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AMAN SINHA
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Latest Activity

आशीष यादव commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"आदरणीय श्री अमन सिन्हा जी नमस्कार। भावों को कविता में ढालने का बेहतर प्रयास किया है आपने। बधाई स्वीकार करें।"
14 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

दिखने दो

दर्द है तो दिखने दो, आँख से आँसू बहने दोकिसने रोका है तुमको, जो रोना है तो रो लेने दोकब तक तुम रोके रखोगे, उन भूली बिसरी यादों कोदिल के कोने मे दबी है जो, न रोको उस चिंगारी कोरोकोगे दिल भर जाएगा, घुट-घुट के दम घुट जाएगागुब्बारे सा है दिल अपना, भर गया जो फिर फट जाएगाअरमानों की कोई गठरी हो, या तेज़ घोर दोपहरी होचिंता मे तुम जो ना घिरे, तुम अपने जाल के मकड़ी होबस कर खुदको दोष न दे, जो गुम है खुदको होश न देक्या पा लेगा अश्क़ों को रख के, बहते है तो बह लेने दोहर उलझन का हल मिल जाएगा, बरबोला का मुंह सील…See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"आ. भाई अमन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Saturday
AMAN SINHA posted a blog post

ये मेरे बस की बात नहीं

तू खुद ही जुदा हो जा मुझसे अब यही बेहतर हैइश्क़ किया था तुझसे नफरत मुमकिन नहीं होगीतेरे यादों  का आशियाँ बनाए बैठे  है हम कब सेप्यार की दुनिया को जलाने की हिम्मत नहीं होगी कैसे करूँ नफरत तुझसे, बता ऐ ज़िंदगीतुझे भूलने की हमसे कोशिश भी नहीं होगीअब तू ही मेरी मोहब्बत को कर दे बदनामतुझे बदनाम करने की जुर्रत हमसे नहीं होगी तुझे छोड़ कर चला जाऊँ मैं ये हौंसला पाऊँ कहा सेकदम उठ भी गए तो चलने की ताकत नहीं होगीजो  तु है तो  मेरे संग मेरी परछाई भी हैअपनी परछाई को मिटाने की मेरी हिम्मत नहीं होगी खुद को रोक…See More
Friday
AMAN SINHA posted blog posts
Sep 15
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"@समर कबीर साहब,  आपके निरंतर टिप्पणी से मुझे ये उम्मिद जगती है कि मेरी रचनाएं कम से कम पढने योग्य तो है।  इसी तरह मेरी हिम्मत बढाते रहे। "
Sep 15
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post परदेसी
"@समर कबीर साहब,  हौसला बढाने के लिये असंख्य धन्यवाद। "
Sep 15
AMAN SINHA commented on योगराज प्रभाकर's blog post कविता: ज़माने में बनी है हिंद की पहचान हिंदी से
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी,  लाज़वाब, रसदार, मज़ेदार प्रस्तुति। "
Sep 15
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 14
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post परदेसी
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति पर  बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 14
AMAN SINHA posted blog posts
Sep 14
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जो कही नहीं तुमसे
"@आशीष यादव जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद "
Sep 9
आशीष यादव commented on AMAN SINHA's blog post जो कही नहीं तुमसे
"बहुत अच्छी प्रस्तुति।"
Sep 8
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जो कही नहीं तुमसे
"@समर कबीर साहब,  आपका बहुत बहुत धन्यवाद। "
Sep 8
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post जो कही नहीं तुमसे
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post आखिर क्यों?
"@योगराज प्रभाकर, श्रीमान, मेरी गलतियोंं से मुझे अवगत करवाने के लिये अपका आभार।  मैं आगे से ज्यादा ध्यान लगाकर लिखने की कोशिश करुंगा।  "
Sep 7

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दिखने दो

दर्द है तो दिखने दो, आँख से आँसू बहने दो

किसने रोका है तुमको, जो रोना है तो रो लेने दो

कब तक तुम रोके रखोगे, उन भूली बिसरी यादों को

दिल के कोने मे दबी है जो, न रोको उस चिंगारी को

रोकोगे दिल भर जाएगा, घुट-घुट के दम घुट जाएगा

गुब्बारे सा है दिल अपना, भर गया जो फिर फट जाएगा

अरमानों की कोई गठरी हो, या तेज़ घोर दोपहरी हो

चिंता मे तुम जो ना घिरे, तुम अपने जाल के मकड़ी हो

बस कर खुदको दोष न दे, जो गुम है खुदको होश…

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Posted on September 21, 2021 at 10:20am

ये मेरे बस की बात नहीं

तू खुद ही जुदा हो जा मुझसे अब यही बेहतर है

इश्क़ किया था तुझसे नफरत मुमकिन नहीं होगी

तेरे यादों  का आशियाँ बनाए बैठे  है हम कब से

प्यार की दुनिया को जलाने की हिम्मत नहीं होगी

 

कैसे करूँ नफरत तुझसे, बता ऐ ज़िंदगी

तुझे भूलने की हमसे कोशिश भी नहीं होगी

अब तू ही मेरी…

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Posted on September 16, 2021 at 10:30am

झूठी सख्शियत

राह में मैं एक दफा, खुद से हीं टकरा गया

अक्स देखा खुद का तो, होश मुझको आ गया

दूसरो को दूँ नसीहत, काबिलियत मुझमे नहीं

आँख औरों को दिखाऊं, हैसियत इतनी नहीं

 

आईने में खुद का चेहरा, रोज ही तकता हूँ मैं

मैं भला हूँ झूठ ये भी, खुदसे ही कहता हूँ मैं

अपने फैलाये भरम में, हर घडी रहता हूँ मैं

सोच की मीनारों पर, बस पूल बांधता हूँ मैं

 

बातों में मेरी सच की, दूर तक झलक नहीं

इस जमी मिलता जैसे, दूर तक फलक नहीं

क्या गलत है…

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Posted on September 15, 2021 at 12:00pm

हाल-ए-दिल

गा रहा हूँ मैं आज, अपने ग़म सभी भुलाने को

हौसला शराब का है, हाल-ए-दिल सुनाने को

राज दिल में लाखो अपने, आज सबको खोलना है

लोग रुस्वा हो भले ही, एक- एक कर बोलना है

मर गए तो क्या मरेंगे, जी कर भी करना है क्या?

कुछ ना उससे राबता है, अब भला डरना है क्या?

आज अपनी बेहयायी, सबको…

Continue

Posted on September 14, 2021 at 10:12am

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