For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dr. Vijai Shanker
Share

Dr. Vijai Shanker's Friends

  • प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • maharshi tripathi
  • Hari Prakash Dubey
  • seemahari sharma
  • harivallabh sharma
  • पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"
  • atul kushwah
  • savitamishra
  • गिरिराज भंडारी
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • Dr Ashutosh Mishra
  • vijay nikore
  • Shyam Narain Verma
  • Abid ali mansoori
 

Dr. Vijai Shanker's Page

Latest Activity

Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"विनम्र श्रद्धांजलि."
Monday
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

विसंगति —डॉo विजय शंकर

बीते कुछ दिनों में लगा कि हम कुछ बड़े हो गये , अहंकार से फूलने लगे और फूलते...चले गए। फूले इतना कि हर समस्या के सामने बौने हो गये। यकीन नहीं होता कि आदमी खुद कुछ नहीं होता , ये जानने के बाद भी , कुछ का ख्याल हैं कि लूटो-खाओ, पाप-पुण्य कहीं कुछ नहीं होता , भगवान भी कहीं नहीं होता।मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Apr 30
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post मुहब्बत हो जाती है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफिर जी , रचना पर उपस्थिति एवं सम्मान प्रदान करने हेतु हार्दिक आभार एवं धन्यवाद , सादर"
Apr 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post मुहब्बत हो जाती है - डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

मुहब्बत हो जाती है - डॉo विजय शंकर

मुहब्बत हो जाती है , मुहब्बत हो जाती है , मुहब्बत हो जाती है , ये तो नफ़रतें हैं , जिनके लिए टेंडर निकाले जाते हैं . मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Apr 25
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"खुद औरों के कन्धे पर चढ़कहता बोझ सँभाला उसने।३। बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई , आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफिर जी , सादर।"
Jan 23
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब कुछ है अब यार सियासी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"देश का पहिया जाम पड़ा हैदौड़ रही बस कार सियासी।६।बहुत सटीक विवेचन। बधाई, आदरणीय लक्षण धामी मुसाफिर जी, सादर।"
Jan 7
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षात्रप जी, बहुत बहुत हार्दिक आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Dec 30, 2020
नाथ सोनांचली commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। बेहतरीन लघु कविताएँ हुई हैं । बधाई स्वीकार कीजिये"
Dec 30, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , आपकी उपस्थिति और सार्थक टिप्पणी के लिए आभार , शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद , सादर।"
Dec 24, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफिर जी , आपकी प्रेरक सद्भावनाओं के लिए आभार एवं बधाई के लिए धन्यवाद , सादर।"
Dec 24, 2020
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब, दोनों कविताएँ बहुत उम्द: हुई हैं, इस शानदार प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । उत्तम लघुकथाएँ हुई हैं ।हार्दिक बधाई ।"
Dec 17, 2020
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर

( एक ) लोग राजनीति में बड़े - बड़े बदलाव लाने के लिए आते हैं। सत्ता में आते ही कद-काठी , डील-डौल , रंग-रूप , वाणी , पहनावा सब बदल जाते हैं , सबसे बड़ी बात , चेहरे - मोहरे और इरादे तक बदल जाते हैं। ( दो ) वह गतिमान है , चलते रहना उसकी प्रकृति। वह समय है , गुजर जाता है। पर अतीत को छोड़ जाता है , और छोड़ जाता है , अतीत के अवशेष, धरोहरें, स्मृतियाँ , स्मारक , कहानियां। समय प्रति क्षण चलायमान रहता है , एक सा नहीं रहता है , बदलता रहता है। पर अतीत के सामने वह भी विवश रहता है , उसे…See More
Dec 17, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on amita tiwari's blog post मोल भाव मत करना
"आदरणीय सुश्री अमिता तिवारी जी , मार्मिक रचना के लिए बधाई , सादर"
Dec 17, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अन्नदाता के लिए -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , बधाई ग़ज़ल के लिए , सादर।"
Dec 17, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

Dr. Vijai Shanker's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall (19 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:54pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी प्रणाम! बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी प्रथम लघुकथा अच्छी लगी आपने अपना अमूल्य समय निकाला और जो हौसला बढ़ाया उसका ह्रदय से आभार आपका स्नेहभाव सदा यूँ ही बना रहे!
At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

