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नयना(आरती)कानिटकर
  • Female
  • Bhopal,madhya pradesh
  • India
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नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"कम शब्दों मे अच्छी लघुकथा . बधाइ आपको"
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आभार दीपा जी"
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"धन्यवाद सर "
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"विषयांतर्गत  बहुत बढिया रचना . नयी पिढी अब अपनी मा से खुलकर बात करने लगी है. उम्र क ये दौर सभी के बीच से गुजरत है जब किसी के साथ आकर्शन महसूस होता है और तभी संस्कारो की दोर का मजबूत होना बहुत जरुरी है , रचन मे माँ ने अच्ची सीख दी है कि…"
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"क्षमा मै  कथ को समझने मे असमर्थ रही. बहरहाल सहभगित की बधाई "
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"  संस्मरण की और झुकती लघुकथा . गतिविधियों में भाग नहीं लिया फिर भी देश के सैनिको के प्रति आदर का अहसास को परिभाषित कर रहा . अंतिम कालखंड में शिक्षक की कक्षा में उपस्थिति ...??. कैप को टोपी भी लिखा जा सकता है . बधाई आपको"
Apr 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"  भूख -  सुभद्रा मेरी  पत्नी पिछले एक -डेढ़  सप्ताह से आईसीयू में हैं,  वृद्धावस्था ,पुराना  मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। मैं घर पर अकेला ही हूँ  , अपने आप को काफी थका सा महसूस  कर रहा…"
Apr 29
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-84
"  "मृत शरीर " वह दरवाजा खोलकर अंदर दाखल हुआ . स्नेहा उसे कही दिखाई नहीं दी . उसने आवाज भी लगाईं पर ....होगी शायद अंदर वाले कमरे या वाशरूम में . आ जाएगीं ये सोचकर वो सोफे पर बैठ गया . तभी उसका ध्यान टेबल पर पडी अधखुली डायरी पर गया .…"
Mar 30
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-136
"बहुत-बहुत ही खूब दोहे कहे है आपने अनुभव देत मिठास का, प्रेम हुआ जो प्राप्त।नीम करेला वह लगे, असमय अगर समाप्त।---वाह वाह"
Feb 13
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-136
"बहुत बहुत धन्यवाद दीदी--आपके सुझावो की हमेशा प्रतिक्षा रहती है"
Feb 13
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-136
"आ.प्रतिभा दी , बहुत ही खास दोहे कहे आपने मुझे ये बहुत ही पसन्द अया कभी प्यार नमकीन है, कभी मधुर सी प्यास। रहे साथ तो आम है, दूर रहे तो खास।।-----वस्तविकता है कुछ दूरी जरुरी है कभी-कभी प्यार को समझने के लिए मैं पतझड़ की शुष्कता, तुम बासंती…"
Feb 13
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-136
"निष्ठुर नयन है थके थके सेस्वर  नही निकल रहे मुख सेजलती बाती सा मन मंदिरसुनो!इस बसंत जब आनापलाश बनकर आना अनकहे शब्द व चुप सी बातेंकुछ स्मृतियों की याद दिलातेउदास चुपसा है मन मंदिरसुनो!इस बसंत जब आनापलाश बनकर आना चंद्रमा झाँक रहा खिड़की सेद्वार पर…"
Feb 13
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"बहुत उत्कृष्ठ लघुकथा प्रतिभा जी. कहने को आप ने कुछ छोडा ही नही.बहुत बहुत बधाइ"
Dec 31, 2021
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"आदरणीय योगराज भाइ  सादर अभिवादन। लंबे अर्से के बाद आयोजन में आपकी उपस्थिति  ने मुझे  व्यव्सायिक व्यतता (आज अन्तिम तिथी)  मे भी लिखने को प्रेरित किया और थोडा स समय चुराकर मै रचना लिख गयी. निसन्देह ये अभी बहुत  काम और सम्पादन,…"
Dec 31, 2021
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"    --धागा -- निर्णय उनके पक्ष में हुआ है ये सोचकर दोनों पक्षों के वकील बहुत खुश थे । जिस   ख़ास  मित्र  को लगता था हमें अलग हो जाना चाहिए वो भी बड़ी खुश  किन्तु हम दोनों के माता -पिता के आँखों में मिश्र भाव थे…"
Dec 30, 2021
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" हीरक जयंती अंक-75 (विषय मुक्त)
"आभार उस्मानी जी. शीर्षक में ** नही लगाया जाता. इस नियम का मुझे पता नहीं था. मंच से इस हेतु क्षमापार्थी हूँ.एक टंकण त्रुटि रह गई - /नौकर दो कप रखा (रख) गया/--- ओह!  ठीक करती हूँ सर"
Jun 30, 2021

