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सालिक गणवीर
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने. बधाई स्वीकार करें।"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय   dandpani nahak  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीया  Richa Yadav जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Amit swapnil  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Dayaram Methani जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय Naveen Mani Tripathi जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Sanjay Shukla जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने. बधाई स्वीकार करें।"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Amit swapnil  जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने. बधाई स्वीकार करें।"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Anil Kumar Singh जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने. बधाई स्वीकार करें।"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय  Anil Kumar Singh जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने. बधाई स्वीकार करें।"
May 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"2122-2122-2122-212 क्या बुरे दिन आ गए सब ने पराया कर दियादुख तो है इस बात का तुमने भी ऐसा कर दिया (1) वो न आया मुझसे मिलने मेरी मजबूरी ये थीटूटी बैसाखी ने मुझको बेसहारा कर दिया (2) वज्ह होनी चाहिए जीने की उसने इसलियेज़ख़्म भरते ही नया इक दर्द पैदा…"
May 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  नादिर ख़ान जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  Amit swapni  जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'   जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  नादिर ख़ान  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार।   "
Apr 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

झूठ बोले हैं न जाने कितने.......ग़ज़ल- सालिक गणवीर

2122-1122-22/112

झूठ बोले हैं न जाने कितने

उसको आते हैं बहाने कितने (1)

मैं किसी से भी तो नाराज नहीं

आ गए लोग मनाने कितने (2)

अब भी लोगों के नई दुनिया में

हैं ख़यालात पुराने कितने (3)

एक भी लफ़्ज मुझे याद नहीं

याद आते हैं वो गाने कितने (4)

घर जला कोई बुझाने न गया

आ गए आग लगाने कितने (5)

साथ आया न निभाने कोई

रस्म आएंँगे निभाने कितने (6)

अब कहीं पर तू ठहर जा…

Continue

Posted on February 3, 2022 at 9:33am — 4 Comments

यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)

122-122-122-122

यही है शिकायत यही तो गिला है

चराग़ों तले क्यों अँधेरा हुआ है (1)

लुटाया है सब कुछ कहा जा रहा है

मैं ये सोचता हूँ मुझे क्या मिला है (2)

कभी सामने जो अकड़ता बहुत था

वही उसके क़दमों के नीचे पड़ा है (3)

न आगे कोई है न है कोई पीछे

बयाँ दे रहा बीच सबके खड़ा है (4)

बड़ी मुश्किलों से कटी ज़िंदगी ये

न जाने मुक़द्दर में क्या क्या लिखा है (5)

ख़ुशी के दो पल हाथ आते नहीं पर

ये ग़म है कि…

Continue

Posted on December 24, 2021 at 11:00pm — 4 Comments

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

Continue

Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

Continue

Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
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