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khursheed khairadi
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Latest Activity

रामबली गुप्ता commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"भाई खुर्शीद जी मुग्ध कर दिया आपकी इस शानदार ग़ज़ल ने। मतले से लेकर मक्ते तक हर शैर दमदार है। दिल से बधाई स्वीकार करें।सादर"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"बहुत खूब, आदरणीय खुर्शीद भाई. अव्वल तो मंच पर आपका पुनः स्वागत है. फिर इस गहरी ग़ज़लग़ोई के लिए बधाइयाँ पेश है. रदीफ़ लम्बा हो तो कहन को साधना एक कठिन काम है. लेकिन आपने इस काम को बहुत ही होशियारी से निभाया है. कहन के हिसाब से सभी शेर उम्दा बन पड़े…"
Jul 20

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"वाह्ह्ह बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है मोहतरम जनाब खुर्शीद खैराडी जी शेर दर शेर मुबारक बाद कुबूलें "
Jul 16
KALPANA BHATT commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"वाह वाह बेहद खुबसूरत ग़ज़ल कही है अपने आदरणीय खुर्शीद जी . हार्दिक बधाई आपको ."
Jul 16
narendrasinh chauhan commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"बहुत खूबसूरत "
Jul 15
khursheed khairadi's blog post was featured

ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है

122--122--122--122किसी का कहा मानता ही कहाँ हैवो अपनी ख़ता मानता ही कहाँ हैन काफ़िर कहूँ तो उसे मैं कहूँ क्याहै बुत में ख़ुदा मानता ही कहाँ हैहै छोटी बहुत सोच उसकी करें क्याकिसी को बड़ा मानता ही कहाँ हैशिकायत यही है हर इक आदमी कीमेरी दूसरा मानता ही कहाँ हैमेरे पास हल है, सभी मुश्किलों काकोई मश् वरा मानता ही कहाँ हैलगाना पड़ा झूठ का मुँह पे ग़ाज़ाकि सच आइना मानता ही कहाँ हैभला आदमी है उसे कुछ भी कहदोकिसी का बुरा मानता ही कहाँ हैरक़ीबों के झाँसे में आया है दिलबरमुझे बावफ़ा मानता ही कहाँ हैहुक़ूमत है…See More
Jul 15
Samar kabeer commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"जैसा कि आप जानते हैं ये मंच सीखने सिखाने का मंच है, और आप ही की तरह मैं भी इसी मिटटी से पैदा हुआ हूँ,और आपने जो कहा है उसे मैं समझता हूँ,लेकिन सिखने सिखाने के क्रम में ऐसी जानकारी मंच को देना मैं अपना फ़र्ज़ समझता हूँ सिर्फ़ इसी लिये लिख दिया था ।"
Jul 13
khursheed khairadi joined Admin's group
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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |
Jul 13
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विद्यार्थी कोना

यहाँ युवाओं के शिक्षा, रोजगार इत्यादि विषयों पर जानकारी, परिचर्चा आरम्भ किया जा सकता है |
Jul 13
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हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
Jul 13
khursheed khairadi joined Admin's group
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राजस्थानी साहित्य

इस ग्रुप मे राजस्थानी साहित्य लिखा जा सकता है |
Jul 13
khursheed khairadi commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post रिश्ते में नुकसान जोड़ते पाई पाई------इस्लाह के लिए ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज सर,बहुत ही भावुक और सुन्दर ग़ज़ल हुई है। बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें सर। सादर।"
Jul 13
khursheed khairadi commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)
"आदरणीय गुरप्रीत सर ,उम्दा ग़ज़ल हुई है।दिली मुबारक़बाद क़बूल फर्मावें। सादर।"
Jul 13
khursheed khairadi commented on rajesh kumari's blog post मेरा कच्चा मकान क्या करता (ग़ज़ल 'राज')
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीया राजेश कुमारी जी । दिली मुबारक़बाद। सादर।"
Jul 13
khursheed khairadi commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास - निलेश नूर
"सुन्दर कुण्डलिया आदरणीय नीलेश सर बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर।"
Jul 13
khursheed khairadi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे गाँव में
"आदरणीय बसंत सर सुन्दर ग़ज़ल हुई है ।बहुत बहुत बधाई। सादर"
Jul 13

Profile Information

Gender
Male
City State
jodhpur
Native Place
rawatbhata
Profession
engineering
About me
gazal ka ek navsadhak

