For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
Share

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Friends

  • Aazi Tamaam
  • Dimple Sharma
  • Anil Kumar Singh
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Abrar Ahmed
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
 

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Page

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस 'अरमान' साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। शे'र के बोल्ड शब्दों को देखें- 7)मजनूँ के जैसा हूँ मैं बोलेंगे सारे पत्थर फ़रहाद सा है ये जू //ए शीर बोल उठेगी इस शे'र में शुतरगुर्बा दोष का ज़हूर मालूम होता…"
Jul 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, प्रेम की गहराई को अभिव्यक्त करने की अभिलाषा की शानदार अभिव्यक्ति के रूप में सुन्दर रचना हुई है। बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Jul 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post सुलगते अन्धेरे. . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, उत्तम मर्मस्पर्शी रचना हुई है, आह... बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jul 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान साहिब आदाब, क्या ख़ूब ग़ज़ल कही है मज़ा आ गया, वाह. हर एक शे'र लाजवाब है। शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
Jul 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"धन्यवाद आदरणीय प्रधान सम्पादक महोदय ।"
Jul 11
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (मसनदों पर आज बैठे हो नहीं बैठोगे कल)

2122  -  2122  -  2122  -  212  फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फ़ाइलुन (बह्र- रमल मुसम्मन् महज़ूफ़) मसनदों  पर  आज  बैठे  हो  नहीं  बैठोगे  कल फ़र्श  पर आ जाओ वैसे  भी यहीं  बैठोगे  कलदेना  होगा  पूरा-पूरा  साहिबो  तुमको   हिसाब रू-ब-रू नज़रें  मिलाकर  यूँ  नहीं  बैठोगे  कलआज तुम हो होगा कल हाकिम ज़माना देखना जाग उट्ठा है बशर अब  छुप कहीं  बैठोगे  कलइल्म की इस शाख़ से गर उड़ चले हो आज तुम हो  जिहालत का अँधेरा  जाँ  वहीं  बैठोगे कलआज नीरो बन के जैसे  कर दिया है ख़ाक सब चैन  की  बंसी  बजाकर …See More
Jul 11
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"आदरणीय प्रधान सम्पादक महोदय आदाब, मैंने अपनी एक ग़ज़ल "मसनदों पर आज बैठे हो..." को एडिट करने का अनुरोध पोर्टल पर किया है, इस सम्बन्ध में आपको ईमेल भी किया है। कृपया स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें। यदि एडिटिंग स्वीकार्य न हो तो ग़ज़ल को…"
Jul 11
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post मन का साहिल. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, सुंदर, मनोहारी सृजन के लिए बधाई प्रस्तुत करता हूँ। कोरोना से उबर आने के लिए आपको सपरिवार विशेष बधाईयाँ। सादर। "
Jul 11
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करके दिखाया देश में किसने कहा हुआ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। 'कारण से इनके नित्य ही शासन बुरा हुआ।६।' इस मिसरे को यूँ कहना उचित होगा -  "कारण सदा इन्हीं के ही शासन बुरा हुआ"     …"
Jul 11
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (मेरी माँ)

2122 - 2122  तू  शफ़ीक़-ओ-मह्रबाँ  है तुझसा माँ  कोई कहाँ  है तेरे आँचल  का  ये साया  मुझको जन्नत का गुमाँ है तेरा  दामन  मेरी  दुनिया  औ क़दम  सारा जहाँ  है रंज हो या  हो ख़ुशी बस तू सदा  ही ख़ुश-बयाँ  है बिन  तेरे  ये  ज़िन्दगी तो ख़ाक़ है या फिर धुआँ है     तेरे  दामन  के ये  रौज़न     माँ  ये  मेरी कहकशाँ  है बारिशों   में  धूप  में  भी माँ का आँचल साएबाँ है माँ  के जैसा  कौन होगा माँ बड़ी ही सख़्त-जाँ  हैजान  है क़ुर्बान तुझ  पर  मेरी  माँ  तू  मेरी  जाँ  है"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Jul 10
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहते पुजारी मुझ से हैं तू देवता बदल- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।  'किस्मत को जीतने के लिए हौसला बदल।२।' इस मिसरे में 'हौसला बदल' शब्द विन्यास खटक रहा है। देखियेगा,  सादर। "
Jul 10
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूख का व्यापार मत करवाइए- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, 'हर नदी नाले को हम से पार मत करवाइए' बढ़िया है, 'शेर पाला है तो शेरों से लड़ाओ खूब पर गीदड़ों से तो उसे दो-चार मत करवाइए।२। 'चापलूसों को जमाकर…"
Jul 10
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जगह दिल में तुम्हारे...)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी तशरीफ़ आवरी को ख़ुश आमदीद। सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर।"
Jul 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जगह दिल में तुम्हारे...)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 10
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान साहिब आदाब, रूहानी जज़्बात की अक्कासी करती ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। तीसरे शे'र में 'चादर' को चद्दर करना बहतर होगा। सादर।     "
Jul 9
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"विनम्र श्रद्धांजलि।"
Jul 8

