For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

April 2020 Blog Posts (88)

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

1

गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करे

बिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे

2

चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगी

हो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे

3

शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिला

डूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे

4

इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफर

है अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करे



बाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसे

रुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर… Continue

Added by Rachna Bhatia on April 2, 2020 at 1:31pm — 4 Comments

"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

Continue

Added by Samar kabeer on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )

अंतस के हिम निर्झर से जब

भाव पिघलने लगते है|

गीतों में ढलने को मेरे

शब्द मचलने लगते हैं ॥

***

लेखन आता नहीं मुझे पर लिखता हृद उद्गारों को |

और बुझा लेता हूँ लिखकर हिय तल के अंगारों को |

कहाँ निभा पाता हूँ अक्सर मैं छंदो का अनुशासन

अलंकार-से भूल गया हूँ शब्दों के श्रृंगारों को |

भाषा शुद्ध न हुई भले ही

लय सुर ताल रहे बाक़ी

बिम्ब-प्रतीक सृजन से जब…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 1, 2020 at 8:00pm — 4 Comments

कोरोना पर कुछ दोहे :

कोरोना पर कुछ  दोहे :
वृत कोरोना का नहीं, इतना भी आसान।
रहना निज आवास में, है मात्र समाधान।।
कोरोना के काल से, हुआ विश्व…
Continue

Added by Sushil Sarna on April 1, 2020 at 5:30pm — 4 Comments

गजल(शोर हवाओं....)

22 22 22 22

शोर हवाओं ने बरपाए,

घाव हरे होने को आए।1

बंटवारे का दर्द सुना,अब

देख कलेजा मुंह को धाए।2

रोजी खातिर परदेश गए

घर भागे सब,धक्के खाए।3

आफत ऐसी आई उड़कर

सबने अपने रंग दिखाए।4

बबुआ भैया जो कहते थे,

सबने फिर से हाथ उठाए।5

बांट रहे कुछ मुंह की रबड़ी

खाने को भूखे ललचाए।6

तीर कमान चढ़ाए चलते

दोमुख सबको कौन बताए?7

मांग बना जो राजा,बैठा

दाता लाठी -…

Continue

Added by Manan Kumar singh on April 1, 2020 at 1:20pm — 4 Comments

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)

(1212 1122 1212  22 /112 )

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है

हयात जैसे बशर लग रही सिनाँ पर है

**

हमारा मुल्क परेशान और ख़ौफ़ में है

सुकून-ओ-चैन की अब जुस्तजू यहाँ पर है

**

वजूद अपना बचाने में अब लगा है बशर

न जाने आज ख़ुदा छुप गया कहाँ पर है

**

बचेगा क़ह्र से कोविड के आज कैसे भला 

बशर पे ज़ुल्म-ओ-सितम उसका आसमाँ पर है

**

वहाँ की प्यास भला दूर क्या करे…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 1, 2020 at 1:00pm — 7 Comments

एक ग़ज़ल

सुन  रहे  हैं  कि  वो  इक ऐसी दवाई देगा

जिससे  अंधे  को भी रातों में दिखाई देगा



प्यार  से  उसने  बुलाया है मुझे मक़्तल में

जानता हूँ   मैं जो  दावत   में  क़साई देगा



ऐसे चिल्लाओ कि आवाज़ वहाँ तक जाए

एक  दिन  तो  सभी  बहरों को सुनाई देगा



पास  रहता  हूँ  तो मुंह फेर के चल देता है

दूर  जाऊँगा  तो   आने   की   दुहाई  देगा



क़ैदख़ाने   में  उसी  ने  ही रखा सालों तक

जिसने   उम्मीद  जताई   थी   रिहाई  देगा



घुप   अंधेरे  से …

Continue

Added by सालिक गणवीर on April 1, 2020 at 12:00pm — 5 Comments

धूप छाँह होने वाले

तमाम उम्र लगे रहे शहर शहर हो जाने में 
क्यों गांव गांव आज फिर होने लगी है ज़िंदगी …
Continue

Added by amita tiwari on April 1, 2020 at 1:30am — 1 Comment

Monthly Archives

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए सहृदय शुक्रिया आ धामी सर बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है माँ पर"
8 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"माँ पर लिखी गई एक बेहतरीन ग़ज़ल | बधाई स्वीकारें लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  जी | "
9 hours ago
Ram Ashery posted a blog post

हम होगें कामयाब

लेन देन जगत में, कुदरत रखे सब हिसाब । मिलता न कुछ मुफ्त में, हम हो कामयाब ॥ अपने आतीत से सीख लें,…See More
13 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"गीत......  फिर भी हम जीतेंगे बाजी.. !  कोरोना की मार पड़ी है मौत ताण्डव मचा रही है हर…"
14 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"सादर अभिवादन आदरणीय सौरभ पाण्डे जी "
14 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"हम होंगे कामयाब_____________ तू' और 'मैं' से उठकर जिस दिन हम 'हम'…"
14 hours ago
Aazi Tamaam commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"जनाब विनय जी अच्छी रचना है"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"स्वागतम् !! "
23 hours ago
Sachidanand Singh replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion हिंदी लेखन की शुद्धता के नियम                                         -   डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group हिंदी की कक्षा
"सारगर्भित लेख है।नवीन पाठको के लिए रोचक व ज्ञानवर्धक है।पाठक संदर्भ-श्रोत किस प्रकार ज्ञात कर सकते…"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

मकरन्द छंद "कन्हैया वंदना"

(मकरन्द छंद)किशन कन्हैया, ब्रज रखवैया,     भव-भय दुख हर, घट घट वासी।ब्रज वनचारी, गउ हितकारी,    …See More
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 121

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ इक्कीसवाँ आयोजन है.…See More
Thursday
Sachidanand Singh joined Admin's group
Thumbnail

हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
Thursday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service