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Aazi Tamaam
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  • India
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Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: सुरूर है या शबाब है ये

12112 12112सुरूर है या शबाब है येके जो भी है ला जवाब है येफ़क़ीर की है या पीर की हैके चश्म जो आब-ओ-ताब है येकज़ा है अगर सरक गया तोजो चेहरे पे नकाब है येअजीब है सफ़ह-ए-ज़िंदगी भीन पूछो की क्या जनाब है येकभी है ख़ुशी तो है कभी ग़मबस एक ऐसी किताब है येहैं अश्क से आज चश्म जो नममहब्बतों का हिसाब है येन जाने कोई है माज़रा क्याकी ज़िंदगी है या ख़्वाब है येवो आये और आ के चल दिये हैंहै रुख़्सती या अज़ाब है येकटार हैं आँखें नर्म हैं लबके हुस्न है या गुलाब है येन होश में हैं न होश है गुमन जाने कैसी शराब…See More
3 hours ago
Aazi Tamaam commented on Samar kabeer's blog post ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"वाह वाह आ गुरू जी बेहद सुन्दर रचना ओ बी ओ के लिए नायाब तुह्फ़ा बधाई स्वीकार करें आदरणीय"
Apr 12
Aazi Tamaam posted a photo
Mar 16
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई
"सहृदय शुक्रिया आ हौसला अफ़ज़ाई का सादर"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई
"आ. भाई आजी तमाम जी , तरही मिसरे की जमीन पर गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
Mar 3
Aazi Tamaam posted blog posts
Feb 27
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आ गुरु जी मुआफ़ी चाहता ग़ज़ल सुधार न पाने के लिये लेकिन मैंने जो भी आज आपकी नज़र ए क़रम व इस्लाह से सीखा है उस से दूसरी तरहि ग़ज़ल लिखी है जिसे मैं obo पर upload कर दूँगा आज सादर"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"वाह आ बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही लेकिन मतले का उला स्पष्ट नहीं हुआ तीसरा शे र भी स्पष्ट नहीं हो पाया बाकी गुणीजन की इस्लाह सर आँखों पर"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"जी आ ग़ज़ल का उम्दा प्रयास रहा"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"वाह आ बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें आ गुरु जी की इस्लाहा l से और निखर जायेगी"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"जी आ सालिक जी ग़ज़ल का उम्दा प्रयास रहा आ गुरु जी की इस्लाह काबिल ए गौर है"
Feb 26

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Male
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Uttar Pradesh
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CHANDAUSI
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Poet, Lawer, Engineer
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ग़ज़ल: सुरूर है या शबाब है ये

12112 12112

सुरूर है या शबाब है ये

के जो भी है ला जवाब है ये

फ़क़ीर की है या पीर की है

के चश्म जो आब-ओ-ताब है ये

कज़ा है अगर सरक गया तो

जो चेहरे पे नकाब है ये

अजीब है सफ़ह-ए-ज़िंदगी भी

न पूछो की क्या जनाब है ये

कभी है ख़ुशी तो है कभी ग़म

बस एक ऐसी किताब है ये

हैं अश्क से आज चश्म जो नम

महब्बतों का हिसाब है ये

न जाने कोई है माज़रा क्या

की…

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Posted on May 22, 2022 at 8:00am

ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

२२१ २१२१ १२२१ २१२

पाकर जिसे हयात हवालात हो गई

इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

कैसे बताएँ आपके बिन कुछ नहीं हैं हम

कैसे बताएँ आपको क्या बात हो गई

अंजान थी जो आँख मिरी जान अश्क़ से

बाद आपके यूँ रोई की बरसात हो गई

इक पल में खुशनुमा हुई इक पल में रहनुमा

फ़िर एक पल में दर्द की सौग़ात हो गई

कैसी है दास्ताँ ये मिरी जान ज़िंदगी

रौशन हुई कहीं तो कहीं रात हो गई

मौलिक व…

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Posted on February 26, 2022 at 11:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: हर इक दिन इन फ़ज़ाओं में नई अल्बम लगाता है

1222 1222 1222 1222

हर इक दिन इन फ़ज़ाओं में नई अल्बम लगाता है

कोई तो है हरी सी घास पर शबनम लगाता है

कहीं सुनता नहीं महफ़िल में भी अब दर्द ए दिल कोई

किसे आवाज वीराने में तू हमदम लगाता है

अज़ब है वाक़िया या रब अज़ब साकी मिला दिल को

नमक ज़ख़्मों पे दिल के किस क़दर पैहम लगाता है

धुआँ होकर निकलती हैं ये साँसें दिल के अंदर से

किसी की याद में दिल दम व दम फिर दम लगाता…

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Posted on January 15, 2022 at 3:00pm

ग़ज़ल: आख़िरश वो जिसकी खातिर सर गया

2122 2122 212

आख़िरश वो जिसकी ख़ातिर सर गया

इश्क़ था सो बे वफ़ाई कर गया

आरज़ू-ए-इश्क़ दिल में रह गई

जुस्तजू-ए-इश्क़ से दिल भर गया

दिल की दुनिया दर्द का बाजार है

दर-ब-दर…

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Posted on January 13, 2022 at 12:30pm — 6 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। छंदों पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन धामी जी। छंद पर प्रोत्साहित करने हेतु बहुत बहुत आभार आपका।"
4 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर नमन आपको आदरणीय । बहुत बहुत आभार आपका ।"
4 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय धामी sir। सादर अभिवादन स्वीकार करें। चित्र अनुरूप छंद पर बहुत अच्छी रचना है, आदरणीय।आपको…"
4 hours ago

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