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Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ख़त किसी के नाम का लिखते रहे हैं हम
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आ ग़ज़ल तक आने व मार्गदर्शन करने के लिए अच्छी इस्लाह दी है आपने ग़ज़ल मुकम्मल करने के लिए गौर करूँगा 🙏"
Jan 28
Nilesh Shevgaonkar commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ख़त किसी के नाम का लिखते रहे हैं हम
"आ. आज़ी तमाम भाई ,ग़ज़ल के भाव बहुत उत्तम हैं... थोडा बहुत कारीगरी का मसअला है ..देखें .बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हम अपनी ही सुर्ख़ आँख में चुभते रहे हैं हम. ये और बात है कि  मुकम्मल न हो सका इक ख़त किसी के नाम जो लिखते रहे हैं…"
Jan 28
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"तू ने हमारे वास्ते कार ए वफ़ा नहीं किया हम ने भी तेरे इश्क़ में ख़ुद को फ़ना नहीं किया वो जो ग़रीब मर गया उसके मरज़ के वास्ते चारगरी गिराँ थी सो कोई ख़ुदा नहीं किया तू भी मरीज़ ए इश्क़ था मैं भी मरीज़ ए इश्क़ हूँ अपने मरज़ के वास्ते तू ने भी क्या…"
Jan 27
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हम

221 2121 1221 212बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हमअपनी ही सुर्ख़ आँख में चुभते रहे हैं हमये और बात है की मुकम्मल न हो सकाइक ख़त किसी के नाम जो लिखते रहे हैं हमसबसे जरूरी काम में पीछे रहे मगरबाक़ी हर एक बात में आगे रहे हैं हमवैसे तो हमसे जीतना मुमकिन न था मगरअपनी रज़ा से आप से पीछे रहे हैं हमइक रोज़ तन्हा छोड़ गए आप तो हमेंदर्द उम्र भर ये हिज़्र का सहते रहे हैं हमये सच है हमने तेग़ उठाई नहीं कभी'आज़ी' लहू में फिर भी नहाये रहे हैं हममौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 27
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी शुक्रिया आ ग़ज़ल तक आने व अच्छे सुझाव रखने के लिए आ कोशिश रहेगी शब्दों के दोहराव से बचा जा सके सादर🙏"
Jan 27
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास रहा बधाई स्वीकारें गुणीजनों की इस्लाह काबिल ए गौर है"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें बेहद उम्दा सुधार के साथ"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें आ निलेश जी की इस्लाह काबिल ए गौर है"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ ग़ज़ल अच्छी हुई बधाई स्वीकार करें बाकि गुणीजनों की रॉय काबिल ए गौर है दवा शब्द तो स्त्रीलिंग है क्या क़ाफ़िया में रख सकते हैं इसे? "
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी शुक्रिया आ ग़ज़ल पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिये सहृदय धन्यवाद 🙏"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
" सहृदय शुक्रिया आ निलेश जी ग़ज़ल तक आने व अच्छी इस्लाह करने के लिए 'दवा' की जगह कोई शब्द ही नहीं मिल रहा समझ नहीं आ रहा शे र कैसे मुकम्मल हो ये जब्र , दर्द, ग़म  से मुक्त होने की चाह ने किसको ख़फ़ा नहीं किया  -(निराश नहीं…"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी सहृदय शुक्रिया आ ग़ज़ल तक आने व हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए सादर🙏 जी दूसरे शे'र दवा से काम नहीं चला तो शिफ़ा कर दिया जायेगा गुणीजनों की इस्लाह का इंतज़ार है"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"जी आ मैंने ग़ज़ल पोस्ट करते वक़्त ध्यान नहीं दिया गिरह के मिसरे का अभी पोस्ट कर दिया है कृपया गौर फरमाएँ सादर 🙏"
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"गिरह- तू ने भी एक इक नफ़स ले के उधार खर्च की "मैनें भी एक शख्स का कर्ज अदा नहीं किया""
Jan 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"2112 1212 2112 1212 तू ने भी मेरे वास्ते कार ए वफ़ा नहीं किया 1 मैं ने भी तेरे वास्ते ख़ुद को फ़ना नहीं किया वो जो ग़रीब मर गया उसके मरज़ के वास्ते 2 चारागरी थी क़ीमती कोई दवा नहीं किया तू भी मरीज़ ए इश्क़ था मैं भी मरीज़ ए इश्क़ हूँ3 अपने मरज़…"
Jan 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

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Aazi Tamaam's Blog

ग़ज़ल - ये जो खंडरों सा मकान है

11212    11212

इसी में तो मेरा जहान है

ये जो खंडरों सा मकान है

यूँ ही बोलने से बचा करें

यूँ कि तुंद-ख़ू ये ज़बान है

नया खून है वो है जोश में

अभी ज़िंदगी में उफान है

न है आसमाँ न है तू ज़मीं

तुझे ख़ुद पे कितना गुमान है

तेरी जाति क्या है बिसात क्या

तेरा ज़िस्म ख़ाक समान है

न क़ुसूर कोई 'तमाम' अब

न बची उमंग न जान है

मौलिक व अप्रकाशित

(आज़ी…

Continue

Posted on January 18, 2024 at 4:30am — 4 Comments

फ़स्ल-ए-गुल है समाँ है मस्ताना

2122 1212 22

फ़स्ल-ए-गुल है समाँ है मस्ताना

आज फिर दिल हुआ है दीवाना

यूँ तो हर आँख में नशा लेकिन

उनकी आँखों में पूरा मयखाना

जबसे आये हैं उनको महफ़िल में

भूल बैठे…

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Posted on December 11, 2022 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: सुरूर है या शबाब है ये

12112 12112

सुरूर है या शबाब है ये

के जो भी है ला जवाब है ये

फ़क़ीर की है या पीर की है

के चश्म जो आब-ओ-ताब है ये

कज़ा है अगर सरक गया तो

जो चेहरे पे नकाब है ये

अजीब है सफ़ह-ए-ज़िंदगी भी

न पूछो की क्या जनाब है ये

कभी है ख़ुशी तो है कभी ग़म

बस एक ऐसी किताब है ये

हैं अश्क से आज चश्म जो नम

महब्बतों का हिसाब है ये

न जाने कोई है माज़रा क्या

की…

Continue

Posted on May 22, 2022 at 8:00am — 10 Comments

ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

२२१ २१२१ १२२१ २१२

पाकर जिसे हयात हवालात हो गई

इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

कैसे बताएँ आपके बिन कुछ नहीं हैं हम

कैसे बताएँ आपको क्या बात हो गई

अंजान थी जो आँख मिरी जान अश्क़ से

बाद आपके यूँ रोई की बरसात हो गई

इक पल में खुशनुमा हुई इक पल में रहनुमा

फ़िर एक पल में दर्द की सौग़ात हो गई

कैसी है दास्ताँ ये मिरी जान ज़िंदगी

रौशन हुई कहीं तो कहीं रात हो गई

मौलिक व…

Continue

Posted on February 26, 2022 at 11:30pm — 2 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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