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khursheed khairadi
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SALIM RAZA REWA commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम-पचीसी-भाग 4 (प्रीत-पगे दोहे)
"जनाब खुर्शीद भाई साहब खूबसूरत दोहों के लिए मुबारक़बाद"
Sep 10
Samar kabeer commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम-पचीसी-भाग 4 (प्रीत-पगे दोहे)
"जनाब ख़ुर्शीद खैराड़ी जी आदाब,प्रेम-पचीसी भाग 4 भी बहुत उम्दा है, बधाई स्वीकार करें । बात प्रेम की हो रही है तो एक निवेदन करूँगा आपसे कि मंच के प्रति भी अपना प्रेम ज़ाहिर करें,और अपनी सक्रियता सिर्फ़ रचना पोस्ट करने तक ही सीमित न रखें,पिछली तीन…"
Sep 7
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Sep 7
khursheed khairadi posted blog posts
Sep 7
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम-पचीसी-भाग 5 (प्रीत-पगे दोहे)
"वाह वाह आदरणीय बहुत सुन्दर दोहे हुए..प्रेम रस से परिपूर्ण..उत्तम"
Sep 7
khursheed khairadi commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"आदरणीय सौरभ सर आपका आशीर्वाद एवम् मार्गदर्शन ही मेरे पथ का पाथेय है। ओ बी ओ मंच का प्रेम मेरी लेखनी का संबल है। आदरणीय गजेन्द्र सर,लक्ष्मण सर,समर सर,आरिफ़ साहब् ,सुशील सर आप सभी का सादर आभार।"
Sep 7
Gajendra shrotriya commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"आ० खुर्शीद खेराड़ी साहब सादर अभिवादन। प्रेमपचीसी की ये तीसरी किश्त भी पहली और दूसरी की तरह ही प्रेमरस से सिक्त है योग,वियोग,करूणा,समर्पण और अध्यात्म के विभिन्न रंग बिखेर दिए हैं आपने। काबिले-तारीफ काम है आपका। उम्मीद है प्रेमपचीसी की ये श्रंखला अनवरत…"
Sep 6
vijay nikore commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)
"बहुत ही सुन्दर दोहे।"
Sep 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"अनुपम दोहावली । हार्दिक बधाई ।"
Sep 5
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Sep 5
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Sep 5
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Sep 5
Samar kabeer commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"जनाब ख़ुर्शीद खैराड़ी साहिब आदाब,भाग 3 भी बहुत ख़ूब और लाजवाब दोहे,इस प्रस्तुति पर भी दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 5
Sushil Sarna commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"वाह आदरणीय खुर्शीद साहिब वाह। . प्रेम पचीसी का हर दोहा प्रेम की दिलकश तस्वीर पेश करता है।  हर दोहा अनमोल है।  इस दिलकश प्रस्तुती के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें सर। "
Sep 5

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)
"अद्भुत ! अद्भुत !! .. हीरे की एक-एक कनी सवा लाख की.. !!  इस भाव-निवेदन की एक लम्बी परम्परा रही है..  तुम तरुवर मैं पात रे.. की शैली में स्वयं के सर्वस्व को उड़ेल देने की ललक को सदियों मान मिलता रहा है. यही द्वैत के मूल में भी है.…"
Sep 5

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on khursheed khairadi's blog post प्रेम पचीसी --भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)
"प्रवणता के जिस विन्दु पर इन भावों का शब्दांकन हुआ है, वह बहुत कुछ कहने के लिए प्रेरित कर रहा है. कई ऐसे दोहे हैं जिनके कथ्य रोचक तो हैं ही, अभिनव भी हैं. पहला दोहा ही इस कड़ी का सर्वोत्तम दोहा बन पड़ा है.  लेकिन जिस तथ्य की ओर मेरी दृष्टि विशेष…"
Sep 5

Profile Information

Gender
Male
City State
jodhpur
Native Place
rawatbhata
Profession
engineering
About me
gazal ka ek navsadhak

Khursheed khairadi's Blog

प्रेम-पचीसी-भाग 4 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग 4(प्रीत-पगे दोहे)



