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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय विवेक पांडेय जी दर्पण साफ करें सब अपना,बड़ी ऊंची बात की है, परहित मन्त्र ही सबको आगे ले जा सकता है, बहुत बढ़िया रचना बधाई हो।"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीया डॉ प्राची जी छायावाद की झलक इस कविता में चार चाँद लगा रही,बहुत ही बेहतरीन रचना है, इस रचना में हृदय के भाव झंकृत हुए हैं, दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय गंगाधर शर्मा जी चंद शब्दों में आपने बहुत बड़ी बात पिरो दिया,अर्थात गागर में सागर भर दिया, बहुत बहुत बधाई"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय राणा जी बहुत ही बेहतरीन भावो को समेटे इस सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"इंसानियत को प्यार मुश्किल,वाह वाह बहुत ही यथार्थ पूर्ण मार्मिकता से ओतप्रोत सुंदर रचना के लिए बधाई"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर अभिवादन, बहुत ही जीवन्त रचना ,जीवन की सच्चाई को बयां करती इस धारदार रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jun 14
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"हम और हमारे हम और हमारे मिल करकेसुख सरिता आज बहाएंगे।ये मोम पाश कर खण्ड-खण्डकरुणामय भाव जगायेंगे।। अभिशाप विश्व में कहीं न होमिल प्रेम सुधा बरसाएंगे।क्रंदन करते हर होंठों परमधु हास सदा सरसाएंगे।। मिल श्रम प्रसूति से भेद मिटामानवता को…"
Jun 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 5
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post "लोग"
"आदरणीया अन्विता जी ऐसी रचनाये बहुत कम देखने को मिलती हैं हमे कुछ पल के लिए लग रहा था मुक्तिबोध को पढ़ रहा हूँ, बहुत ही शानदार रचना दिल से बधाई"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on amita tiwari's blog post दिन दीन हो चला
"आदरणीया अमिता जी बहुत ही अच्छी रचना है, आज मजदूरों की भावनाओं को समझने वाले कम हैं, सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post दर्द
"आदरणीय अवनीश जी विल्कुल यथार्थ चित्रण किया है बहुत बहुत बधाई"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"आदरणीय रूपम जी बहुत अच्छी गजल हुई ,दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही अच्छी रचना हुई कितनी भी प्रशंसा की जाय कम है दिल से बधाई"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post जीवन पर कुछ दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी जीवन की सच्चाई को आपने दोहे में उकेरा है ,सच मे एक पृष्ठ पर जीत और एक पर हार, बहुत बढ़िया लिखा आपने दिल से बधाई कुबूल कीजिए"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से लेखनी सफल हुई आपका बहुत बहुत आभार"
Jun 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हुआ आपका दिल से आभार"
Jun 4

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Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Posted on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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