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Chetan Prakash
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PHOOL SINGH commented on Chetan Prakash's blog post गीत.... असल कामयाबी जीवन की
"बहुत बहुत सुंदर गीत सर बधाई स्वीकारें "
Jan 27
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"212      212     212     212 भूल जाये दुनिया वो किसी  के लिए  है  ज़रूरी  नहीं  आदमी  के  लिए  रास्ते  सारे ही बन्द है अब यहाँ हो कहाँ जा गुजारा अभी के…"
Jan 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गीत.... असल कामयाबी जीवन की
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
Jan 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बंधु, आयोजन के तहत चित्रोक्त भाव सरसी छंद में ही व्यक्त किये जाने हैं, सो कहना न होगा, मैंने अपनी प्रस्तुति के अन्तर्गत सरसी छंद के तीन पद रचे हैं, पंक्तियाँ नहीं । सादर"
Jan 22
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. सु श्री pratibha pande, आप  प्रस्तुति  तक  पहुँची, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद  ! रचना, माननीया, आपकी संस्तुति पा सकी, आभारी  हूँ । " प्रथम  पंक्ति में मात्राएं  देख  लीजिए "  ' सन्नाटा (…"
Jan 21
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 141 in the group चित्र से काव्य तक
" सन्नाटा  पसरा है धरती पर, शीत बना यमराज । कोई नहीं हलचल प्रकृति है, कैसे जाऊँ काज ।।  रीत निभानी प्रीत मुझे की,  यायावर  बन  आज । कल्पना स्पर्श दिल प्रिया हुआ, है उद्यत युवराज ।। राँझा  ठहरा  पागल …"
Jan 21
Chetan Prakash posted a blog post

गीत.... असल कामयाबी जीवन की

असल कामयाबी जीवन की सहज सरल सादा जीवन हो बचना होगा वासना लिप्सा अतिशय कामना नहीं मन हो चल सकता काम अगर दो रोटी तो एक गाय कुत्ते को दे दो ! पेट भरा होने पर भैया उसे कभी अवकाश भी दोअसल कामयाबी जीवन की सहज सरल सादा जीवन होहोता सूर्य है उत्तरायणसुनहला है अब वातावरण निकली है अब धूप धुंध से क्षमा भाव अपनाते सज्जन सहने की सामर्थ्य बढ़ा लोअसल कामयाबी जीवन की सहज सरल सादा जीवन होकंक्रीट का जंगल छोड़ें नदी झील पर्वतों फिर जुड़ें सादा सा घर प्रकृति बनायें पगडंडी जिसकी पक्की हो दिन में धूप रात सोलर…See More
Jan 18
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आ.सु.श्री रचना भाटिया जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार कीजिए  !"
Jan 17
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-147
"असल कामयाबी :  विष्णुछंद  गूढ़ प्रश्न है जीवन की क्या, असल कामयाबी । योग भोग  दो मार्ग जिन्दगी, अन्यथा  शराबी ।। ज्ञान साधना के स्वामी शिव, सर्जक हैं अधिपति । विष्णु सुख - भोग के दाता हैं, राज लक्ष्मीनिवास ।। चलता यंत्र मंत्र…"
Jan 14
Chetan Prakash posted a blog post

