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AMAN SINHA
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  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

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AMAN SINHA posted a blog post

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम लगता है के अब मैं तुमको बिल्कुल याद नही ऐसा होता है निकाह के बाद अक्सर ऐसा होने मे कोइ गलत बात नही अब मेरे खयालों से आज़ाद हो तुम किसी और के साथ आबाद हो तुम पर तुम पर ही खत्म होता है इश्क़ मेरा मेरे पहले मोहब्बत की याद हो तुम मैं अचरज़ मे हूँ तुमने ये क्या कर दिया अपने बच्चे  का नाम मुझपर रख दिया क्या कहकर शौहर  कैसे मनाया होगा ना जाने कौन सा किस्सा सुनाया होगा अब ये सोचता हूँ मैं रोज़ क्यों हिचकता हूँ पानी भी जो पीता हूँ तो क्यों सरकता हूँ क्या खुब लिया है बदला मेरी…See More
Nov 11, 2021
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post दर्द से यारी
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन और भावभियक्ति पर आपको बहुत बहुत बधाई"
Oct 13, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर हैचूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है.बहुत ही सुन्दर , प्रेरक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
Oct 6, 2021

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आदरणीय अमन जी, आपके प्रयास के लिए बधाइयाँ.  मात्राएँ और विन्यास पर समझ बढ़ाएँगे तो कहन में सान्द्रता बढ़ेगी.  शुभ-शुभ  "
Oct 5, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आ. अमन जी, अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 4, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post क्षितिज
"@मुसाफिर साहब @समर कबीर साहब  आप दोनों का तहे दिल से शुक्रिया "
Oct 4, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post क्षितिज
"आ. भाई अमन जी, अभिवादन । अच्छी प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें। "
Oct 4, 2021
AMAN SINHA posted a blog post

दर्द से यारी

हर संगदिल को दिल का पता बता दियाजितने बेवफा मिले सबको घर दिखला दियासभी ने छोड़ दिया जिस ग़म को खुशी के खातिरहमे जहाँ भी दिखा,उसे हंसके गले लगा लियासाथ हो दर्द तभी जीने का मज़ा आता हैग़म जुदाई का हो तो पीने का मज़ा आता हैछुपा के रख सके जो दर्द को जहन मे अपनेज़ख्मों को सीने का मज़ा बस उसी को आता हैखुशी है बुलबुला एक दिन फूट जाएगाहंसाया इसने जितना, उतना ही रुलाएगाहमसफर है सच्चा ग़म ही अपना यारोंजो आया तो अपने साथ लेकर जाएगाजो फिरते हैं ढूंदते दिल का सुकून दूकानों मेउन्हे नहीं मालूम ये मिलते है सिर्फ…See More
Oct 3, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post कुछ बदला सा
"आ. भाई अमन जी, अभिवादन। अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 3, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post दिखने दो
"@विजय निकोरे साहब,  धन्यवाद "
Oct 2, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post कुछ बदला सा
"@विजय निकोरे साहब,  धन्यवाद "
Oct 2, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"@अमीरुद्दीन साहब,  शुक्रिया, अभार "
Oct 2, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़यालात और जज़्बात से पुर अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"@समर कबीर साहब,  हौंसला बढाने के लिये धन्यवाद "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"जनाब अमिरुद्दिन साहब,  आप लोगोंं को पढ कर समझ मे आता है की अभी कितना कुछ सिखना मेरे लिये बाकी है और जरूरी भी है। रचना बहुत अच्छी और दिल को छुने वाली लगी।  "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on Sushil Sarna's blog post तो रो दिया .......
"आदरणिय सुशिल जी, अति सुंदर रचना के लिए बधाई "
Oct 1, 2021

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यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम 

लगता है के अब मैं तुमको बिल्कुल याद नही 

ऐसा होता है निकाह के बाद अक्सर 

ऐसा होने मे कोइ गलत बात नही 

अब मेरे खयालों से आज़ाद हो तुम 

किसी और के साथ आबाद हो…

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Posted on November 11, 2021 at 11:00am

दर्द से यारी

हर संगदिल को दिल का पता बता दिया

जितने बेवफा मिले सबको घर दिखला दिया

सभी ने छोड़ दिया जिस ग़म को खुशी के खातिर

हमे जहाँ भी दिखा,उसे हंसके गले लगा लिया

साथ हो दर्द तभी जीने का मज़ा आता है

ग़म जुदाई का हो तो पीने का मज़ा आता है

छुपा के रख सके जो दर्द को जहन मे अपने

ज़ख्मों को सीने का मज़ा बस उसी को आता है

खुशी है बुलबुला एक दिन फूट जाएगा

हंसाया इसने जितना, उतना ही रुलाएगा

हमसफर है सच्चा ग़म ही अपना यारों

जो…

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Posted on October 1, 2021 at 11:30am — 1 Comment

जुनून

रगो मे खून बनकर तेरे, यूँ “जुनून” बहता है

बिना मंज़िल के ना रुकना, ये सुकून कहता है

हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर है

चूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है

 

है मुश्किल सफर तेरा ये, गलियां तुझसे कहती है

चुनी ये राह जिसने भी, गुमान दुनिया करती है

तू देख कर चट्टानों को कभी हिम्मत नहीं खोना

पल भर की नाकामी पर तू भूल कर भी नहीं रोना

 

पहाड़ो मे सुराख कर दे, ये हिम्मत बस तुझी मे…

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Posted on September 30, 2021 at 10:00am — 7 Comments

क्षितिज

वो जहां पर असमा और धरा मिल जाते है

छोर मिलते ही नहीं पर साथ में खो जाते है

है यही वो स्थान जिसका अंत ही नहीं

मिल गया या खो गया है सोचते है सब यही



सबको है चाह इसकी पर राह का पता नहीं

बिम्ब या प्रतिबिम्ब है ये भ्रम सभी को है यही

कामना को पूर्ण करने श्रम छलांगे भरता है

मरीचिका के जाल में जैसे मृग कोई भटकता है



है धरा का अंत वही जिस बिंदु से शुरुआत है

यात्रा अनंत इसकी कई युगों की बात है

ओर ना है छोर इसका शुन्य सा आकाश है

जिसका जग को…

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Posted on September 27, 2021 at 10:36am — 3 Comments

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