्ष्मण जी।"
4 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सामयिक स्थिति इंगित करती यह गज़ल अच्छी बनी है, भाई लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ…"
17 hours ago
Admin posted discussions
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता)…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनजाना उन्माद
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
23 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद मिलते ही तुमसे हर बारनीलाकाश सारामुझको अपना-सा लगेबढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वारकण-कण…See More
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी…See More
yesterday
सालिक गणवीर posted blog posts
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service