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कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात

वो लड़कपन के सपनों की बात,
काग़ज की नाव और कागज़ी जहाजों की बात।
वो जवानी की ज़िद्दी उमंगों की बात,
हर ख़्वाब को हकीकत बनाने की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो हसीं ख्वाबों, ख्यालों की रात,
वो चुराई हसीं मुलाकातों की बात।
वो कही अनकही बातों की बात,
वो बिखरते सिमटते जज्बातों की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो चाही, अनचाही विदाई की बात,
और जुदाई में छलके आंसुओ की बात।
वो अपनों के बेगानें होने की बात,
और बेगानों को दिल से अपनानें की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो दिल से दिल को राह की बात,
और चूके पता तो कसक और आह की बात।
वो पहली मुलाकात में जन्मों के रिश्तों की बात,
और कभी जन्मों की बेवजह मुलाकातों की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
“मौलिक व अप्रकाशित” 

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Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 23, 2019 at 1:04pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी कविता की सराहना के लिए हार्दिक आभार। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 20, 2019 at 4:41am

आ. गीता जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 17, 2019 at 7:11am

आदरणीय समर कबीर जी रचना पर आपके आत्मीय और पारखी अवलोकन एवं मार्गदर्शन का इंतजार रहता है जो बहुत कुछ सिखाता हैI

सर मार्गदर्शन एवं बधाई के लिए सादर आभार..

Comment by Samar kabeer on November 14, 2019 at 5:02pm

मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब, कविता का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करे ।

'वो बिखरते सिमटते जज्बातों की बात'

आपकी जानकारी के लिए बता रहा हूँ कि 'जज़्बा' का बहुवचन "जज़्बात" होता है,जज़्बातों नहीं ।

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 13, 2019 at 6:56pm

आदरणीय डॉo उषा जी कविता की सराहना के लिए हार्दिक आभार। कुछ खास है प्रशंसा में कहे गए आत्मीय शब्दों की बात।

Comment by Usha on November 13, 2019 at 6:47pm

आदरणीय डॉ गीता चौधरी जी, सही कहा आपने। हर बात की है कोई ख़ास बात। इन्ही बातों में है ज़िन्दगी के होने का अहसास। सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई स्वीकार करें। सादर।

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 12, 2019 at 4:22pm

आदरणीय डाo विजय शंकर जी सादर प्रणाम, आपकी सराहना एवं उत्साह वर्धन  हमेशा कुछ अच्छा लिखने की प्रेरणा देता रहेगाI हार्दिक आभार I

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 12, 2019 at 9:58am

आदरणीय डॉO गीता चौधरी जी , कुछ बातों का सिलसिला ऐसा ही होता है , अच्छी प्रस्तुति , बधाई , सादर।

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