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Rachna Bhatia
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Latest Activity

Rachna Bhatia commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post रश्मियाँ दिखतीं नहीं - ग़ज़ल
"वाह वाह वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई। आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी हार्दिक बधाई।"
Apr 17
Rachna Bhatia posted a blog post

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

2122 1122 1122 22 /1121अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शबदिल मेरा तोड़ा गया कह के ख़िलौना कल शब2ज़ख़्मी दिल पर तेरा जब नाम उकेरा कल शबहाय रब्बा मेरे तब होंठों से निकला कल शब3झूठ की सुब्ह तलक माँग है बाज़ारों मेंऔर मैं एक भी सच बेच न पाया कल शब4मेरे हाथों की लकीरें भी बदल जाएँगीख़्वाब आँखों ने दिखाया मुझे ऐसा कल शब5उस तरफ़ चाँद सितारों की चमक थी "निर्मल"इस तरफ़ था मेरी जाँ का रुख़ ए ज़ेबा कल शब6ज़िन्दगी साँस की तारों से बँधी थी "निर्मल"उसने इस पाश को ही नींद में तोड़ा कल शबमौलिक व…See More
Apr 5
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, ग़ज़ल तक आने तथा इस्लाह देने के लिए आपकी आभारी हूँ। सर्, शायद फिर ग़लत अर्थ लिया है मैंने.. ख़्वान-ए-इश्क़ KHvaan-e-ishq خوان عشق spread of love अगर ठीक नहीं तो ऊला बदलने की कोशिश करती हूँ। सादर।"
Apr 3
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'ख़्वान ए इश्क वाले ही' ये मिसरा समझ नहीं आया ।"
Apr 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- उफ़ किया न करे
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया रचना जी...हार्दिक बधाई"
Apr 1
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post "ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"आदरणीय सर् सादर नमस्कार।ओ बी ओ को ग्यारहवीं सालगिरह पर ग्यारह अश्आर से सजी ग़ज़ल की भेंट बहुत शानदार है।हर शे'र शानदार है।आपका सपना जल्दी ही पूरा हो।ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। आमीन। सादर।"
Apr 1
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओ बी ओ के सभी सदस्यों को 11 वीं वर्षगांठ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।"
Apr 1
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं

212 12221ज़ार ज़ार रोते हैंजब वो होश ख़ोते हैं2ख़्वान ए इश्क वाले हीतो फ़कीर होते हैं3लोग क्यों अदावत मेंहाथ खूँ से धोते हैं4डोरी में वो सांसों कीआरज़ू पिरोते हैं5चाहतों की गठरी सबउम्र भर सँजोते हैं6क्यों अज़ीज़ अपने हीअश्कों में डुबोते हैं7ख़्वाब देखने वालेरात भर न सोते हैंमौलिक व अप्रकाशितरचना निर्मलदिल्लीSee More
Mar 30
नाथ सोनांचली commented on Rachna Bhatia's blog post जोगिरा सा रा रारा रा,..
"आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन होली पर। बधाई स्वीकार कीजिये"
Mar 30
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय गंगाधर शर्मा जी, तरही ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है। बधाई। आदरणीय संजय शुक्ला जी से सहमत हूँ। कृपया 'शर्म' क़ाफ़िया पर भी गौर करें। सादर ‌।"
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी, अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई। आदरणीय मुझे लगता है तीसरा और बेहतर हो सकता है।४थे में यही के बदले में कहीं होना चाहिए। सादर।"
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय अबरार अहमद 'असर' जी, बेहतरीन ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें। भाई,४पर ख़ास वाह,वाह, वाह,वाह। "
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीया ऋचा यादव जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही।बधाई।पर, 8,9 शे'र में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ दोष है, देखें ।"
Mar 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई।"
Mar 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय संजय शुक्ला जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। वाह वाह वाह"
Mar 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय आज़ी तमाम जी। ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है,पर मतले में 'रम' की बंदिश हो गई है। इस पर गौर करें। सादर।"
Mar 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

2122 1122 1122 22 /112

1

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

दिल मेरा तोड़ा गया कह के ख़िलौना कल शब

2

ज़ख़्मी दिल पर तेरा जब नाम उकेरा कल शब

हाय रब्बा मेरे तब होंठों से निकला कल शब

3

झूठ की सुब्ह तलक माँग है बाज़ारों में

और मैं एक भी सच बेच न पाया कल शब

4

मेरे हाथों की लकीरें भी बदल जाएँगी

ख़्वाब आँखों ने दिखाया मुझे ऐसा कल शब

5

उस तरफ़ चाँद सितारों की चमक थी "निर्मल"

इस तरफ़ था…

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Posted on April 4, 2021 at 7:00am

ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं

212 1222

1

ज़ार ज़ार रोते हैं

जब वो होश ख़ोते हैं

2

ख़्वान ए इश्क वाले ही

तो फ़कीर होते हैं

3

लोग क्यों अदावत में

हाथ खूँ से धोते हैं

4

डोरी में वो सांसों की

आरज़ू पिरोते हैं

5

चाहतों की गठरी सब

उम्र भर सँजोते हैं

6

क्यों अज़ीज़ अपने ही

अश्कों में डुबोते हैं

7

ख़्वाब देखने वाले

रात भर न सोते हैं

मौलिक व अप्रकाशित

रचना…

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Posted on March 30, 2021 at 8:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल- उफ़ किया न करे

मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212 1122 1212 22

1

जो सह के ज़ुल्म हज़ारों भी उफ़ किया न करे

दुआ करो कि उसे ग़म कोई मिला न करे

2

मुझे बहार की रंगीनियाँ मिलें न मिलें

मगर ख़िज़ा ही रहे उम्र भर ख़ुदा न करे

3

मुझे वो बज़्म में चाहे मिले नहीं खुल कर

मगर मज़ाक में भी ग़ैर तो कहा न करे

4

मैं ज़र्द पत्ते सा घबरा के काँप जाता हूँ

कहे हवा से कोई तेज़ वो चला न करे

5

नशा किसी प महब्बत…

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Posted on March 21, 2021 at 8:30am — 7 Comments

जोगिरा सा रा रारा रा,..

16,11 मात्रा अंत मे गुरु लघु

1

ले राधा जैसी चंचलता, कृष्णा जैसा प्यार।

बरसाने में खेली जाए,होरी भी लठमार।

जोगिरा सा रा रारा रा,..

2

कृष्ण गए थे हँसी ठिठोली, करने राधा…

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Posted on March 19, 2021 at 3:00pm — 5 Comments

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17 hours ago
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"सामयिक स्थिति इंगित करती यह गज़ल अच्छी बनी है, भाई लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई।"
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