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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय एवम आदरणीया साथियों का हार्दिक आभार सादर"
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब मनोज जी।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jul 30
Dimple Sharma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212.अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें. किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस, चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही, रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा, रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस गया, अपने रिश्तों की ख़ुशी को क्या करें क्या ना करें.रूठ जाने के लिए उनके बहाने बेशुमार, हम मनाने के लिए उनसे…See More
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय रवि शुक्ला जी ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार सादर"
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय अमीर साहब  सुझाव के लिए हार्दिक आभार सादर"
Jul 29
Ravi Shukla commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अह्सास जी , अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। कुछ तो सोचा होगा उसने दुनिया देख रहा है जो  आप भले कह लें उसको ये ज़ालिम है भागवान बहुत "
Jul 21
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"जनाब मनोज अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। उर्दू के लफ़्ज़ों ज़्यादा, ज़ालिम में नुक़्ता लगा लें। सादर। "
Jul 21
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15इतने दिन तक साथ निभाया उतना ही अहसान बहुत.दिल का क्या है, ख़ाली घर था, थे इसमें अरमान बहुत.हैरानी से पूछ रहा था इक बच्चा नादान बहुत,गर्मी के मौसम में ही क्यों आते हैं तूफान बहुत.हद से ज्यादा देखभाल का कोई लाभ नहीं पाया,मेरे हाथों मेरे घर का टूट गया सामान बहुत.ऐसे ऐसे मोड़ हमारे रस्ते में आये यारो,जिनमें फंसकर लगने लगा था जालिम है भगवान बहुत.फिर इक दिन वो मुझसे मिलकर दिल की बात बताएंगे,इस आशा में काट रहा हूँ जीवन पथ सुनसान बहुत.सीधी-सादी बात यहाँ पर समझ नहीं पाता कोई, और तसल्ली देते सबको…See More
Jul 19
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो// मेरे समझ से यह ऐसे होना चाहिए "मिल ले तू इक बार अगर मिल सकते हो" इसी तरह कुछ और भी देखियेगा... बहरहाल बधाई स्वीकार कीजिये"
Jul 11
रामबली गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मनोज जी ग़ज़ल पर प्रयास के लिए बधाई स्वीकारें।कुछ बाते- मिल सकता हो>मिल सकना हो कोई कह सकता हो<कोई कह सकता है आगे कुछ खतरा हो<आगे कुछ खतरा है चुन सकता हो<चुन सकता है जरा देखें इन कथ्यों को"
Jul 7
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास

22  22   22  22  22  2मेरे दिल का बोझ किसी दिन हल्का हो. मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो.मुझको लगता है तू मुझको भूल गया,तेरे मन में भी शायद कुछ धोखा हो.तेज तपन के साथ है सूरज अब सर पर,मेरी दुआ है तेरे सर पर कपड़ा हो.मैं तुझको खुद में शामिल कैसे रक्खूँ,तेरे नाम के आगे जब कुछ लिक्खा हो.अब तो अपनेपन की तुझमें बात नहीं, शायद तू अब मुझको ग़ैर समझता हो.छोटी सी एक बात बतानी थी तुझको,पढ़ लेना गर पास कोई ख़त रक्खा हो.जितना मैंने कहा है तुझको ग़ज़लों में, इससे ज्यादा क्या कोई कह सकता हो.मंज़िल उसको कभी नहीं…See More
Jul 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय अमीर साहब गजल पर ध्यान देने के लिए बहुत-बहुत आभार आपका सुझाव उत्तम है तुरंत पालन किया जा रहा है सादर"
Jul 5

Profile Information

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Male
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saharanpur uttarpradesh
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India
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Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212

.

अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें.

किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.

अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस,

चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.

ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही,

रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.

दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा,

रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.

सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस…

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Posted on July 29, 2020 at 1:30am — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15

इतने दिन तक साथ निभाया उतना ही अहसान बहुत.

दिल का क्या है, ख़ाली घर था, थे इसमें अरमान बहुत.

हैरानी से पूछ रहा था इक बच्चा नादान बहुत,

गर्मी के मौसम में ही क्यों आते हैं तूफान बहुत.

हद से ज्यादा देखभाल का कोई लाभ नहीं पाया,

मेरे हाथों मेरे घर का टूट गया सामान बहुत.

ऐसे ऐसे मोड़ हमारे रस्ते में आये यारो,

जिनमें फंसकर लगने लगा था जालिम है भगवान बहुत.

फिर इक दिन वो मुझसे मिलकर दिल की बात…

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Posted on July 18, 2020 at 11:50pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास

22  22   22  22  22  2

मेरे दिल का बोझ किसी दिन हल्का हो.

मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो.

मुझको लगता है तू मुझको भूल गया,

तेरे मन में भी शायद कुछ धोखा हो.

तेज तपन के साथ है सूरज अब सर पर,

मेरी दुआ है तेरे सर पर कपड़ा हो.

मैं तुझको खुद में शामिल कैसे रक्खूँ,

तेरे नाम के आगे जब कुछ लिक्खा हो.

अब तो अपनेपन की तुझमें बात नहीं,

शायद तू अब मुझको ग़ैर समझता हो.

छोटी सी एक बात बतानी थी…

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Posted on July 5, 2020 at 4:35pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222  1222  122

ज़माने भर में जितने हादसे हैं.

हमें ख़ामोश होकर देखने हैं.

किसी को चलने में दिक़्क़त न आए,

चलो इतना सिमट कर बैठते हैं.

मेरी बेबाकियों के रास्ते में,

मेरी कुछ ख़्वाहिशों के कटघरे हैं.

बिना जिसके हुआ था जीना मुश्किल,

उसी के होने से शिकवे गिले हैं.

तुम्हारी याद भी इक रोग है क्या,

तुम्हारे ख़त को छूते डर रहे हैं.

दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,

वो अपनी बात कह कर जा चुके…

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Posted on July 3, 2020 at 8:55pm — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
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शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
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