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Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
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सुचिसंदीप अग्रवालl and Aazi Tamaam are now friends
Monday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दुखद समाचार है सभी आदरणीय गुरुजन एवं मित्रगण अपना ध्यान रक्खे बेहद कठिन समय है गुजर जायेगा आदरणीय नारायण जी को प्रकृति आत्मीय शांति प्रदान करे"
May 2
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालोहमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगेतुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगेमिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगेजरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे कोये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगेयहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहराअगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगेहमें आदत है पीने की सो हम तो ज़ह्र भी पी लेंमगर तुम ज़िंदगी के घूँट कड़वे पी न पाओगेहवाएँ गर्म भी होंगी हवाएँ सर्द भी होंगींकभी होंगी खिलाफ़त…See More
Apr 30
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आ धामी सर आपकी ग़ज़लों में एक अलग ही बात होती है सुंदर ग़ज़ल है कहीं कहीं टंकण त्रुटियां हैं एक बार देख लीजियेगा सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post "करो उजागर प्रतिभा अपनी"
"सादर प्रणाम आ सुचसंदीप जी बेहद उत्तम रचना है बधाई स्वीकारें सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam posted a blog post

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसेइक झील दिन में लगती है किंदील के जैसेहर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों परमर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाईदिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे हैसूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसेहै तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तकसब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहदसब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद कोमैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसेचलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसेहै धरती के अंदर लावा किंदील के जैसेऊपर भी काशी कावा है किंदील के जैसेकिंदील ही तो हैं जो बातें दिल जलाती…See More
Apr 28
Aazi Tamaam commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"सुंदरता से कांटे की अहमियत का वर्णन करती रचना अच्छी लगी सादर प्रणाम आ सरना जी"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय बसंत जी सुंदर ग़ज़ल है सादर"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़र (ग़ज़ल)
"सादर प्रणाम आदरणीय धर्मेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई है"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर हौसला अफ़ज़ाई व सराहना के लिये सहृदय शुक्रिया ये मेरी पहली छंद रचना है सादर"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"आ. भाई आजी तमाम जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26
Aazi Tamaam posted a blog post

गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

14-12रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गयेखुशनुमा इंसान दहशत, के निशाने हो गयेबेबसी का हाल देखा, दिल दहल कर रह गयामुफ़्लिसी में ज़िंदगी का, ख़्वाब जल कर रह गयाडर से कोरोना के भी, वो भला अब क्या डरेनित्य जो रोटी कि खातिर, मौत से सौदा करेइंसानों के बीच भाव, घृणा का पैदा कियाधर्म के इन रक्षकों ने, देश का सौदा कियापर ये धर्मांध किसी का, साथ याँ देते नहींइंसानियत को धर्म से, ऊपर ये रखते नहींआज मंज़र है भयावह, मौत बन फ़ैली बबाकोई तो हो मोजिज़ा कि, अब यहाँ भेजे दवाज़िंदगी उन जंगलों में, मस्त भी थी टास्क…See More
Apr 25
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"सादर प्रणाम धामी सर अच्छी ग़ज़ल हुई है सादर"
Apr 25
Aazi Tamaam commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post चेहरे पर मुस्कान बनाकर बैठे हैं (ग़ज़ल)
"छठा शैर बेहद पसंद आया सादर प्रणाम आदरणीय धर्मेंद्र अच्छी ग़ज़ल है"
Apr 25
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई के लिये सादर"
Apr 25
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नज़्म: ख़्वाहिश
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर हौसला अफजाई व प्रतिक्रिया के लिये सहृदय आभार सादर"
Apr 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

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नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222

जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

हमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगे

तुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगे

मिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगे

जरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे को

ये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगे

यहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहरा

अगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगे

हमें आदत है पीने की सो हम तो…

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Posted on April 30, 2021 at 11:22am

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसे

इक झील दिन में लगती है किंदील के जैसे

हर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों पर

मर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाई

दिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे है

सूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसे

है तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तक

सब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहद

सब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद को

मैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसे

चलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसे

है धरती के…

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Posted on April 28, 2021 at 10:59am

गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

14-12

रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

खुशनुमा इंसान दहशत, के निशाने हो गये

बेबसी का हाल देखा, दिल दहल कर रह गया

मुफ़्लिसी में ज़िंदगी का, ख़्वाब जल कर रह गया

डर से कोरोना के भी, वो भला अब क्या डरे…

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Posted on April 24, 2021 at 11:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: कफ़स में उम्र गुजरी है परिंदा उड़ न पायेगा

1222 1222 1222 1222

कफ़स में उम्र गुजरी है परिंदा उड़ न पायेगा

जो तुम आज़ाद भी कर दो घर अपने मुड़ न पायेगा

संभल जाना अगर कोई तुम्हें करने ख़ुदा आये

वगरना ऐसे तोड़ेगा कि दिल फ़िर जुड़ न पायेगा

वो चाहे बेड़ियों से हो या फ़िर की हो किसी दिल से

अगर जो पड़ गई आदत तो बंधन छुड़ न पायेगा

लुटेरे हैं ये सब मुफ़्लिस जो तुम विश्वास दिलाते हो

रिवायत बन गया गर ये भरम फ़िर तुड़ न पायेगा

तमाम आज़ी कुछ आदत…

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Posted on April 24, 2021 at 10:40am

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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