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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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"आदरणीय चेतन प्रकाश जी चित्रानुरूप बहुत ही सुंदर लेखनी सादर शुभकामनाएं"
Nov 21
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"चित्रानुरूप आकर्षक रचना के लिए सादर शुभकामनाएं"
Nov 21
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"चित्रानुरूप बहुत ही बेहतरीन रचना के लिए सादर शुभकामनाएं"
Nov 21
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"सादर आभार आदरणीय"
Nov 21
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"सादर आभार आदरणीया दीपांजलि जी"
Nov 21
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"शक्ति छंद नयापन ग्रसित कर रहा मर्म कोभुलाने लगे लोग निज धर्म कोजिये जा रहे हैं मनुज स्वार्थ मेंलगाने लगे दाग परमार्थ में।। न सद्भाव दिल में न कोई दयाबड़े बेरहम हैं न शर्मों हयाचलाती हुई फोन तल्लीन हैंसभी युवतियाँ बैठ लवलीन हैं।। जमी पर लिए लाल को…"
Nov 20
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"चित्रानुरूप सुंदर सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय अशोक रक्ताले साहब जी"
Nov 20
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"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हो गया आपके सुझाव को सादर स्वीकार कर रहा हूँ आपका दिल से बहुत बहुत आभार"
Oct 24
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"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी बहुत ही सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Oct 24
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"आदरणीया दीपांजलि दुबे जी विषयानुरूप आकर्षक रचना के लिए सादर शुभकामनाएं"
Oct 24
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"आदरणीया प्रतिभा जी विषयानुरूप बहुत ही मनोरम रचना के लिए सादर शुभकामनाएं"
Oct 24
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"आदरणीया आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 24
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"उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 24
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"मार्गदर्शन के लिए सादर आभार आदरणीय"
Oct 24
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"शक्ति छंद उटज में अकेला मनुज चाव से शयन कर रहा है सुखद भाव से शजर पर अनोखी उटज की छटा लगे स्वर्ग जैसी मनोहर छटा।। बना कीचकों का सुघर खाट है मधुर क्षीरसागर सदृश ठाट है लिया फोन हाथों में लवलीन है मगन हो निरखता न ग़मगीन है।। अकेले प्रिया को लुभाने चला…"
Oct 23
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी चित्रानुरूप बहुत ही सुंदर लिखा आपने सादर बधाई स्वीकार करें"
Oct 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Posted on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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