पाप कहूँ किसको भला, किसको समझूँ पुन्न ।

मैं जानूँ इतनी गणित, तुम बिन जीवन सुन्न ।। ...1



तुम मोहन की बाँसुरी, मैं राधा का हास ।

साथ तुम्हारा जब मिले, जीवन हो इक रास ।। ...2



दर्शन दे दो साँवरे, तरस रहे हैं नैन ।

मर जाऊँ मैं चैन से, जीती हूँ बेचैन ।।...3



सुध-बुध जी की खो गई, जबसे लागा हेत ।

मैं इक मछली साँवरे, विरहा तपती रेत ।।...4



बरजा तो माना नहीं, अब रोवे दिन-रैन ।

नैन मिलाकर खो… Continue

Posted on September 7, 2017 at 12:48pm — 3 Comments

प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग-3 (प्रीत-पगे दोहे)

दाँत दुखे तो पाड़ दूँ, आँख दुखे दूँ फोड़ ।

घायल मन की पीर का, पास पिया के तोड़ ।। ...1



झाल बदन में उठ रही, जबसे लागी लाग ।

सावन बरसे नैन से, बुझे न फिर भी आग ।। ...2



होना था सो हो गया, अब तो करो उपाय ।

बाहर-भीतर आग है, पीड़ा सही न जाय ।। ...3



रोग लगा सो लग गया, छोड़ो सोच-विचार ।

अंग-अंग काटो भले, ढूँढ़ों कुछ उपचार ।। ...4



ज्यों-ज्यों करती हूँ दवा, त्यों-त्यों बढ़ता रोग ।

बैद बनो तुम साँवरे, कब… Continue

Posted on September 5, 2017 at 12:53pm — 7 Comments

प्रेम पचीसी --भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)

कौन रसायन बह रहा, रग-रग फैली आग ।

स्त्राव हुआ किस ग्रन्थि से, धड़कन गाए राग ।। ...1



दर्पण देखूँ सौ दफ़ा, फिर-फिर बाँछूँ बाल ।

सूरत अपनी देखकर, गाल हुए हैं लाल ।। ...2



मैं मछली सी हो गयी, सागर तेरा ध्यान ।

बाहर निकसूँ तो चली, जाए मेरी जान ।। ... 3



जित देखूँ उत साँवरे, दिखे तिहारा रूप ।

अंधी होकर प्रेम में, पाए नैन अनूप ।। ...4



लज़्ज़त तेरी दीद की, याद मुझे है यार ।

दीदों से आँसू नहीं, टपक… Continue

Posted on September 2, 2017 at 6:03am — 6 Comments

प्रेम पचीसी(दोहे)

प्रीत-पगे दोहे (प्रेम-पचीसी)

मुझको मुझसे छीनकर, बनते हो अनजान ।

निर्मोही तुमको कहूँ, या समझूँ नादान ।। ... 1



झरना साजन तुम भए, मैं जन्मों की प्यास ।

पीकर भी प्यासी मरुँ, रहता कंठ उदास ।। ... 2



प्रीत छुपाऊँ किस तरह, कैसे ढाँकूँ लाज ।

फूलों से छुपता नहीं, काँटों का यह ताज ।। ... 3



तुम सावन के मेघ हो, मैं मरुधर की रेत ।

जा बरसे हो बाग़ में, कैसे पनपे हेत ।। ... 4



संग तुम्हारे जो कटा, वो पल है अनमोल ।

तुम बिन सूना जो रहा, वो… Continue

Posted on August 31, 2017 at 11:45am — 5 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 9:09am on June 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

आदरणीय खुर्शीद सर जन्मदिवस पर आपको हृदयतल से अपार बधाई!

At 11:38am on February 23, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय खुर्शीद जी मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया करती हूँ , जो आप भी मेरी इस उपलब्धि के भागीदार बने आशा है की आप इसी प्रकार सहयोग देते रहेंगे और मुझे मार्गदर्शित करेंगे , सादर आभार । 

At 11:15pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय खुर्शीद सर, आपका स्नेह और सहयोग सदा मिलता रहा है. आपने इस बधाई सन्देश ने मेरा जो मान बढ़ाया है उसके लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ. मेरी रचनाएँ आपको पसंद आती है ये सौभाग्य है मेरा... लेकिन सच तो ये है कि मैं तो आपकी ग़ज़लों का दीवाना हूँ. सोचता हूँ आप जैसी उम्दा गज़लें कह सकूं. 

At 6:37pm on October 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय खुर्शीद जी

आपकी सक्रियता के हम सभी साक्षी है  और पुरुस्कार इसका प्रमाण है i बहुत-बहुत मुबारक i

At 12:05pm on October 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी,
सादर अभिवादन,

यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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