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Gender
Female
City State
Bhopal
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BHopal
Profession
S.A
About me
i try to learn every thing which possible for me.taking interest in reading & writing

नयना(आरती)कानिटकर's Blog

"किनारा "

मानो उन्हें  किसी की  प्रतीक्षा थी . उनका मन कुछ बैचैन हो रहा था ,वे अंदर ही अंदर कुछ असहाय सा महसूस कर रहे थे .हाथ पीछे की ओर बांधे वे द्वार पर आकर खड़े हो गए  तभी उनकी नजर सामने की और गई .वो धीमे-धीमे  चलकर  वह आती हुई कुछ दूरी पर खड़ी हो गई . दोनों ने एक दूसरे को देखा .

"तुम ? मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा .कितना बदल गई हो ,ये सफेद केश , ये कृश काया..." वे बोले 

"फिर तुमने मुझे पहचाना कैसे ?" उसका प्रतिप्रश्न 

" तुम्हारी हँसी का वो नूर, चहरे की निश्चलता आज भी वैसी ही है…

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Posted on March 19, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

साक्षात्कार

उत्कर्षा का सारा शरीर थककर चूर हो चुका था कब नींद के आगोश में चली गयी पता ही नहीं चला ।



"हे ईश्वर ये किस पाप की सजा दी है तूने ये जन्म देकर जहाँ दो घड़ी का चैन नहीं ।"



"ऐसा क्यों कहती हो ,सतत कर्मशीलता ही तो भरी है मैंने तुम्हारी पेशियों में . क्या गलत किया?"



"प्रभु ! मैं भी कोई मशीन तो नहीं हूँ की ये सतत परिश्रमशीलता.."



"जानता हूँ ये सब सोचकर ही मैंने तुम्हें अष्टभुजा का प्रतिक रूप दिया है।"



"अष्टभुजा??? या कि...सारा श्रेय तो ..किंतु…

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Posted on May 8, 2020 at 7:52pm — 2 Comments

"मैं आ रही हूँ माँ....."

"मैं आ रही हूँ माँ..."

कितनी बार कहा था माँ ने "बेटा! बस एक बार तुम ग्रेजुएट हो जाओ फिर जहाँ भी किस्मत आजमाना चाहोगी तुम्हें रोकूँगी नही। ये पूरा का पूरा आकाश तुम्हारा हैं।" किंतु तब मैंने उनकी बातों को यूंही हवा में उड़ा दिया था।

संयुक्त परिवार में घर की सबसे खूबसूरत बेटी थी वह। बस! यही ज़रूर उसे ले डूबेगा कहाँ जानती थी। बारहवी के बाद ही अपनी रिश्तेदार के घर इस नगरी में आयी तो वापस लौटी ही नहीं कभी। माँ समझा-बुझाकर ले जाने आई थी उसे तब उन्हें…

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Posted on March 14, 2020 at 4:00pm — 1 Comment

मैं और मेरा मन

पहन रखा हैं 

मैने गले में, एक

गुलाबी चमक युक्त

बडा सा मोती

जिसकी आभा से दमकता हैं      

मेरा मुखमंडल 

मैं भी घूमती हूँ  इतराती हुई

उसके नभमंडल में…

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Posted on June 20, 2019 at 10:00am — 5 Comments

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At 7:45pm on November 30, 2017, डॉ छोटेलाल सिंह said…
आदरणीया नयना जी आपने लघुकथा के माध्यम से जो चित्र खींचा वह मर्मस्पर्शी है बहुत ही रोचक और प्रभावकारी है बहुत बहुत मुबारकबाद इस महान उपलब्धि के लिए
At 2:01pm on September 3, 2013, annapurna bajpai said…

welcome ,Nayana ji in our O B O family . 

 
 
 

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"वैसे दूसरा शेर बेहतर हो सकता है।"
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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
yesterday

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