Khursheed khairadi's Blog

ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है

122--122--122--122



किसी का कहा मानता ही कहाँ है

वो अपनी ख़ता मानता ही कहाँ है



न काफ़िर कहूँ तो उसे मैं कहूँ क्या

है बुत में ख़ुदा मानता ही कहाँ है



है छोटी बहुत सोच उसकी करें क्या

किसी को बड़ा मानता ही कहाँ है



शिकायत यही है हर इक आदमी की

मेरी दूसरा मानता ही कहाँ है



मेरे पास हल है, सभी मुश्किलों का

कोई मश् वरा मानता ही कहाँ है



लगाना पड़ा झूठ का मुँह पे ग़ाज़ा

कि सच आइना मानता ही कहाँ है



भला आदमी है… Continue

Posted on July 10, 2017 at 9:00pm — 15 Comments

रघुनाथ ..ग़ज़ल 2122—1122—1122—22

2122—1122—1122—22

रूठ मत जाना कभी दीन दयाला मुझसे

रखना रघुनाथ हमेशा यही नाता मुझसे

 

हर मनोरथ हुआ है सिद्ध कृपा से तेरी

तू न होता तो हर इक काम बिगड़ता मुझसे

 

नाव तुमने लगा दी पार वगरना रघुवर

इस भँवर में था बड़ी दूर किनारा मुझसे

 

जैसे शबरी से अहिल्या से निभाया राघव

भक्तवत्सल सदा यूँ प्रेम निभाना मुझसे

 

एक विश्वास तुम्हारा है मुझे रघुनंदन

दूर जाना न कोई करके बहाना मुझसे

 

जानकी नाथ…

Continue

Posted on March 28, 2015 at 11:16pm — 9 Comments

ग़ज़ल ..22 22 22 22 22 2 ....सीला माँ (शीतला माता )

ताप घृणा का शीतल करदे सीला माँ

इस ज्वाला को तू जल करदे सीला माँ

 

इस मन में मद दावानल सा फैला है

करुणा-नद की कलकल करदे सीला माँ

 

सूख गया है नेह ह्रदय का ईर्ष्या से

इस काँटे को कोंपल करदे सीला माँ

 

प्यास लबों पर अंगारे सी दहके है

हर पत्थर को छागल करदे सीला माँ

 

सूरज सर पर तपता है दोपहरी में

सर पर अपना करतल करदे सीला माँ

 

दूध दही हो जाता है शीतलता से

भाप जमा कर बादल करदे सीला…

Continue

Posted on March 13, 2015 at 11:13am — 15 Comments

गीतिका8+8....बरगद पीपल

बरगद पीपल पनघट छूटे 

बालसखा सब नटखट छूटे 

गोपालों की शोख़ ठिठोली 

चौपालों के जमघट छूटे 

बालू के वो दुर्ग महल सब 

तालाबों के वो तट छूटे 

झालर संझा वो चरणामृत 

मंदिर के चौड़े पट छूटे 

मॉलों में क्या कूके कोयल 

अमराई के झुरमुट छूटे

 

धूम कहाँ वो बचपन वाली 

टोली के सब मर्कट छूटे 

हमसे छूटा  गाँव हमारा 

जीने का अब जीवट छूटे

मौलिक व अप्रकाशित  

Posted on March 12, 2015 at 12:32pm — 22 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 9:09am on June 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

आदरणीय खुर्शीद सर जन्मदिवस पर आपको हृदयतल से अपार बधाई!

At 11:38am on February 23, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय खुर्शीद जी मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया करती हूँ , जो आप भी मेरी इस उपलब्धि के भागीदार बने आशा है की आप इसी प्रकार सहयोग देते रहेंगे और मुझे मार्गदर्शित करेंगे , सादर आभार । 

At 11:15pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय खुर्शीद सर, आपका स्नेह और सहयोग सदा मिलता रहा है. आपने इस बधाई सन्देश ने मेरा जो मान बढ़ाया है उसके लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ. मेरी रचनाएँ आपको पसंद आती है ये सौभाग्य है मेरा... लेकिन सच तो ये है कि मैं तो आपकी ग़ज़लों का दीवाना हूँ. सोचता हूँ आप जैसी उम्दा गज़लें कह सकूं. 

At 6:37pm on October 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय खुर्शीद जी

आपकी सक्रियता के हम सभी साक्षी है  और पुरुस्कार इसका प्रमाण है i बहुत-बहुत मुबारक i

At 12:05pm on October 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी,
सादर अभिवादन,

यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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