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Rachna Bhatia
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  • Aazi Tamaam
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • DR ARUN KUMAR SHASTRI
 

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Rachna Bhatia commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें। बहुत अधिक तो नहीं जानती फ़िर भी .. मतले में मुझे "कि" और "तो" भर्ती के लगे। //जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो  रुस्वाई के भंवर में तो ख़ुद जा…"
Wednesday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, ग़ज़ल तक आने तथा सराहना करने के लिए बेहद शुक्रिय:।"
Wednesday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, देर से जवाब देने के लिए क्षमा चाहती हूँ। ग़ज़ल तक आने तथा सराहना करने के लिए बेहद शुक्रिय:।"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीया बधाई..."
Jan 17
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"विधा- छंदमुक्त कविता एल्बम सोचा आज घर की सफ़ाई कर दूं जो जरूरी नहीं उसे बाहर कर दूं जैसे ही खोली अल्मारी तभी चीज़ गिरी सर पर एक भारी देखा तो एलबम गिरी थी जिसमें मेरी जीवनी भरी थी कैसे रिश्तों में उलझी पड़ी थी प्यार और दर्द से उसे सहलाया बदल चुका है…"
Jan 16
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"आदरणीय ऊषा अवस्थी जी बहुत ख़ूब लिखा। बधाई"
Jan 16
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। "
Jan 13
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"आदरणीय मनोज अहसास जी, हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रियः।  जी ,बेसब्री से इंतज़ार है। "
Jan 12
मनोज अहसास commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- भाते हैं कम
"ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बाकी गुणीजनों की राय की प्रतीक्षा कीजिये हार्दिक बधाई सादर"
Jan 12
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल- भाते हैं कम

212 212 2121जाने क्यों इश्क़ के पेच ओ ख़मज़ेह्न वालों को भाते हैं कम2उनके सर की उठा कर क़समहम महब्बत का भरते हैं दम3मुस्कुरातीं हैं सब चूड़ियाँजब सँवारें वो ज़ुल्फ़ों के ख़म4जब जी चाहे बुला लेते हैंकरके पायल की छम-छम सनम5होंगे दिन रात मधुमास सेजब भी पहलू में बैठेंगे हम6जाएँ जब उनकी आग़ोश मेंरौशनी शम्अ की करना कम7एक पल में ही मर जाएँगेदेखीं "निर्मल" ने आँखें जो नममौलिक व अप्रकाशितरचना निर्मलSee More
Jan 2
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"आदरणीय शेख़ शाहज़ाद उस्मानी जी आदाब। आदरणीय, आपने बहुत ख़ूब शीर्षक सुझाए।"ढहता ताज" बहुत अच्छा है। हार्दिक धन्यवाद।"
Dec 30, 2021
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, वाह वाह वाह क्या कहने अंतर्मन को भेदती हुई लघुकथा। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Dec 30, 2021
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, नमस्कार। आपके इन शब्दों से मेरी क़लम को बहुत बल मिला।आपकी हार्दिक आभारी हूँ।"
Dec 30, 2021
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"चरमराता विश्वास “क्या ताज सिर्फ प्रेमी ही बनाएगा प्रेमिका के लिए? नहीं, मेरे बच्चे भी बनाएंगे मेरे लिए।” इमारत न सही, मेरे प्यार, बलिदान को तो समझेंगे ही। ऐसा सोचने के साथ ही मानवी की हँसी निकल गई। पास ही टी वी देखती उसकी 20 साल की बेटी…"
Dec 30, 2021
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय शिज्जु शकूर जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें।सर् की इस्लाह के बाद तो ग़ज़ल सँवर गई। बधाई।"
Dec 28, 2021
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-रख क़दम सँभल के

1121 2122 1121 2122 इस्लाह के बाद ग़ज़ल  1है ये इश्क़ की डगर तू ज़रा रख क़दम सँभल केचला जाएगा वगरना तेरा चैन इस प चल के2न ज़ुबान से मुकरना न क़रार तू भुलानाकि मैं ख़्वाब देखती हूँ तेरे साथ अपने कल के3किया आइना शराफ़त का जो तुमने सम्त मेरीउसे यार देख लेना कभी ख़ुद भी रुख़ बदल के4शब-ए-वस्ल पर न बरसें कहीं सरकशी के बादलतू हवा उड़ा के लेजा ये फ़िराक़ के धुँधलके5नहीं शम्स का उजाला न क़मर की रौशनी हैकहाँ जाएँगे बता हम तेरी बज़्म से निकल के6नहीं रोकना क़दम तू कभी वहशियों से डर करवो रुकेंगे ख़ुद ही "निर्मल"…See More
Dec 22, 2021

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल- भाते हैं कम

212 212 212

1

जाने क्यों इश्क़ के पेच ओ ख़म

ज़ेह्न वालों को भाते हैं कम

2

उनके सर की उठा कर क़सम

हम महब्बत का भरते हैं दम

3

मुस्कुरातीं हैं सब चूड़ियाँ

जब सँवारें वो ज़ुल्फ़ों के ख़म

4

जब जी चाहे बुला लेते हैं

करके पायल की छम-छम सनम

5

होंगे दिन रात मधुमास से

जब भी पहलू में बैठेंगे हम

6

जाएँ जब उनकी आग़ोश में

रौशनी शम्अ की करना कम

7

एक पल में ही मर…

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Posted on January 2, 2022 at 1:01pm — 6 Comments

ग़ज़ल-रख क़दम सँभल के

1121 2122 1121 2122 

इस्लाह के बाद ग़ज़ल

  

1

है ये इश्क़ की डगर तू ज़रा रख क़दम सँभल के

चला जाएगा वगरना तेरा चैन इस प चल के

2

न…

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Posted on December 12, 2021 at 11:00am — 6 Comments

कहो तो सुना दूँ फ़साना किसी का

122 122 122 122 

कहो तो सुना दूँ फ़साना किसी का

वो इज़हार-ए-उल्फ़त जताना किसी का

सुधार

नज़र से महब्बत जताना किसी का

हँसाना किसी का रुलाना किसी का

भुलाओगे कैसे सताना किसी का

नहीं रोक पाई कभी चाहकर मैं

दबे पा ख़यालों में आना किसी का

है यह भी महब्बत का दस्तूर यारो

न दिल भूले जो दिल से जाना किसी का

बहुत कोशिशें कीं मनाने की फ़िर भी

न मुमकिन हुआ लौट आना किसी का

दिल ए…

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Posted on December 9, 2021 at 11:30am — 19 Comments

ग़ज़ल-जय गान पर

2122 2122 2122 212

1

जब भी छाए अब्र मुश्किल के वतन की आन पर

खेले हैं तब तब हमारे तिफ़्ल अपनी जान पर

2

आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर

हो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर

3

हम नहीं होते परेशाँ धर्म से या ज़ात से

ख़ूँ जले अपना तो झूठे और बेईमान पर

4

माना हैं मतभेद भाषा वेष भूषा धर्म में

फ़ख़्र करते हैं प सब भारत के बढ़ते मान पर

5

एक दिन ऐसा भी "निर्मल" देखना तुम…

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Posted on November 1, 2021 at 11:00am — 5 Comments

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