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (मसनदों पर आज बैठे हो नहीं बैठोगे कल)

2122  -  2122  -  2122  -  212 

फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फ़ाइलुन

(बह्र- रमल मुसम्मन् महज़ूफ़)



मसनदों  पर  आज  बैठे  हो  नहीं  बैठोगे  कल

फ़र्श  पर आ जाओ वैसे  भी यहीं  बैठोगे  कल

देना  होगा  पूरा-पूरा  साहिबो  तुमको   हिसाब

रू-ब-रू नज़रें  मिलाकर  यूँ  नहीं  बैठोगे  कल

आज तुम हो होगा कल हाकिम ज़माना देखना

जाग उट्ठा है बशर अब  छुप कहीं  बैठोगे  कल…

Continue

Posted on July 11, 2021 at 3:54pm — 6 Comments

ग़ज़ल (मेरी माँ)

2122 - 2122 



तू  शफ़ीक़-ओ-मह्रबाँ  है

तुझसा माँ  कोई कहाँ  है



तेरे आँचल  का  ये साया 

मुझको जन्नत का गुमाँ है



तेरा  दामन  मेरी  दुनिया 

औ क़दम  सारा जहाँ  है



रंज हो या  हो ख़ुशी बस

तू सदा  ही ख़ुश-बयाँ  है



बिन  तेरे  ये  ज़िन्दगी तो

ख़ाक़ है या फिर धुआँ है    



तेरे  दामन  के ये  रौज़न    

माँ  ये  मेरी कहकशाँ …

Continue

Posted on July 10, 2021 at 6:47pm

कोविड 19 - 2021

221 - 2121 - 1221 - 212 

है कौन  ऐसा  जिसको  यहाँ आज  ग़म नहीं 

हर दिल में याद यादों के नश्तर भी कम नहीं 

दहलाता हर किसी को ये मंज़र है ख़ौफ़नाक

साँसें  हुईं   मुहाल  कि  मसला  शिकम  नहीं 

ग़म  को  वसीह  करते  ये अटके  हुए  बदन

नदियों के तट भी गोर-ए-ग़रीबाँ से कम नहीं 

आई  वबा ये कैसी  कि मातम  है  हर तरफ़ 

ग़मगीन  चहरे  लाशों पे  लाशें भी कम नहीं 

मस्कन भी थी ये गंगा है मद्फ़न भी आज…

Continue

Posted on July 2, 2021 at 11:15pm — 17 Comments

ग़ज़ल (जगह दिल में तुम्हारे...)

1222 - 1222 - 1222 - 1222 

(बह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम) 

जगह  दिल में  तुम्हारे अब  भी थोड़ी  सी बची  है  क्या

मेरे  बिन  ज़िन्दगी  में  जो  कमी  सी  थी  वही  है  क्या

अभी  तक  आरज़ू  जो  दफ़्न  कर  रक्खी  है  सीने  में 

तड़प  उसकी जो  सुनता हूँ  वो तुमने भी  सुनी है  क्या

तेरे  साँसों   की  गर्मी  से  पिघल  कर   रह  गया  हूँ  मैं 

जो    हालत   हो   गई   मेरी  वही   तेरी  हुई   है   क्या 

मिले  हो जब भी…

Continue

Posted on July 2, 2021 at 6:04pm — 7 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//क्या इस बह्र को किसी और प्रचलित बह्र में बदला जा सकता है?// बिल्कुल बदला जा सकता है, आपका मतला…"
5 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"मात शारदे वंदन करती रोज आपको शीष नवाय धार लेखनी मे तुम भरदो,बैठो अब लेखन मे आय। बैठे-बैठे पाती…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आकाश लाल है सूर्य उदित, जनता उठी सवेरा जान।सत्ता के सारे झूठ मिटा, वो गढ़ने अब नव प्रतिमान।।पाये…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन.."
6 hours ago
Samar kabeer posted a blog post

एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल2212 1122 1212 22/112सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआसुख़न में तेरे बता कैसे ये कमाल हुआहज़ार…See More
6 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"आल्हा   / वीर छंद  :  विषय  :जनसंख्या विस्फोट  जनसंख्या सीमित …"
8 hours ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादन अच्छी  ग़ज़ल  हुई…"
14 hours ago
सालिक गणवीर commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"भाई अनीस अरमान जी आदाब बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने. बधाइयाँँ स्वीकार करें."
14 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय  Chetan Prakash जी सादर प्रणाम ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए आपका शुक्रगु़ज़ार…"
14 hours ago
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदाब,  सालिक गणवीर साहब,  छोटी  सी किन्तु  खूबसूरत ग़ज़ल  कही आपने,…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक स्वागत है, सुधीजनो !"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"वाह .. आपकी छांदसिक यात्रा के प्रति साधुवाद  शुभातिशुभ"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service