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बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Male
  • noida
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post नज़्म (बे-वफ़ा)
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी...आपकी ये रचना मुझे बहुत अच्छी लगी...सादर"
Sep 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल

221       1221       1221       122 ख़्वाबों को ज़रा आँख के पानी से निकालो इन बुलबुलों को अश्क-फ़िशानी से निकालोईमान  की  कश्ती  पे  मुहब्बत  की  मसर्रत इस कश्ती  को तूफ़ां की रवानी से निकालोइस  रास्ते  पे  वस्ल   की  उम्मीद   नहीं  है तरकीब   कोई   राह   पुरानी   से  निकालोग़ज़लों को रखो नफ़रती शोलों  से बचाकर अश'आर  सभी लफ़्ज़ गिरानी से  निकालोइक रोज़ गुज़र जाऊँगा ज्यूँ वक़्त  गुज़रता भावों में रखो मुझको मआनी  से निकालोग़र  याद  उसे  करते  ही आ  जाते हैं आँसू 'ब्रज' इतना  बुरा है तो कहानी  से  निकालो(मौलिक…See More
Sep 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"मैं पहले ही कह चुका हूँ निर्णय आपका है। "
Sep 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी सच कहूँ तो मैं अब भी आपकी बात नहीं समझा..अगर,मगर,गर ये प्रश्नवाचक शब्द हैं.. जैसे हम कहें "अगर ऐसा हुआ" के बाद हमें तो लगाना ही पड़ेगा तभी सम्पूर्ण प्रश्न सामने आएगा।वैसे ही इतना,कितना किसी प्रश्न…"
Sep 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"//गर और तो समानार्थी नहीं है शायद...गर मतलब यदि और यदि के साथ तो का इस्तेमाल कर सकते हैं// जनाब बृजेश जी, लगता है मैं अपनी बात को सही तरीके से पहुँचा नहीं सका हूँ, ये बात सही है कि गर और तो शब्द समानार्थी नहीं हैं... मगर हम…"
Sep 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनंदन एवं आभार आदरणीय मेहता जी..."
Sep 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय चेतन जी...जैसा कि आपने बताया  'यदि आज भी बुखार रहता है, मैं काॅलेज नहीं जाऊँगा! ' इसमें तो की कमी साफ महसूस हो रही है।दो वाक्यों को जोड़ने के लिए मध्य में एक पुल तो चाहिए न!? और आदरणीय समर जी ने कुछ उदाहरण के साथ…"
Sep 14
जयनित कुमार मेहता commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बाक़ी आदरणीय समर कबीर जी ने जो सुझाव दिया है, उसपर गौर फरमाइयेगा।सादर।"
Sep 14
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"जनाब चेतन प्रकाश जी ,  जनाब अमीरुद्दीन जी, अव्वल तो ये कि 'गर'(अगर) और 'तो' शब्द के अर्थ अलग-अलग हैं और इनका इस्तेमाल 'ब्रज' जी के मक़्ते में बिल्कुल  दुरुस्त है, मैं चंद ऐसे शाइरों के अशआर पेश कर रहा हूँ जो…"
Sep 13
Chetan Prakash commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदाब, भाई बृजेश कुमार ब्रज, आप यूँ समझिये, सानी और ऊला दो रस्सी के टुकड़े हैं, आपको उन्हें एक करना है, कितने जोड़ लगाइएगा, बताइये! भाषा शास्त्र और ध्वन्यात्मक विज्ञान  Linguistics & Phonetics) ताउम्र विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाया, आप मेरी…"
Sep 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय चेतन जी जहाँ तक मेरी जानकारी है गर का अर्थ यदि है...और यदि के साथ तो ठीक ही है..."
Sep 13
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"भाई चेतन जी, मैंने ऊला में कुछ मशविरा दिया है, उसके बाद मुझे नहीं लगता कि कोई गुंजाइश है ।"
Sep 13
Chetan Prakash commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदाब, श्रद्धेय समर कबीर साहब, आपने इस नाचीज़ की टिप्पणी का संज्ञान लिया, आपका आभारी हूँ! वस्तुतः मेरा संकेत ऊला के संदर्भ में सानी में सुधार की अपेक्षा से था! कहना न होगा कि शे'र दोनों मिसरों का समन्वय है, और कुल कथन है, फिर एक ही स्टेटमेंन्ट…"
Sep 13
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
" / हाँ मकते का सानी," ब्रज इतना बुरा है तो कहानी से निकालो", मेरी नज़र में सुधार चाहता है// भाई चेतन प्रकाश जी इस मिसरे में 'ब्रज' का वज़्न 2 है, और कोई संशय हो तो विस्तार से बताएँ, सिर्फ़ इतना लिखना काफ़ी नहीं कि मिसरा…"
Sep 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक अभिनंदन करता हूँ...मतले के लिए आपका सुझाव बड़ा खूबसूरत है...गर और तो समानार्थी नहीं है शायद...गर मतलब यदि और यदि के साथ तो का इस्तेमाल कर सकते हैं..."
Sep 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त और हौसलाफजाई के लिए सादर आभार...आपकी सलाह पे जरूर ध्यान दूँगा..."
Sep 13

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल

221       1221       1221       122



ख़्वाबों को ज़रा आँख के पानी से निकालो

इन बुलबुलों को अश्क-फ़िशानी से निकालो

ईमान  की  कश्ती  पे  मुहब्बत  की  मसर्रत

इस कश्ती  को तूफ़ां की रवानी से निकालो

इस  रास्ते  पे  वस्ल   की  उम्मीद   नहीं  है

तरकीब   कोई   राह   पुरानी   से  निकालो

ग़ज़लों को रखो नफ़रती शोलों  से बचाकर

अश'आर  सभी लफ़्ज़ गिरानी से  निकालो

इक रोज़ गुज़र जाऊँगा ज्यूँ वक़्त  गुज़रता

भावों में रखो…

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Posted on September 12, 2022 at 2:30pm — 18 Comments

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122

हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है

सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है



ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे

मग़र आँख से बहता पानी अलग है



है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती

यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है



मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगा

कहे ऊला कुछ और सानी अलग है



पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न …

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Posted on August 6, 2022 at 8:30am — 10 Comments

ग़ज़ल-आँसू

2122 2122

उल्फ़तों की रीत आँसू
वेदना के मीत आँसू

तुम ग़ज़ल में ढल गईं तो
बन गये संगीत आँसू

पीर ने दर खटखटाया
आ गये मनमीत आँसू

आँसुओं के रूप कितने
मुस्कुराहट प्रीत आँसू

प्रेम के पावन सफ़र में
हार 'ब्रज' है जीत आँसू

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on July 14, 2022 at 8:59am — 8 Comments

ग़ज़ल-जल उठा

2122       2122       2122       212

नफ़रतों की  आग भड़की भाईचारा  जल उठा

ख़ौफ़ इतना है कि दरिया का किनारा जल उठा



भीड़  ने  पकड़ा  किसी  को, देखते  ही  देखते

अम्न की उम्मीद उल्फ़त का सितारा जल उठा
 

वहशियों ने  वहशतों की तोड़  दी हर एक  हद

फिर कोई अरमान,आँखों का सहारा जल उठा


आह ये  नफ़रत  नगर  से  गाँव  कैसे आ  गई

खेत झुलसे हैं  कहीं खलिहान सारा जल…
Continue

Posted on April 22, 2022 at 8:24pm — 2 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
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