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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आल्हा   / वीर छंद  :  विषय  :जनसंख्या विस्फोट  जनसंख्या सीमित  हो बंधु, अन्यथा होय बंटाधार । रोज-रोज कोरोना  होगा, कौन  मिलेगा गंगा पार ।। आदि मानव जो जन्म पशु था, अब  ,,,,उसकी,,,है ,,,,सरकार…"
8 hours ago
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदाब,  सालिक गणवीर साहब,  छोटी  सी किन्तु  खूबसूरत ग़ज़ल  कही आपने, बधाई  !"
16 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

221     2121     1221     212रस्मो- रिवाज बन गयी पहचान हो गयी वो दिलरुबा थी मेरी जो भगवान हो गयीमक़तल बना है शहर वो रफ्तार ज़िन्दगी,मुश्किल हुई है जीस्त कि श्मशान हो गयीहर शख्स वो अकेला ही दुनिया में आजकल,क्या वो करें जो कह सकें गुलदान हो गयीसुन राजदाँ बहुत हुई बेज़ार ज़िन्दगी,कासिद नहीं आया जबाँ कान हो गयी जाहिल बने रईस वो हक़दार देश  के,अब हार-जीत उनकी खुदा शान हो गयी आदाब हो गया उन्हें 'चेतन' अभी सनम,हमराह ज़िन्दगी जहाँ जज़मान  हो गयीमौलिक एवं अप्रकाशित प्रोफ. चेतन प्रकाश 'चेतन'See More
Thursday
Chetan Prakash left a comment for रणवीर सिंह 'अनुपम'
"आदरणीय रणवीर सिंह 'अनूप' आपकी टिप्पणी मैंने अभी देखीं! आपने समारोह के समाप्त होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, और जब ऐसा हुआ तब तक  Reply Box बंद हो चुका था! फिर भी आप की प्रतिक्रिया का स्वागत है!  किन्तु सम्यक यह नहीं रहता कि…"
Thursday
रणवीर सिंह 'अनुपम' left a comment for Chetan Prakash
"आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे। निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है। जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो (कारण-नवीं मात्रा पर शब्द…"
Thursday
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भारतीय छंद विधान

इस समूह में भारतीय छंद शास्त्रों पर चर्चा की जा सकती है | जो भी सदस्य इस ग्रुप में चर्चा करने के इच्छुक हों वह सबसे पहले इस ग्रुप को कृपया ज्वाइन कर लें !See More
Thursday
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदाब, सुशील सरना जी, प्रथम दोनों दोहे अच्छे  लगे ! किन्तु आदरणीय  त्रयी  का अन्तिम  दोहे का तीसरा  चरण, " अच्छी लगी  संघर्ष  में" दोष पूर्ण है, चौदह  मात्राएं  हैं, सादर !"
Wednesday
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"अच्छी  ग़ज़ल  हुई है, भाई 'मुसाफिर,  ! लेकिन  चौथा शैर , बात औरों के सिर डाल कर देखो  / अपने ईमान को तौलता  कम है " में  रब्त का अभाव है, सादर  "
Wednesday
Chetan Prakash commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आदाब, अनीस अमान  कुल ग़ज़ल  अच्छी हुई है, सिवाय,  " वो दुश्मनों  की सबों में हैं और मुकाबिल  हैं",  देखिए   हैं" का दोहराव  हो  रहा  है ! सादर  !"
Monday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"शुभ संध्या,  अनीता जी ! मानव व्यक्तित्व के  बिखराव पर कुछ कहने का प्रयास किया है, आपने! कविता  को एक बार अच्छे से पढ़ कर पोस्ट किया  कीजिए, सु श्री जी ! वर्तनी के दोषों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता मुझे  महसूस हुई, यथा,…"
Jul 17
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"दोहे : कैसे- कैसे  लोग  भारत में रहते सखा, कैसे - कैसे लोग ! सुविधायें सारी चलें, माँ- द्रोही  ये लोग!! खाते - पीते देश में, करते  हैं हर भोग ! राजनीति करते बहुत, टोपी वाले लोग!! ज़रखरीद कमबख्त हैं, लगा खुरपका रोग ! भारत की…"
Jul 17
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आदाब, लक्ष्मण सिंह 'मुसाफिर' साहब,  शिल्प की दृष्टि से कहा जाए तो दोहे अच्छे हैं ! किन्तु भाई, साहित्य, विशेष  रूप  से  काव्य ऐसे सत्य का चिन्तन करता है जो सर्व प्रथम शिव है ! तदुपरांत कवि अपने शिल्प के कौशल से ग्राह्य…"
Jul 17
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"नमन, आदेरया, ग़ज़ल का मजमून निश्चय ही प्रशंसनीय है, उसके लिए आप बधाई की पात्र है ंं!  लेकिन मुझे ख़ुदा, खफ़ा और ख़शियों पर नुक़तेओ लगाए जाने को लेकर संदेह है! सादर.. "
Jul 16
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति .......
"नमन, आदरणीय सुशील सरना, सौ प्रयत्नों के बावजूद भी कुछ अव्यक्त रह जाना, वास्तव में एक सत्य है,  आपने यह महसूस किया और स्वीकार भी किया, सिद्ध करता है, आदाब, आप आचरण से ईमानदार हैं!  लेकिन आदरणीय फिर रचना का शीर्षक " अभिव्यक्ति की…"
Jul 16
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति .......
"नमस्कार, आदरणीय सुशील सरना साहब, कविता का सारा दारोमदार, मान्यवर, अभिव्यक्ति है! फिर, अभव्यक्ति के अवगुंठन' आपका क्या अभिप्राय है, समझ से परे है  ! आशा है, बंधुवर, उक्त बिन्दु पर आप जरूर प्रकाश डालेंगे! सादर "
Jul 15
Chetan Prakash commented on Om Parkash Sharma's blog post दोहे
"नमन, आदरणीय, दोहा छंद पर आपका अपेक्षाकृत बेहतर प्रयास है ! किन्तु बंधु, दूसरे दोहे का तीसरा  चरण, आओ प्रियतम शीघ्र  तुम" पुन: देखें ! चौदह  मात्राए हैं ! सादर  "
Jul 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
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About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

