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सालिक गणवीर
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मनोज अहसास commented on सालिक गणवीर's blog post यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई। आदरणीय समर साहब की सलाह का संज्ञान लें । सादर.."
Jan 12
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।  आ. भाई समर जी की सलाह का संज्ञान लें । सादर.."
Jan 5
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब , ग़ज़ल अभी समय चाहती है , बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I "
Dec 30, 2021
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय सालिक जी हार्दिक बधाई"
Dec 30, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई  Amit Kumar "Amit"जी सादर अभिवादन तरही ग़ज़ल का उम्दः प्रयास है आपका  । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई  Aazi Tamaam जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल  कही है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई  आशीष यादव जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल  कही है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन  तरही ग़ज़ल का उम्दः प्रयास है आपका । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय  Manan Kumar singh जी सादर अभिवादन अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय Dayaram Methani   जीसादर अभिवादन तरही ग़ज़ल का उम्दः प्रयास है आपका । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया  Anjuman Mansury 'Arzoo' जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल  कही  है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें। गिरह का मिसरा ख़ूब हुआ है मुहतरमा ।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय Ravi Shukla जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल कही है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें। चलते चलते वाला शैर ख़ूब हुआ है मुहतरम।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय  Anil Kumar Singh भाई जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल  कही है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई  dandpani nahakजी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल  कही  है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई  Nilesh Shevgaonkar जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ। आपकी टिप्पणी पढ़कर अब लग रहा हैं मैं भी ठीक ठाक लिख रहा हूँ। सलामत रहें।"
Dec 29, 2021
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई munish tanha    जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ। "
Dec 29, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

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यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)

122-122-122-122

यही है शिकायत यही तो गिला है

चराग़ों तले क्यों अँधेरा हुआ है (1)

लुटाया है सब कुछ कहा जा रहा है

मैं ये सोचता हूँ मुझे क्या मिला है (2)

कभी सामने जो अकड़ता बहुत था

वही उसके क़दमों के नीचे पड़ा है (3)

न आगे कोई है न है कोई पीछे

बयाँ दे रहा बीच सबके खड़ा है (4)

बड़ी मुश्किलों से कटी ज़िंदगी ये

न जाने मुक़द्दर में क्या क्या लिखा है (5)

ख़ुशी के दो पल हाथ आते नहीं पर

ये ग़म है कि…

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Posted on December 24, 2021 at 11:00pm — 4 Comments

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

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Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

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Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी

कोने में पड़ा घर के परेशान हूँ मैं भी (1)

गर आप सरल होंगे तो आसान हूँ मैं भी

ज़ालिम हैं अगर आप तो हैवान हूँ मैं भी (2)

ये सूनी दिवारें ही मुझे घूर रहीं हैं

खाली है मकाँ भी मिरा सुनसान हूँ मैं भी (3)

गर मिल भी गए हम भी तो आबाद न होंगे

उजड़ा है अगर तू भी तो वीरान हूँ मैं भी (4)

आएगा किसी दिन वो लगाएगा ठिकाने

कमरे में पड़ा फालतू सामान हूँ मैं भी…

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Posted on September 16, 2021 at 8:30am — 5 Comments

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