For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AMAN SINHA
Share

AMAN SINHA's Friends

  • अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

AMAN SINHA's Page

Latest Activity

AMAN SINHA posted a blog post

ले चल अपने संग हमराही

ले चल अपने संग हमराही, उन भूली बिसरी राहों मेंजहां बिताते थे कुछ लम्हे हम एक दूजे की बाहों में चल चले उन गलियों में फिर थाम कर एक दूजे का हाथ क्या पता मिल जाए हमको फिर वो जुगनू की बारात जहां चाँद की मद्धिम बुँदे वादी से छन कर आती है और ताल की जल पर पड़ कर चांदी सी छितरा जाती है जहां डाल पर तोता मैना बातें मीठी करते हैं जहां चाँद को देख चकोरे, आंहें भरते रहते है वहीं झील में नांव चाले तो मांझी गान सुनाता है वहीं पेड़ पर बैठ पपीहा, अपनी व्यथा दोहराता है वहीं जहां पर नभ के तारे रोज़ हम से बतियाते…See More
Monday
AMAN SINHA posted a blog post

कब चाहा मैंने

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे नैना चार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मुझसा प्यार करो कब चाहा मैंने के तुम मेरे जैसा इज़हार करो कब चाहा मैंने के तुम अपने प्रेम का इकरार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलने को तड़पो कब चाहा मैंने के तुम बादल जैसे मुझपर बरसो कब चाहा मैंने के तुम अपना सबकुछ मुझपर लूटा बैठो कब चाहा मैंने के तुम अपना चैन सुकून गवा बैठो कब चाहा मैंने के तुम चाहो मुझको दीवानों सा कब चाहा मैंने के तुम याद करो मुझे बहानों सा कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलो बहाने से कब चाहा मैंने के तुम मुझे…See More
Jun 24
AMAN SINHA posted a blog post

यायावर

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहींकोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा है जब तक जिंदा हूँ चलना है, बस यायावर ही रहना है जब सबने हांथ बाढ़ाया था, तब मैंने हीं ठुकराया था अपने पथ का चुनाव किया, मैंने सूख का परित्याग किया हाव भाव से फक्कर हूँ, घुल जाऊँ तो शक्कर हूँ स्वाद मेरा पहचान गया, जो मेरे मन को जान गया मैं अपनी धुन में रहता हूँ, बस…See More
Jun 21
AMAN SINHA posted a blog post

आह्वान

जागो मेरे वीर सपूतो, मैंने है आह्वान किया आज किसी कपटी नज़रों ने मेरा है अपमान किया किसी पापी के नापाक कदम, मेरी छाती पर ना पड़ने पाए आज सभी तुम प्रण ये कर लो, जो आया, कुछ, ना लौट के जाने पाये दिखला दो तुम दुश्मन को, तुम भारत के वीर सिपाही हो तुमको ना कोई रोक सका, जितनी भी गहरी खाई हो हिमालय से भी ऊंची है तेरे आत्मबल की चोटी तोड़ दो उनके अरमानो को, जिनकी नियत सदा है खोटी घुस कर मेरी सीमा में, जिसने तुमको ललकारा है उसको उसकी औकात दिखा, मैंने भी हुंकारा है जब तक थक कर वो लौट ना जाए तबतक तुझको लड़ना…See More
Jun 18
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post क्यों परेशान होता है तू
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन।बढ़िया लिखा है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 15
AMAN SINHA posted a blog post

क्यों परेशान होता है तू

क्यों परेशान होता है तू , जिसे जाना है वो जाएगा हाथ जोड़ कर पैर पकड कर, तू उसको रोक ना पाएगा वो जाता है तो जाने दे, पर याद न उसकी जाने दे तू उसको ये अवसर ना दे, वो बाद मे तुझे बहाने दे  जिसको आँसू की क़दर नहीं, ना होने का तेरे असर नहीं उसे रोक के क्या तू पाएगा, तेरी खातिर जो बेसबर नहीं तू रोके तो रुक जाएगा, घड़ियाली आँसू बहाएगा अपनी हर नाकामी का फिर, जिम्मेदार तुझे बताएगा  तू उसके बीन ना जी पाएगा, वो गया तो तू मर जाएगा उसे भी ये एहसास तो होने दे, तुझे खोकर वो क्या पाएगा चलते-चलते जब थक जाएगा, खुद…See More
Jun 14
AMAN SINHA posted blog posts
Jun 11
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post मानसिक रोग
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहब,  कई दिनों के बाद आपसे मिले तारिफ से फिर से लिखने का मन कर रहा है।  धन्यवाद्। "
Jun 6
AMAN SINHA posted blog posts
Jun 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post मानसिक रोग
"आ. भाई अमन जी, रचना का प्रयास अच्छा है। विषय भी अच्छा है। कुछ टंकण त्रुटियाँ रह गयी हैं देखिएगा। शेष हार्दिक बधाई।"
Jun 2
Dayaram Methani commented on AMAN SINHA's blog post क्या रंग है आँसू का
"आदरणीय अमन सिन्हा जी, आंसुओं पर सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई।"
Jun 2
सूबे सिंह सुजान commented on AMAN SINHA's blog post क्या रंग है आँसू का
"बहुत सुंदर कविता"
May 27
AMAN SINHA commented on नाथ सोनांचली's blog post अर्धांगिनी को समर्पित (दुर्मिल सवैया पर आधारित)
"आदरणीय  नाथ सोनांचली जी,  बहुत मनमोहक रचना हेतु बधाई।"
May 26
AMAN SINHA posted a blog post