221     2121     1221     212

रस्मो- रिवाज बन गयी पहचान हो गयी 

वो दिलरुबा थी मेरी जो भगवान हो गयी

मक़तल बना है शहर वो रफ्तार ज़िन्दगी,

मुश्किल हुई है जीस्त कि श्मशान हो गयी

हर शख्स वो अकेला ही दुनिया में आजकल,

क्या वो करें जो कह सकें गुलदान हो गयी

सुन राजदाँ बहुत हुई बेज़ार ज़िन्दगी,

कासिद नहीं आया जबाँ कान हो गयी 

जाहिल बने रईस वो हक़दार देश  के,

अब हार-जीत उनकी खुदा शान हो…

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Posted on July 22, 2021 at 7:30am

ग़ज़ल

11212     11212     11212    11212

तुम्हें कह चुका हूँ, मैं दोस्तो मेरे साथ आज बहार है !

है महर खुदा की वो आसरा सो खिवैया ही तो कहार है !

थी नहीं कभी रज़ा जिसकी होड़ - उड़ान में कभी ज़िन्दगी,

कहूँ कैसै वो रहा साथी मेरा जहाँ, सदा बारहा वो तो हार है !

न तुम्हें कोई भी है फिक्र गाँव- गली का वो न लिहाज़ है, 

न वो शर्म माँ कि न बाप की,  न तुम्हें जड़ों से ही प्यार है !

न वो मानता है किसी भी सोच को जानता नहीं मर्म…

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Posted on July 12, 2021 at 10:05am

ग़ज़ल

2122    2122    2122   212

बह्रे रमल मुसम्मन महफूज़:

हिब्ज जिसको राजधानी क्या ज़रूरत धाम की !!

सारी दुनिया है उसी की कब रज़ा  हुक्काम  की !!

ज़िन्दगी तो  दोस्त बस जिन्दादिली का नाम है,

मौज़िजा हो जायेगा यारा इबादत  राम की  !!

साथ जीते भारती हम मत करें नाहक मना,

अन्त भी होगा यहीं या रब मलानत जाम की !!

आइना टूटा हुआ है, यार देखोगे क्या  तुम ?

इल्म की छाया नही है हर खिताबत नाम की !!

कब…

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Posted on July 6, 2021 at 8:53pm

ग़ज़ल

2122    2122    2122   212

बह्रे रमल मुसम्मन महफूज़:

हिब्ज जिसको राजधानी क्या ज़रूरत धाम की !!

सारी दुनिया है उसी की कब रज़ा  हुक्काम  की !!

ज़िन्दगी तो  दोस्त बस जिन्दादिली का नाम है,

मौज़िजा हो जायेगा यारा इबादत  राम की  !!

साथ जीते भारती हम मत करें नाहक मना,

अन्त भी होगा यहीं या रब मलानत जाम की !!

आइना टूटा हुआ है, यार देखोगे क्या  तुम ?

इल्म की छाया नही है हर खिताबत नाम की !!

कब…

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Posted on July 6, 2021 at 8:09pm

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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