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Jaihind Raipuri
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Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था वो अपने सब ज़ज़्बात सुनेगा टिन की छत के बैठ के नीचे साथ मेरे बरसात सुनेगा हाँ वो बड़े दिलवाला है तो सब के सब फ़िक़रात सुनेगा किन से आस लगाए हो तुम दिल उन का…"
Feb 14
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी हौसलाअफ़ज़ाई का आभारी हूँ "
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक बधाई।"
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उसकी हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में मुझ से मुझ ही को दूर करने ये आयी तन्हाई शाम ए फ़ुर्क़त में तुम ख़यालों में आ जाते हो यूँ चीन ज्यूँ आ गया…"
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला बढ़ाया आपके अमूल्य इस्लाह से ग़ज़ल निखर गईं है आपके सारे इस्लाह मंज़ूर अलबत्ता चीन ज्यूँ आ गया था तिब्बत में ' था ' टंकण त्रुटि थी बहुत बहुत…"
Feb 4
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में/ आदरणीय ये मिस्रा बहर में नहीं है। "शब-ए" का वज़न 12 होता है। इसे "शाम-ए-फ़ुर्क़त कहने से मिस्रा सहीह हो…"
Feb 3
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस कीहो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में मुझ से मुझ ही को दूर करने को आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में तुम ख़यालों में आ जाते हो यूंचीन ज्यूँ आ गया तिब्बत में चाट कर के अफीम मज़हब कीमरते हैं क्यूँ ग़रीब ग़फ़लत में ए ग़रीबी है शुक्रिया तेराजो भी सीखा है सीखा ग़ुर्बत में मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Feb 3
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ सियान,तभ्भो सब मन शर्माथे हिन्दी म जी गाथे, इंग्लिश म गोठियाथे अपन भाखा उन्नति, का आने मन ह करही आव जी गोठियाव, भाखा म छत्तीसगढ़ी मौलिक एवं अप्रकाशित "
Feb 3
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"शह्र में झूठ का कुछ ऐसा असर है साईं अब तलक सच की नहीं ख़ैर ख़बर है साईं याद है या कोई रूहानी असर है साईं काम करता ही नहीं कुछ भी हुनर है साईं भूल जाता हूँ ये अक्सर कि उसे भूलना है अब किसी बात का भी होश किधर है साईं उसकी यादों का मैं ये बोझ उठाऊं…"
Jan 28
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी नमस्कार बहुत खूब ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सभी शैर बहुत अच्छे हैं गुस्ताख़ी मुआफ़ करें लेकिन मतले के सानी में आपने मौत को आगे का रास्ता बताने की कोशिश की है मौत तो हमेशा से ही सबकी मंज़िल है ऐसा सुना, पढ़ा है और बूँद…"
Dec 28, 2025
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका अपने समय दिया कुछ त्रुटियों की सुधारने का प्रयास किया है देखिएगा! "
Dec 28, 2025
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"शब में तारों से जगमगाते फ़लक मेरे पुरखों के नक़्श-ए-पा तो नहीं  लगता ईमान सा ही कुछ शायद गिर गया है ये आपका तो नहीं "
Dec 28, 2025
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"आदरणीय निलेश जी नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त दिया मतले के सानी को उला से साथ कहने की कोशिश की थी बाकि आपने सहीह फ़रमाया त्रुटिओं को सुधारने की कोशिश करता हूँ "
Dec 28, 2025
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"देखकर ज़ुल्म कुछ हुआ तो नहीं हूँ मैं ज़िंदा भी मर गया तो नहीं ढूंढ लेता है रंज ओ ग़म के सबब दिल मेरा दर्द आशना तो नहीं ज़ेह्न कुछ और कहता और ही दिल कोई अंदर मेरे सिवा तो नहीं शब में तारों से जगमगाते फ़लक मेरे अज्दाद-ए-नक़्श-ए-पा तो नहीं चुप है इस…"
Dec 27, 2025
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"सादर अभिवादन"
Dec 27, 2025

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Gender
Male
City State
Raipur
Native Place
odisha
Profession
Busi
About me
Think a lot

Jaihind Raipuri 's Blog

ग़ज़ल

2122    1212    22

 

आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में

क्या से क्या हो गए महब्बत में

 

मैं ख़यालों में आ गया उस की

हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में

 

मुझ से मुझ ही को दूर करने को 

आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में

 

तुम ख़यालों में आ जाते हो यूं

चीन ज्यूँ आ गया तिब्बत में

 

चाट कर के अफीम मज़हब की

मरते हैं क्यूँ ग़रीब ग़फ़लत में

 

ए ग़रीबी है शुक्रिया तेरा

जो भी सीखा है सीखा ग़ुर्बत…

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Posted on February 3, 2026 at 10:30am — 6 Comments

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At 7:31pm on August 14, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.erica@aol.com)Thanks.

 
 
 

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