For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
Share

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Friends

  • Samar kabeer

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Groups

 

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
"एक और बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय..."
Jul 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"वाह क्या ग़ज़ल कही है आदरणीय गहलोत जी...वाकई बहुत ही प्यारी...हार्दिक बधाई"
Jul 4
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
" भाई   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Jun 23
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
"आ. भाई गिरधारी सिह जी, खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Jun 23
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैंन है बर्ग-ए-गुल न शमीम-ए-गुल मेरी ज़ीस्त में बचे ख़ार हैं**तेरे हिज्र से जो मिले हैं ग़म वही दौलतें हैं मेरी सनममेरी फ़िक्र का है सबब तो बस ये बढे हुए ग़म-ए-यार हैं**मेरे वास्ते है तू नाज़नीं बड़ी दिलनशीं लगे महज़बींअरे क्या हुआ जो ज़बीन पर पड़े चंद नक़्श-ओ-निगार हैं**गो है बह्र-ए-इश्क़ ये पुरख़तर प रुका नहीं है कभी सफ़रभले चंद कस्तियाँ बह्र में हुईं मुश्किलों से ही पार हैं**तेरे दम से ही मेरे गीत हैं भले दूर आज तू मीत…See More
Jun 23
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी ,हौसला आफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jun 22
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"भाई   Nilesh Shevgaonkar जी ,हौसला आफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jun 22
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"ख़ूब हुई है यह ग़ज़ल आदरणीय.बढाई "
Jun 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । बहुत खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 19
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )

ग़ज़ल ( 1222 1222 1222 1222 )मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थेसफ़र भी तुम मुसाफ़िर तुम मक़ाम-ए-दिल तुम्हीं तो थे**अकेलेपन के साथी हो अभी तक याद में ढलकरमुसीबत में ख़ुशी में बारहा शामिल तुम्हीं तो थे**हथेली की लकीरों को नुज़ूमी को दिखाते क्यातुम्हीं कल थे हमारा और मुस्तक़्बिल तुम्हीं तो थे**न जाने रह गए कितने अधूरे ख़्वाब जीवन मेंहज़ारों में हुआ था ख़्वाब जो कामिल तुम्हीं तो थे**बहुत बेहतर समझते थे ज़ुबान-ए-ख़ामुशी भी तुमबताएँ क्या कि इस दिल की ज़ुबान-ए-दिल तुम्हीं तो थे**समुंदर तुम तुम्हीं सैलाब और…See More
Jun 18
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post समझा बताओ किसने किताबों ने जो कहा-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"क्या बात क्या बात क्या बात "
Jun 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता था हम से देश को आया सँभालने-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत बढ़िया  सृजन "
Jun 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कम है-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" (गजल)
"बहुत खूबसूरत "
Jun 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
" लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी ,  जी, आद. आपका अनमोल आशीर्वाद पा कर मेरा लिखना सार्थक हो गया. आदर सहित कोटिशः धन्यवाद"
Jun 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
"Aazi Tamaam  साहेब आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया एवं सादर नमन | "
Jun 17
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
"बेहद सुंदर ग़ज़ल है सर सादर प्रणाम आ तुरन्त जी"
Jun 17

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )
जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं
न है बर्ग-ए-गुल न शमीम-ए-गुल मेरी ज़ीस्त में बचे ख़ार हैं
**
तेरे हिज्र से जो मिले हैं ग़म वही दौलतें हैं मेरी सनम
मेरी फ़िक्र का है सबब तो बस ये बढे हुए ग़म-ए-यार हैं
**
मेरे वास्ते है तू नाज़नीं बड़ी दिलनशीं लगे महज़बीं
अरे…
Continue

Posted on June 22, 2021 at 11:30pm — 3 Comments

मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )

ग़ज़ल ( 1222 1222 1222 1222 )
मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे
सफ़र भी तुम मुसाफ़िर तुम मक़ाम-ए-दिल तुम्हीं तो थे
**
अकेलेपन के साथी हो अभी तक याद में ढलकर
मुसीबत में ख़ुशी में बारहा शामिल तुम्हीं तो थे
**
हथेली की लकीरों को नुज़ूमी को दिखाते क्या
तुम्हीं कल थे हमारा और मुस्तक़्बिल तुम्हीं तो…
Continue

Posted on June 17, 2021 at 8:30pm — 5 Comments

ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )

ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी
निज़ाम से तनातनी भी कीजिए कभी कभी
**
हयात के लिए हैं दोस्त ख़ुश्क़ अश्क पुरख़तर
फुगाँ की रस्म अदायगी भी कीजिए कभी कभी
**
विसाल और हिज्र के मज़े भी हैं जुदा जुदा
सुपुर्द-ए-हिज्र ज़िंदगी भी कीजिए कभी कभी
**
कशीदगी गमों से हम निभा…
Continue

Posted on June 14, 2021 at 4:00am — 4 Comments

ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करें

(१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२ )
ग़लत है मीर तो उस से भी कुछ सवाल करें
न हैसियत न रसूखों का फिर ख़याल करें
**…
Continue

Posted on March 30, 2021 at 1:30pm

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Gurpreet Singh jammu posted a blog post

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-22-22-2उस लड़की को डेट करूँ ये मेरी पहली ख़्वाहिश है। और ये ख़्वाहिश पूरी हो जाए बस ये…See More
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post मिथ्या जगत
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई। "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल

1222 1222 1222 1222जरा सा मसअला है ये नहीं  तकरार के  क़ाबिलकिनारा हो नहीं सकता कभी मझधार के क़ाबिलन…See More
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"वाह...आपका सुझाव बहुत ही खूबसूरत है आदरणीय नीलेश जी किनारा हो नहीं सकता कभी मझधार के क़ाबिल "
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी  जरा सा मसअला है ये नही तकरार के क़ाबिल... तकरार के क़ाबिल नहीं है तो अच्छा ही…"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"जी बिल्कुल...आप लोगों की तीखी बहस में भी काफी कुछ सीखने को ही मिलता है।"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"आ. बृजेश जी, आप तो आप .. मैं भी अक्सर समर सर के सानिध्य में सीखता हूँ.. कई बार तीखी बहस भी हो…"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"ऐसे कहता हूँ जरा सा मसअला है ये नही तकरार के क़ाबिल चलो माना नहीं हूँ मैं तुम्हारे प्यार के क़ाबिल"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"उचित है आदरणीय नीलेश जी...ये सच है कि साहित्य में मेरी जानकारी बहुत ही अल्प है...बस कुछ कहना चाहता…"
Wednesday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service