Dr. Vijai Shanker's Blog

विसंगति —डॉo विजय शंकर

बीते कुछ दिनों में लगा
कि हम कुछ बड़े हो गये ,
अहंकार से फूलने लगे
और फूलते...चले गए।
फूले इतना कि हर समस्या
के सामने बौने हो गये।
यकीन नहीं होता कि
आदमी खुद कुछ नहीं होता ,
ये जानने के बाद भी ,
कुछ का ख्याल हैं कि
लूटो-खाओ, पाप-पुण्य
कहीं कुछ नहीं होता ,
भगवान भी कहीं नहीं होता।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 30, 2021 at 10:48am

मुहब्बत हो जाती है - डॉo विजय शंकर

मुहब्बत हो जाती है ,
मुहब्बत हो जाती है ,
मुहब्बत हो जाती है ,
ये तो नफ़रतें हैं ,
जिनके लिए टेंडर
निकाले जाते हैं . 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 25, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

दो लघु कवितायें —डॉo विजय शंकर

( एक )

लोग राजनीति में बड़े - बड़े

बदलाव लाने के लिए आते हैं।

सत्ता में आते ही कद-काठी ,

डील-डौल , रंग-रूप , वाणी ,

पहनावा सब बदल जाते हैं ,

सबसे बड़ी बात , चेहरे - मोहरे

और इरादे तक बदल जाते हैं।



( दो )

वह गतिमान है ,

चलते रहना उसकी प्रकृति।

वह समय है , गुजर जाता है।

पर अतीत को छोड़ जाता है ,

और छोड़ जाता है ,

अतीत के अवशेष, धरोहरें,

स्मृतियाँ , स्मारक , कहानियां।

समय प्रति क्षण चलायमान…

Continue

Posted on December 17, 2020 at 9:30am — 6 Comments

कौन हो तुम — डॉo विजय शंकर

ओजस्वी तेजस्वी

से दिखाई देते हो ,

अपनी जयकार से

आत्म मुग्ध लगते हो।

आईने में खुद को

रोज ही देखते हो ,

क्या खुद को

कुछ पहचानते भी हो।

बड़े आदमी हो , बहुत बड़े ,

लोग तुम्हें जानते हैं ,

बच्चे सामान्य ज्ञान के लिए

तुम्हारा नाम रटते और जानते हैं ,

रोज कितने ही लोग तुम्हारी ड्योढ़ी

पर खड़े रहते हैं , टकटकी लगाए ,

कितने आदमी तुमसे रोज ही

मिलने के लिए आते रहते हैं ,

तुम भी कभी किसी से

आदमी की तरह मिलते हो…

Continue

Posted on December 4, 2020 at 11:28am — 8 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. अमिता जी, गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।"
5 minutes ago
amita tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"पीता  हर  उम्मीद  हमारीकैसी तेरी प्यास ओ राजा बहुत उत्तम ,बहुत सटीक  गागर मे…"
10 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' updated their profile
17 hours ago
अजेय commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"हा हा हा। बहुत मस्त कविता। उत्तम हास्य"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"आ. अमिता जी, अच्छी व सीख देती रचना हुई है । प्रक्रिति भी निश्चित तौर पर दण्डित कर रही है कि कुछ…"
18 hours ago
amita tiwari posted a blog post

दस वर्षीय का सवाल

सपूत को स्कूल वापिसी पर उदास देखाचेहरा लटका हुआ आँखों में घोर क्रोध रेखाकलेजा मुंह को आने लगाकुछ…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

मुहब्बतनामा (उपन्यास अंश)

दूसरी मुहब्बत के नाममेरे दूसरे इश्क़,तुम मेरे जिंदगी में न आते तो मैं इसके अँधेरे में खो जाता, मिट…See More
yesterday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत ही दुखद समाचार है..ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। "
yesterday
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
Monday
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

पृथ्वी सम्हलती नहींमंगल सम्हालेंगेयहाँ ऑक्सीजन नष्ट कीवहाँ डेरा डालेंगेबहुत मनाईं देवियाँबहुत मनाए…See More
Monday
सुचिसंदीप अग्रवालl is now friends with DR ARUN KUMAR SHASTRI, बासुदेव अग्रवाल 'नमन' and Aazi Tamaam
Monday
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion लावणी छन्द (ईश गरिमा) in the group धार्मिक साहित्य
"बेजोड़ शब्दों का प्रयोग करते हुए बहुत ही मनभावक ईश वंदना हुई है। बधाई स्वीकारें।"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service