For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सालिक गणवीर
  • Male
  • Chhattisgarh
  • India
Share on Facebook MySpace

सालिक गणवीर's Friends

  • Shekhar
  • नाकाम/naakaam
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

सालिक गणवीर's Groups

 

सालिक गणवीर's Page

Latest Activity

सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"212-212-212-212 जी रहा हूँ मैं उसकी ख़ुशी के लिएरब ने मुझको बनाया उसी के लिए (1) चंद ऐसे भी इंसान हैं जो यहाँहँसते हँसते मरे ज़िंदगी के लिए (2) दर्द के साथ ज़िंदा न तू रह सकामर गया हूँ मैं तेरी ख़ुशी के लिए (3) आग देकर मुझे लौट आए सभीकोई मरता नहीं…"
Jan 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Zaif   जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें।  ख़ुशी की जग़ह आज ग़म देखते हैं ,सादर सुझाव"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Ashok Kumar Raktale जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें। उस्ताद जी की इस्लाह क़ाबिल - ए - ग़ौर है।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Ashok Kumar Raktale जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  रवि भसीन 'शाहिद' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  dandpani nahak जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  Mahendra Kumar  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  नाथ सोनांचली जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Samar kabeer साहिब सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार। आवश्यक सुधार कर दिया उस्ताद जी। सलामत रहें।"
Oct 28, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई DINESH KUMAR VISHWAKARMA  जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  नाथ सोनांचली जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर बधाई स्वीकार करें।"
Oct 28, 2022
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार करें।"
Oct 28, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

झूठ बोले हैं न जाने कितने.......ग़ज़ल- सालिक गणवीर

2122-1122-22/112

झूठ बोले हैं न जाने कितने

उसको आते हैं बहाने कितने (1)

मैं किसी से भी तो नाराज नहीं

आ गए लोग मनाने कितने (2)

अब भी लोगों के नई दुनिया में

हैं ख़यालात पुराने कितने (3)

एक भी लफ़्ज मुझे याद नहीं

याद आते हैं वो गाने कितने (4)

घर जला कोई बुझाने न गया

आ गए आग लगाने कितने (5)

साथ आया न निभाने कोई

रस्म आएंँगे निभाने कितने (6)

अब कहीं पर तू ठहर जा…

Continue

Posted on February 3, 2022 at 9:33am — 4 Comments

यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)

122-122-122-122

यही है शिकायत यही तो गिला है

चराग़ों तले क्यों अँधेरा हुआ है (1)

लुटाया है सब कुछ कहा जा रहा है

मैं ये सोचता हूँ मुझे क्या मिला है (2)

कभी सामने जो अकड़ता बहुत था

वही उसके क़दमों के नीचे पड़ा है (3)

न आगे कोई है न है कोई पीछे

बयाँ दे रहा बीच सबके खड़ा है (4)

बड़ी मुश्किलों से कटी ज़िंदगी ये

न जाने मुक़द्दर में क्या क्या लिखा है (5)

ख़ुशी के दो पल हाथ आते नहीं पर

ये ग़म है कि…

Continue

Posted on December 24, 2021 at 11:00pm — 4 Comments

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

Continue

Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

Continue

Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' posted a blog post

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँअब तक मैं अपना  पहचान ही नहीं पा सका भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानवदड़बे में बंद…See More
8 hours ago
Zaif commented on Zaif's blog post ग़ज़ल - थामती नहीं हैं पलकें अश्कों का उबाल तक (ज़ैफ़)
"आ. बृजेश जी, बहुत आभार आपका।"
yesterday
Usha Awasthi posted a blog post

मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?

उषा अवस्थीमन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?वे घर ,जो दिखते नहींमिलते हैं धूल में, टिकते नहींपर "मैं"…See More
yesterday
Rachna Bhatia posted a blog post

सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--1221आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देतेहै दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते2है…See More
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् आपके कहे अनुसार ऊला बदल लेती हूँ। ईश्वर आपका साया हम पर…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
Saturday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
Saturday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
Friday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service