एक गीत

अजब मौसम हुआ है आज वो  सूरज नहीं है है बर्फीली फज़ा जारी साज़ तो सूरज नहीं है ! मरें मुफ़लिस अभी ठंडी उन्हें घर क्या क़मी है लगे हैं लाव लश्कर दर अमीरों  क्या ग़मी हैअजब मौसम हुआ है आज वो सूरज नहीं है !दरीचों पर जमी है बर्फ ठिठुरन हड्डियों है है बिस्तर गर्म नेताओं के गरमी गड्डियों है बुलाकर अफसरों को घर अभी फाइल पढ़ी है है मौसम ये पकोड़ो का अभी दारू उड़ी है गरीबों को लगे अब ठंड चढ़ती फुरफुरी हैअजब मौसम हुआ है आज वो सूरज नही है !कहीं जलती अलावों ठंड की अरथी नहीं है अभी शायद हवा वो बेधती हड्डी…See More
Jan 7
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आना नूतन साल-( गीत -९)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"नमस्कार,  आदरणीय भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  खूबसूरत भावपूर्ण,  सारगर्भित गीत लिखा आपने, नव-वर्ष की मंगल  कामना करते  हुए ,  आमीन  ! बधाई आपको मनोरम गीत  सर्जन हेतु  !"
Dec 30, 2022
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150
"नमस्कार,  संजय शुक्ल साहब,  आपने उम्दा ग़ज़ल कही, इस नाते आप सहज ही दिली मुबारकबाद के अधिकारी हैं ! मुबारकबाद कुबूल फरमाएं  ! सादर..."
Dec 28, 2022
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150
"सु श्री जी, खूबसूरत ग़ज़ल  कही आपने, आदाब  ! हाँ, मतले में अलिफ वस्ल का आपका प्रयास  मुझे  अशुद्ध लगा  ! देखिएगा ! तीसरे शे'र के सानी में "होना" का 'आना' बेहतर  विकल्प  था। ऐसा यदि सही है,…"
Dec 28, 2022
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150
"सप्रेम वन्दे, 'मुसाफिर' साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने ! आप  मुझे कुछ  जल्दबाजी में हैं, ऐसा, क्षमा करें, मुझे प्रतीत हुआ ! असावधानी के कारण ही, " सजर" शजर के स्थान पर एकाधिक बार  लिखा गया । सातवाँ शे'र जहाँ…"
Dec 28, 2022
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150
"आदाब,  आदरणीय रवि शुक्ल साहब,  आपने ग़ज़ल तक पहुँचने की ज़हमत की, इसके लिए आपका  बहुत-बहुत शुक्रिया ! आपकी बात में दम है, और संशोधित  शे'र  प्रस्तुत है :  " फलक वो सोच का सीमित अभी संशय में लगता है  …"
Dec 28, 2022
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-150
"ग़जल हमारे देश का बच्चा कोई बच़्चा नहीं रहता चलाता रोज़ मोबाइल बड़ा अच्छा नहीं रहता खराबी ये चली आई बड़े बूढ़ो से अब तक है अजब माँ बाप थे सन्तान का रुतबा नहीं रहता खिलाड़ी वो सियासत का बदलता रोज़ चहरा है कि मेरे दोस्त का ईमाँ कभी ठहरा नहीं…"
Dec 28, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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गीत.... असल कामयाबी जीवन की

असल कामयाबी जीवन की

सहज सरल सादा जीवन हो



बचना होगा वासना लिप्सा

अतिशय कामना नहीं मन हो

चल सकता काम अगर दो रोटी

तो एक गाय कुत्ते को दे दो !

पेट भरा होने पर भैया

उसे कभी अवकाश भी दो

असल कामयाबी जीवन की

सहज सरल सादा जीवन हो

होता सूर्य है उत्तरायण

सुनहला है अब वातावरण

निकली है अब धूप धुंध से

क्षमा भाव अपनाते सज्जन

सहने की सामर्थ्य बढ़ा लो

असल कामयाबी जीवन की

सहज…

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Posted on January 17, 2023 at 10:00pm — 2 Comments

एक गीत

अजब मौसम हुआ है आज वो  सूरज नहीं है

है बर्फीली फज़ा जारी साज़ तो सूरज नहीं है !

मरें मुफ़लिस अभी ठंडी उन्हें घर क्या क़मी है

लगे हैं लाव लश्कर दर अमीरों  क्या ग़मी है

अजब मौसम हुआ है आज वो सूरज नहीं है !

दरीचों पर जमी है बर्फ ठिठुरन हड्डियों है

है बिस्तर गर्म नेताओं के गरमी गड्डियों है

बुलाकर अफसरों को घर अभी फाइल पढ़ी है

है मौसम ये पकोड़ो का अभी दारू उड़ी है

गरीबों को लगे अब ठंड चढ़ती फुरफुरी…

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Posted on January 6, 2023 at 9:00pm

दिल से अपने हमें गिला है ये

2122   1212    22

खुद ब खुद हो गया जुदा है ये

दिल हमारा तो मनचला है ये

गुम है दिल ये किसी पहेली में

और कई दिन से सिलसिला है ये

ज़िन्दगी का कोई सबूत नहीं

बस धड़कता सा हादसा है ये

बात करता नहीं कुछिक दिन से

" दिल से अपने हमें गिला है ये "

है समन्दर भी ये हरा अब तो

चांद पूनम तो ज़लज़ला है ये 

बदहवासी रही है हावी दिल

भागता बेहिसी मरा है ये

आखिरी दांव…

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Posted on October 5, 2022 at 5:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में

1212     1122     1212     22 / 122

 

बहुत  सी देर लगी आग दिल  लगाने  में 

उन्होंने खेल जो खेला उसे  उसे मिटाने में 

अभी तो आप नहीं भूल पाए प्यार सनम !

लगेगा वक़्त अभी आग वो  बुझाने  में 

वो रात कल भी तो गुज़री है भारी मुझ पर जाँ 

 अभी कोशिश मिरी बस ज़िन्दगी बनाने में

तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा हमें रुलाकर भी

कि शम'अ बुझ अभी जाती है आज़माने…

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Posted on September 19, 2022 at 3:30pm — 5 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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