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दोहा संकलन :

नैन करें अठखेलियाँ, स्पर्श करें संवाद।
बाहुबंध में हो गए, अंतस के अनुवाद।१ ।

नैन शरों के घाव का ,अधर करें उपचार।
श्वास-श्वास में खो गयी,स्पर्श हुए साकार।२ ।

नैन विरह में प्रीत के ,बरसे सारी रात।
गूँगे स्वर करते रहे, मौन पलों से बात।३ ।

अद्भुत पहले प्यार का, होता है आनंद।
देह-देह में रागिनीं , श्वास -श्वास मकरंद।४ ।

केशों में जूही सजे , महके हरसिंगार।
नैनों की हाला करे, रिन्दों का सत्कार ।५ ।

दिल से दिल की कीजिये, निजी पलों में बात।
बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में रात।६ ।

अर्थ निरर्थक हो गए, व्यर्थ हुए सब भाव।
मेघा बन रिसने लगे, मधुपल बन कर घाव।७ ।

पुष्प सुवासित सेज भी, दिल को लगती व्यर्थ।
बिन साजन शृंगार भी, खो देता है अर्थ।८ ।

भीगी-भीगी जब चले, मस्ती भरी बयार।
कैसे विस्मृत हो भला, वो सावन का प्यार।९ ।

मद से बढ़ती अंधता, धन से बिगड़े चाल।
बिना रूप शृंगार के , दर्पण भी कंगाल।१० ।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on December 30, 2018 at 4:34pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी सादर प्रणाम , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आभार व्यक्त करने में हुए विलम्ब के लिए क्षमा।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 21, 2018 at 8:13pm

नैन करें अठखेलियाँ, स्पर्श करें संवाद। 
बाहुबंध में हो गए, अंतस के अनुवाद।१ ।-------------बहुत खूब सरना जी  I 

Comment by Sushil Sarna on December 19, 2018 at 7:30pm

आदरणीय   डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 19, 2018 at 8:53am

आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही आकर्षक दोहावली के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Sushil Sarna on December 17, 2018 at 6:03pm

आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 17, 2018 at 6:03pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on December 17, 2018 at 6:02pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by PHOOL SINGH on December 17, 2018 at 2:55pm

बहुत ही सूंदर तरीके से फ़िरोही गई दोहावली बधाई स्वीकारे

Comment by Samar kabeer on December 17, 2018 at 11:10am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by narendrasinh chauhan on December 15, 2018 at 5:59pm

खूब सुन्दर दोहावली 

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