क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?कभी किसी के खो जाने से, कोई कभी मिल जाए तो कभी कोई जो दूर हो गया, कोई पास कभी आ जाए तो किस भाव में कितना बहता, कोई ध्यान नहीं रखताहर हाल में इसका एक ही रंग है, फर्क ना कोई कर सकता कभी दर्द में बह जाता है, हंसी में भी ये दूर नहीं हम इस पर काबू कर पाये, ये इतना भी कमजोर नहीं हरेक काल में एक जैसा है, चाहे धूप या छाया हो भूखे पेट कोई हो या फिर, कई दिनों पर खाया हो पैसे कोई लूट ले जाए, या ज्यादा पैसा घर आ जाए दुनिया कोई…See More
May 25
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आद0 अम्न सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
May 25
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post मैं धरती बोल रही हूँ
"आदरणीय  Rachna Bhatia जी,  हौसला बढाने के लिये धन्यवाद। "
May 25

Profile Information

Gender
Male
City State
KOLKATA
Native Place
KOLKATA
Profession
WRITER
About me
NEW WRITER

AMAN SINHA's Blog

ले चल अपने संग हमराही

ले चल अपने संग हमराही, उन भूली बिसरी राहों में

जहां बिताते थे कुछ लम्हे हम एक दूजे की बाहों में 

चल चले उन गलियों में फिर थाम कर एक दूजे का हाथ 

क्या पता मिल जाए हमको फिर वो जुगनू की बारात 

जहां चाँद की मद्धिम बुँदे वादी से छन कर आती…

Continue

Posted on June 27, 2022 at 12:25pm

कब चाहा मैंने

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे नैना चार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मुझसा प्यार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मेरे जैसा इज़हार करो 

कब चाहा मैंने के तुम अपने प्रेम का इकरार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलने को तड़पो 

कब…

Continue

Posted on June 24, 2022 at 10:59am

यायावर

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा 

ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा 

ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहीं

कोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं 

ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा…

Continue

Posted on June 21, 2022 at 11:20am

आह्वान

जागो मेरे वीर सपूतो, मैंने है आह्वान किया 

आज किसी कपटी नज़रों ने मेरा है अपमान किया 

किसी पापी के नापाक कदम, मेरी छाती पर ना पड़ने पाए 

आज सभी तुम प्रण ये कर लो, जो आया, कुछ, ना लौट के जाने पाये 

दिखला दो तुम दुश्मन को, तुम भारत के वीर सिपाही…

Continue

Posted on June 17, 2022 at 11:15am

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। 'एक…"
3 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब, भाई, लक्ष्मण लिंह धामी मुसाफिर साहब, बह्र रमल मुसद्दस सालिम (2122 2122 2122 ) में कहीं अचछी…"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२*जो नदी की  आस  लेकर जी रहे हैंएक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं।१।*है बहुत धोखा सभी की…See More
7 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

गज़ल

गज़ल 221 2121 1221 212अख़लाक पर मुहब्बत  भरोसा रहा नहीं हमदम रहा कोई कहाँ जानाँ हुआ नहींदिल जानता…See More
7 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"लघुकथा गोष्ठी का आज अंतिम दिन उम्मीदों से पूर्ण है।"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय चेतनप्रकाशजी, आपका रचना पर स्वागत है.  आपके बिंदु विचारणीय हैं.  आप भी तनिक और…"
20 hours ago
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post मदिरा सवैया आधारित दो छन्द
"आद0 सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम रचना पर आपकी उपस्थिति किसी पुरस्कार से कम नहीं। हृदयतल से आभार…"
21 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
". पुनश्च ः आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर न बोल पा…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"//भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के एकवचन…"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service