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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"प्रिय भाई मनोज एहसास जी सादर नमस्कार शानदार ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. दिल में कोई भीड़ सलामत है लेकिन तेरा चेहरा साफ नहीं दिख पाता है...... वा"
May 30
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'लाख कोशिशें कर के माना है हमनें ये मिसरा बह्र में नहीं,देखियेगा।"
May 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"जनाब, मनोज कुमार 'अह्सास' जी, आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें। मेरा इस बह्र से साबक़ा नहीं पड़ा है। बहरहाल इस बह्र में "लाख कोशिशें कर के माना है हमनें" मिसरा बह्र में नहीं है। सादर। "
May 30
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2अपने ही पापों से मन घबराता हैसीने में इक अपराधों का खाता हैलाचारी से कुछ भारी है मजबूरी आँखों में ताकत है देख न पाता हैउसकी मजबूरी समझूँ या अपना दुखगुलशन से सहरा में कोई आता है?लाख कोशिशें कर के माना है हमनेंजो होना है आखिर वो हो जाता हैदिल मे कोई भीड़ सलामत है लेकिनतेरा चेहरा साफ नहीं दिख पाता हैक्या जाने अफसाना है या सच कोईआखिर में जो सच की जीत बताता हैढलता है जब सूरज अपनी भी छत परतब जग का अंधियार समझ में आता हैमौलिक और अप्रकाशितSee More
May 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आदरणीय सालिक गनवीर एवम आदरणीय मुसाफ़िर जी ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
May 15
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब हार्दिक आभार आपकी इस्लाह पर गौर कर रहा हूँ नुक्ते लगाने के प्रयास भी कर रहा हूँ आपकी आशाओं पर खरा उतरने का प्रयास कर रहा हूँ"
May 15
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'जोड़ कर रखा था नाता जिनसे सालों साल तक' ये मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है, 'रखा' को "रक्खा" कर लें । एक बात बार बार से कह चुका हूँ, आज फिर कहता हूँ…"
May 15
सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"भाई मनोज अहसास आदाब एक शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें."
May 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 15
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"ग़ज़ल में उपस्थिति देकर हौसला अफजाई करने वाले तमामं आदरणीय गुणी जनों का हार्दिक आभार सादर"
May 14
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2122     2122     2122     212एक ताज़ा ग़ज़लतेरी चौखट तक पहुँचने के हैं अब आसार कम. फासला लंबा बहुत है या मेरी रफ्तार कम.कौन से रस्ते पे चलके मैं चला जाऊं कहाँ, डर बहकने का है दिलबर हौसला इस बार कम.हद से ज्यादा बेबसी है पर इरादे बेहिसाब, हमसफर तो मिल गए हैं मिलते हैं गमख़ार कम.घर पहुँचने की तड़प में इस सफर में जाने जां,रोटिया दिलकश अधिक है और तेरे रुखसार कम.जोड़ कर रखा था नाता जिनसे सालों साल तक, उनकी नज़रों में मिला है प्यार का व्यवहार कम.दोपहर की धूप से जब तिलमिला उठता हूं मैं, लगने लगता है मुझे…See More
May 14
सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"मनोज भाई, लाजवाब ग़ज़ल के लिए बधाइयाँँ."
Apr 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 25
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आद0 मनोज जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Apr 25
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"सभी अशआर लाजवाब  हुए हैं कमाल की ग़ज़ल | "
Apr 24
TEJ VEER SINGH commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास जी। बेहतरीन गज़ल। बेकार सर खपाने की आदत का क्या करें,कोई नया ख्याल मयस्सर हुआ नहीं।"
Apr 24

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2

अपने ही पापों से मन घबराता है

सीने में इक अपराधों का खाता है

लाचारी से कुछ भारी है मजबूरी

आँखों में ताकत है देख न पाता है

उसकी मजबूरी समझूँ या अपना दुख

गुलशन से सहरा में कोई आता है?

लाख कोशिशें कर के माना है हमनें

जो होना है आखिर वो हो जाता है

दिल मे कोई भीड़ सलामत है लेकिन

तेरा चेहरा साफ नहीं दिख पाता है

क्या जाने अफसाना है या सच कोई

आखिर में जो सच की जीत बताता है

ढलता है जब सूरज अपनी भी…

Continue

Posted on May 29, 2020 at 12:35pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2122     2122     2122     212

एक ताज़ा ग़ज़ल

तेरी चौखट तक पहुँचने के हैं अब आसार कम.

फासला लंबा बहुत है या मेरी रफ्तार कम.

कौन से रस्ते पे चलके मैं चला जाऊं कहाँ,

डर बहकने का है दिलबर हौसला इस बार कम.

हद से ज्यादा बेबसी है पर इरादे बेहिसाब,

हमसफर तो मिल गए हैं मिलते हैं गमख़ार कम.

घर पहुँचने की तड़प में इस सफर में जाने जां,

रोटिया दिलकश अधिक है और तेरे रुखसार कम.

जोड़ कर रखा था नाता…

Continue

Posted on May 14, 2020 at 12:22am — 5 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

221   2121   1221    212

वो मेरी ज़िन्दगी है उसे ये पता नहीं,

मैंने सलीके से ही यकीनन कहा नहीं।

ऐसा कोई कोई है ज़माने में दोस्तो,

जो आने वाले कल की कभी सोचता नहीं।

सब अपनी अपनी धुन में बताते हैं उसकी बात,

वो कैसा है, कहाँ है,किसी को पता नहीं।

मजबूरियां हमारी हमारा नसीब है,

चलने की आरज़ू है मगर रास्ता नहीं।

बेकार सर खपाने की आदत का क्या करें,

कोई नया ख्याल मयस्सर हुआ नहीं।

हर फूल को बिछड़ना है डाली से एक दिन, …

Continue

Posted on April 23, 2020 at 10:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

221   2121   1221   212

आँखों में बेबसी है दिलों में उबाल है.

कैसा फरेबी वक्त है चलना मुहाल है.

जो हर घड़ी करीब हैं उनका नहीं ख़्याल,

जो बस ख़्याल में है उसी का ख़्याल है.

रहता हूं जब उदास किसी बात के बिना,

तब खुद से पूछना है जो वो क्या सवाल है

.

पहुँचें हैं जिस मकाम पर उससे गिला हो क्या,

बस रास्तों की याद का दिल में मलाल है.

कुछ लोग बदहवास हैं सोने के भाव से,

कुछ लोग मुतमईन हैं रोटी है दाल…

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Posted on April 14, 2020 at 11:59pm — 7 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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