For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
Share

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Friends

  • Samar kabeer

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Groups

 

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Page

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करें

(१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२ )ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करेंन हैसियत न रसूखों का फिर ख़याल करें**अवाम रहती अगर चुप तो कौन सुनता हैबढ़ाएं अज़्म को और दोगुना जलाल करें**क़दम उठाएँ सदा वक़्त पर कहीं ये न होकि बअ'द वक़्त गुज़रने पे फिर मलाल करें**जहान मोजिज़ा को ही सलाम करता हैयहाँ है पूछ उन्हीं की जो कुछ कमाल करें**ख़ुशी के चंद ही मौक़े मिलेंगे जीवन मेंमिलें वो जब भी कभी तो सभी धमाल करें**ख़फ़ा बुज़ुर्ग हैं इन सिरफिरे जवानों सेबुढ़ापे में भी जो उनकी न देखभाल करें**हमारी खू है कि हम या तो कुछ नहीं करतेअगर करें…See More
Mar 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखेज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे**था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाईजब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे**सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभीजाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे**इश्क़ में देखे हैं तेज़ाब से झुलसे चेहरेऔर कहीं शम'अ पे लुटते हुए जुगनू देखे**ज़ुल्म ये दोस्त रक़ीबों के भी है बस का नहींकौन चाहेगा तेरी आँख में आंसू देखे**आजकल इश्क़ का मतलब है फ़क़त हासिल-ए-जिस्मकिसको फ़ुरसत है कोई प्यार की ख़ुश्बू देखे**पाटते…See More
Feb 23
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल
"भाई सालिक गणवीर साहेब , आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया , आदरणीय  Samar kabeer साहेब ,हमेशा मेरी शकाओं का समाधान करते रहते हैं , ईश्वर से प्रार्थना है वे हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहें , उनके दिए समाधान सटीक…"
Feb 20
सालिक गणवीर commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' जी सादर अभिवादन बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,सर्वप्रथम इसके बधा इयाँ स्वीकार कीजिये। और इससे भी बढ़ कर कबीर साहब की टिप्पणियाँ हैं जिसमें उन्होंने विस्तार पूर्वक मेरी भी बहुत सारी शंकाओं का समाधान…"
Feb 20
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी , आदाब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी , आदाब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल कही है आदरणीय गहलोत जो....तीसरे शे'र पे जरा गौर फरमाएं..सादर।"
Feb 18
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"भाई Aazi Tamaam जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 17
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"सादर प्रणाम जनाब तुरंत जी बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें........... "
Feb 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगेसभी के बीच नफ़रत की खड़ी दीवार कर देंगे**सियासत सिर्फ़ चमके एक है उनका यही मक़सदघरों में दुश्मनों की फौज़ को तय्यार कर देंगे**वो ऐसे बीज बोएँगे उगेगी फ़स्ल काँटों कीउन्ही काँटों से फिर हर रास्ता दुश्वार कर देंगे**वो इतनी नफ़रतें भी पाल कर क्यों चैन से रहतेसुकूँ इस मुल्क से क्या ख़त्म कुछ मक्कार कर देंगे**वतन के वास्ते क्या फ़र्ज़ हैं उससे नहीं वाक़िफ़मगर हक़ के लिए तक़रीर की बौछार कर देंगे**रिआया ने दिया दुत्कार जिनको है चुनावों मेंतमन्ना उनकी है जनता को हम लाचार…See More
Feb 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' साहेब  प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन | "
Feb 12
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"Aazi Tamaam, साहेब , आपकी  प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन |  "
Feb 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"'' क्या फ़साने नज़्म होते हैं फ़क़त अल्फ़ाज़ से    सोज़-ए-दिल भी है ज़रूरी दास्ताँ के वास्ते "  चौथा शे'र ... लाजवाब। मुहतरम 'तुरंत' साहिब आदाब। मुबारकबाद पेश करता हूँ। पाँचवा और छठा शे'र भी उम्दा हुए हैं।…"
Feb 12
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"बेहद ही खूबसूरत ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें आ० गहलोत जी"
Feb 11
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"आदरणीय  Sushil Sarna  जी ,  इस प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन | "
Feb 10

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करें

(१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२ )
ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करें
न हैसियत न रसूखों का फिर ख़याल करें
**…
Continue

Posted on March 30, 2021 at 1:30pm

किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )
किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे
ज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे
**
था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाई
जब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे
**
सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभी
जाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे
**…
Continue

Posted on February 23, 2021 at 9:30pm

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे
सभी के बीच नफ़रत की खड़ी दीवार कर देंगे
**
सियासत सिर्फ़ चमके एक है उनका यही मक़सद
घरों में दुश्मनों की फौज़ को तय्यार कर देंगे
**
वो ऐसे बीज बोएँगे उगेगी फ़स्ल काँटों की
उन्ही काँटों से फिर हर रास्ता दुश्वार कर देंगे
**
वो इतनी नफ़रतें भी पाल कर…
Continue

Posted on February 16, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )

ग़ज़ल( 2122 2122 2122 212 )
अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते
जूँ कि गुल दरकार है इक गुलसिताँ के वास्ते
**
है शराब अच्छी अगर तो रिन्द ख़ाली कर सुबू
पर नमूना छोड़ दे पीर-ए-मुग़ाँ के वास्ते
**
है चना कोई अकेला भाड़ क्या फोड़ेगा वो
लोग होते हैं ज़रूरी कारवाँ के वास्ते
**…
Continue

Posted on February 10, 2021 at 3:30pm — 6 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"ख्याल बहुत उम्दा हैं गज़ल में। हार्दिक बधाई, भाई लक्ष्मण जी।"
2 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आपकी यह गज़ल पढ़ कर भी आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, मेरे भाई, लक्ष्मण जी।"
2 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सामयिक स्थिति इंगित करती यह गज़ल अच्छी बनी है, भाई लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ…"
15 hours ago
Admin posted discussions
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता)…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनजाना उन्माद
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
21 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद मिलते ही तुमसे हर बारनीलाकाश सारामुझको अपना-सा लगेबढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वारकण-कण…See More
23 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी…See More
yesterday
सालिक गणवीर posted blog posts
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service