For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

January 2026 Blog Posts (12)

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी



सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं।

स्थिति हो विषम भी तो घरें धीर निज हिय , राह अपने लिए जो स्वयँ ही बनाते हैं।।

रण ही है जीवन का नाम दूजा मान कर, कार्य में निरत पग पीछे न हटाते हैं।

जग में मनुज वे ही सदा ही सभी के लिए, कर्मवीरता के प्रतिमान बन जाते हैं।।1।।



रहें नहीं भाग्य के भरोसे पछताएँ नहीं, पथ की विषमताओं को जो पहचाने हैं।

हों नहीं निराश न ही कोशिशों से मुख मोड़ें, किसी हार से जो कभी हार नहीं…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on January 30, 2026 at 1:05pm — 1 Comment

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान।

किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।।

*

हवा  विषैली  हो  गयी, रहा  नगर  या गाँव।

बिखराते नित मैल अब, जिह्वा के सौ पाँव।।

*

बदनामी से  नाम  नित, जोड़़  रहे  सब मौन

धन अच्छे व्यवहार का, कमा रहा अब कौन।।

*

मन रिश्तो से बढ़ करे, अब बस धन की होड़

सुख-दुख के  साथी  गये, ऐसे  पथ  में छोड़।।

*

बन जाये यदि चाहता, जीवन…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 29, 2026 at 11:19pm — No Comments

प्रवाह, बुद्धिमत्ता और भ्रम का खेल सिद्धांत (लेख)

मनुष्य और भाषा के बीच का संबंध केवल अभिव्यक्ति का नहीं है, अगर ध्यान से सोचें तो यह एक तरह का खेल है जिसकी व्याख्या खेल सिद्धांत के आधार पर की जा सकती है। खेल सिद्धांत हमें सिखाता है कि जब दो या अधिक खिलाड़ी किसी स्थिति में निर्णय लेते हैं, तो हमेशा सत्य या सही को नहीं चुनते, बल्कि वह विकल्प चुनते हैं जिससे उन्हें सबसे अधिक लाभ दिखाई देता है। यही सिद्धांत भाषा और बुद्धिमत्ता के आकलन पर भी लागू होता है।…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 25, 2026 at 10:31pm — No Comments

कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटी

बेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात ।
बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे  आघात ।।
सुता   सहे    आघात, पराई   हरदम   रहती ।
जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।
जाने   कितने  रूप,सुता   यह   ओढ़े    लेटी ।
सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।

सुशील सरना / 20-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on January 20, 2026 at 2:21pm — 2 Comments

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर पर

दोहा एकादश   . . . . पतंग

आवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग ।

बीच पतंगों के लगे, अद्भुत दम्भी जंग ।।

बंधी डोर से प्यार की, उड़ती मस्त पतंग ।

आसमान को चूमते, छैल-छबीले रंग ।।

कभी उलझ कर लाल से, लेती वो प्रतिशोध ।

डोर- डोर की रार का, मन्द न होता क्रोध ।।

नीले अम्बर में सजे, हर मजहब के रंग ।

जात- पात को भूलकर, अम्बर उड़े पतंग ।।

जैसे ही आकाश में, कोई कटे पतंग ।

उसे लूटने के लिए, आते कई दबंग ।।

किसी धर्म…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 14, 2026 at 3:03pm — 3 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   

जिस-जिस की सामर्थ्य रही है

धौंस उसी की

एक सदा से

 

एक कहावत रही चलन में

भैंस उसीकी जिसकी लाठी

मनमर्जी थोपी जाती है

नहीं चली तो तोड़ें काठी

 

अहंकार मद भरे विचारों

उड़ें हवा में

वे गर्दा से ..

 

हठ में अड़ना, जबरन भिड़ना

और झूठ रच मन की करना

निर्बल अबलों या नन्हों में

नाहक वीर बने घुस लड़ना

 

मद में ऐंठे गरमी झोंकें

लफ्फाजी भी

यदा-कदा से

 

खरबूजे का मीठा बाना

चक्कू से…

Continue

Added by Saurabh Pandey on January 13, 2026 at 11:28pm — 4 Comments

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . . .

किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।
आँखें   उसकी    वेदना, नित्य   करें    साकार ।।
नित्य  करें   साकार ,  दर्द  यह  कहा  न  जाता ।
उसे  भूख  का  दंश , सदा  ही   बड़ा   सताता ।।
पत्थर   पर  ही  पीठ , टिकाई   हरदम   इसने  ।
भूखी काली रात , भाग्य  में  लिख  दी  किसने ।।

सुशील सरना / 9-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on January 9, 2026 at 1:29pm — 2 Comments

ग़ज़ल

  

 

ग़ज़ल

2122  2122  212

 

कितने काँटे कितने कंकर हो गये

हर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये

 

रास्तों  पर  तीरगी  है आज भी

शह्र-से जब गाँव  के घर हो गये                                  

 

आत्मनिर्भर हो रहे थे ही कि वे

हुक्म आया घर से बेघर हो गये

 

जो गिरी तो साख गिरती ही गई

अच्छे खासे नोट चिल्लर हो गये

 

सहमी-सहमी हर कली खिलती है अब  

यूँ  बड़े  भँवरों के लश्कर हो…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on January 8, 2026 at 5:00pm — 8 Comments

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोध

मानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।

सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध ।।

बड़े भयानक क्रोध के, होते हैं परिणाम ।

बदले के अंगार को, मिलता नहीं विराम ।।

हर लेता इंसान का, क्रोधी  सदा विवेक ।

मिटते  इसके ज्वाल में, रिश्ते मधुर अनेक ।

क्रोध अनल में आदमी, कर जाता वह काम ।

घातक जिसके बाद में, अक्सर हों परिणाम ।।

पर्दे पड़ते अक्ल पर, जब  आता है क्रोध ।

दावानल में क्रोध की, बस लेता प्रतिशोध…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 8, 2026 at 2:00pm — 4 Comments

सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

*

ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी

मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१।

*

भूले हैं सिर्फ  लोग  न  सच को निहारना

हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२।

*

आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को

दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३।

*

बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर

सच को तो  झूठ  आस  भी देता नहीं कभी।४।

*

जनता को सत्य  कैसे  भला रास आएगा

सच सा हुआ है एक भी राजा नहीं…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 7, 2026 at 6:04pm — 4 Comments

सुखद एकान्त है या है अकेलापन

तारों भरी रात, फैल रही चाँदनी

इठलाता पवन, मतवाला पवन

तरू तरु के पात-पात पर

उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास

मेरा मन क्यूँ उन्मन

क्यूँ इतना उदास

 

खुशी ... पिघलती हुई मोम-सी

जाने क्यूँ उसे हमेशा

होती है जाने की जल्दी

आती है, चली जाती है

आ..ती  है 

आलोप हो जाती है

 

कोई टुकड़ा स्याह बादल का आकर

रुक गया है मेरी छत पर मानो

कैसा सिलसिला है प्रकृति का यह

दर्द की अवधि समाप्त नहीं…

Continue

Added by vijay nikore on January 5, 2026 at 9:00am — 6 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना

देखना सोया हुआ है



व्यक्त होने की जगह

क्यों शब्द लुंठित

जिस समय जग

अर्थ ’नव’ का गोड़ता हो

कुंद होती दिख रही हो वेग की गति

और कर्कश वक्त

केंचुल छोड़ता हो

साधना जब

शौर्य का विस्तार चाहे

उग्र का पर्याय तब

खोया हुआ है



धूप के दर्शन नहीं हैं,

धुंध है बस

व्योम के उत्साह पर

कुहरा जड़ा है

जम रहा है आँख का पानी निरंतर

काल यह संक्रांति का

औंधा पड़ा है

अब प्रतीक्षा…

Continue

Added by Saurabh Pandey on January 1, 2026 at 12:33am — 8 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
9 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service