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Rachna Bhatia
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सालिक गणवीर commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादन एक उम्दः ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें"
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी हौसला बढ़ाने के लिए आभार। आदरणीय बहुत ध्यान रखती हूँ फिर भी नुक़्ते कहीं न कहीं रह जाते हैं। मैं सुधार कर लेती हूँ। आभार।"
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब।सर् हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रिय:।सर् फेयर में आपके कहे अनुसार सुधार कर लिया है। सादर"
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'एक बेहिस को दिल दिया हमने कह के अपना उसे ख़ुदा हमने' मतले के ऊला को सानी और सानी को ऊला कर लें । खफ़ा--"ख़फ़ा""
Wednesday
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"नमन, आदेरया, ग़ज़ल का मजमून निश्चय ही प्रशंसनीय है, उसके लिए आप बधाई की पात्र है ंं!  लेकिन मुझे ख़ुदा, खफ़ा और ख़शियों पर नुक़तेओ लगाए जाने को लेकर संदेह है! सादर.. "
Jul 16
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार।"
Jul 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आ. रचना बहन, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 16
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-दिल दिया हमने

2122 1212 221एक बेहिस को दिल दिया हमनेकह के अपना उसे ख़ुदा हमने2रहके तुमसे खफ़ा खफ़ा हमनेख़ुद को बर्बाद कर लिया हमने3हाथ बादल के भेज दीं ख़ुशियाँढ़ूँढ कर आपका पता हमने4सारा इल्ज़ाम अपने सर ले करकह लिया ख़ुद को बेवफ़ा हमने5जब हो फ़ुर्सत तभी चले आनारख दिया दिल का दर खुला हमने6भूल कर एक एक याद तेरीबोझ दिल से हटा लिया हमने7फ़ासला और बढ़ गया यारोपूछा जब उनसे फ़ैसला हमनेमौलिक व अप्रकाशित See More
Jul 15
Rachna Bhatia commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता होना नहीं पर दानवों की बात सुन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई नमस्कार। सर् की इस्लाह के बाद बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई।"
Jul 7
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"जी सर्,  बहुत ख़ूबसूरत ऊला कर दिया आपने।  बेहद शुक्रियः सर्। मूल शेर में सुधार कर लेती हूँ"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"सर् बार बार तंग कर रही हूँ।क्षमा चाहती हूँ चाल बहकी ज़ुल्फ़ें बिखरी सुर्ख़ी होंठों पर सजादेखिए वो चल पङे हैं क़त्ल करने के लिए।  अब ठीक है क्या सादर"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"सर् जी, मूल शेर में ठीक कर लेती हूँ। आभार।"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी,हौसला बढ़ाने के लिए आभार।"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय सालिक गणवीर भाई हौसला बढ़ाने के लिए आभार।"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय संजय शुक्ला जी हौसला बढ़ाने के लिए आभार।"
Jun 26
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब।सर् ग़ज़ल तक आने तथा इस्लाह करने के लिए बेहद शुक्रिय: । सर् ,आशना दिल पर आपने बिल्कुल सहीह कहा है।पूरा शेर लिख लिया था यहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था। पहले आँख बोझिल लिखा था। फिर इसे लिखा। अब कुछ और सोचती हूँ। आपकी पारख़ी नज़र…"
Jun 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल-दिल दिया हमने

2122 1212 22

1

एक बेहिस को दिल दिया हमने

कह के अपना उसे ख़ुदा हमने

2

रहके तुमसे खफ़ा खफ़ा हमने

ख़ुद को बर्बाद कर लिया हमने…

Continue

Posted on July 15, 2021 at 7:12pm — 7 Comments

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

2122 1122 1122 22 /112

1

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

दिल मेरा तोड़ा गया कह के ख़िलौना कल शब

2

ज़ख़्मी दिल पर तेरा जब नाम उकेरा कल शब

हाय रब्बा मेरे तब होंठों से निकला कल शब

3

झूठ की सुब्ह तलक माँग है बाज़ारों में

और मैं एक भी सच बेच न पाया कल शब

4

मेरे हाथों की लकीरें भी बदल जाएँगी

ख़्वाब आँखों ने दिखाया मुझे ऐसा कल शब

5

उस तरफ़ चाँद सितारों की चमक थी "निर्मल"

इस तरफ़ था…

Continue

Posted on April 4, 2021 at 7:00am

ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं

212 1222

1

ज़ार ज़ार रोते हैं

जब वो होश ख़ोते हैं

2

ख़्वान ए इश्क वाले ही

तो फ़कीर होते हैं

3

लोग क्यों अदावत में

हाथ खूँ से धोते हैं

4

डोरी में वो सांसों की

आरज़ू पिरोते हैं

5

चाहतों की गठरी सब

उम्र भर सँजोते हैं

6

क्यों अज़ीज़ अपने ही

अश्कों में डुबोते हैं

7

ख़्वाब देखने वाले

रात भर न सोते हैं

मौलिक व अप्रकाशित

रचना…

Continue

Posted on March 30, 2021 at 8:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल- उफ़ किया न करे

मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212 1122 1212 22

1

जो सह के ज़ुल्म हज़ारों भी उफ़ किया न करे

दुआ करो कि उसे ग़म कोई मिला न करे

2

मुझे बहार की रंगीनियाँ मिलें न मिलें

मगर ख़िज़ा ही रहे उम्र भर ख़ुदा न करे

3

मुझे वो बज़्म में चाहे मिले नहीं खुल कर

मगर मज़ाक में भी ग़ैर तो कहा न करे

4

मैं ज़र्द पत्ते सा घबरा के काँप जाता हूँ

कहे हवा से कोई तेज़ वो चला न करे

5

नशा किसी प महब्बत…

Continue

Posted on March 21, 2021 at 8:30am — 7 Comments

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