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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह's Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post "लोग"
"आदरणीया अन्विता जी ऐसी रचनाये बहुत कम देखने को मिलती हैं हमे कुछ पल के लिए लग रहा था मुक्तिबोध को पढ़ रहा हूँ, बहुत ही शानदार रचना दिल से बधाई"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on amita tiwari's blog post दिन दीन हो चला
"आदरणीया अमिता जी बहुत ही अच्छी रचना है, आज मजदूरों की भावनाओं को समझने वाले कम हैं, सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post दर्द
"आदरणीय अवनीश जी विल्कुल यथार्थ चित्रण किया है बहुत बहुत बधाई"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"आदरणीय रूपम जी बहुत अच्छी गजल हुई ,दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही अच्छी रचना हुई कितनी भी प्रशंसा की जाय कम है दिल से बधाई"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post जीवन पर कुछ दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी जीवन की सच्चाई को आपने दोहे में उकेरा है ,सच मे एक पृष्ठ पर जीत और एक पर हार, बहुत बढ़िया लिखा आपने दिल से बधाई कुबूल कीजिए"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से लेखनी सफल हुई आपका बहुत बहुत आभार"
Thursday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हुआ आपका दिल से आभार"
Thursday
Sushil Sarna commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"वाह बहुत सुंदर आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी ... माँ गंगा को समर्पित एक अतुंलनीय सृजन। शब्द सौंदर्य देखते ही बनता है। इस उत्तम सृजन के लिए दिल से बधाई।"
Wednesday
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है। लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से। कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से। व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से। फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी। धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा में दिख जाती थी। पावन सलिला मोक्ष दायिनी, हमें बहुत हर्षाती थी। नभ अवनी…See More
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गंगादशहरा पर कुछ दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बढ़िया दोहे मन प्रसन्न हो गया सादर बधाई कुबूल कीजिए"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही प्रेरक रचना है मन खुश हो गया बधाई कुबूल कीजिए"
May 25
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post ताना-बाना
"आदरणीया अन्विता जी यह कविता हमें बता रही आपके भीतर   कारयित्री भावयित्री प्रतिभा भरी हुई है उस प्रतिभा को हृदयतल से बधाई"
May 25
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post बेहतर तो
"हम भी क्या दीवाने निकले,वाह वाह बहुत ही धारदार रचना आदरणीया अन्विता जी दिल से बधाई आपको"
May 25

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Male
City State
Varanasi
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Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Posted on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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