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"इतना मान-सम्मान पाने वाली, फिर भी इनकी हथेली खुरदरी और मैली सी क्यों है?"-- हृदय रेखा ने धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए दूसरी से पूछा तो हथेली के कान खड़े हो गए।
"बडे साहसी, इनका जीवन उत्साह से भरपूर है,फिर भी देखो ना..." मस्तिष्क रेखा ने फुसफुसा कर ज़बाब दिया।
" देखो ना! मैं भी कितनी ऊर्जा लिए यहाँ हूँ, किंतु हथेली की इस कठोरता और गदंगी से.....!" जीवन रेखा भी कसामसाई।
"अरे! क्यों नाहक क्लेष करती हो तुम तीनों? भाग्य रेखा तो तुम अपने संग लेकर ही नहीं आई, तब मैं क्या करती" हथेली से अब चुप ना रहा गया, वह ऊँचे स्वर में बोल पड़ी।
तीनों रेखाएँ अकबका कर एक दूसरे को देखने लगी।
"हुँह!... इतनी ढेर सारी कटी-पिटी रेखाएँ भी साध ली तुमने अपनी हथेली पर तो हम भी क्या करते".----तीनों फिर से अपनी कमान संभाली।
"तभी तो मैनें तुम सभी को मुट्ठी में कस, छेंनी-ह्थौडा उठा, कर्म रूपी पत्थर को तोडा , अब तक तोड़ रही हूँ। " हथेली का आत्मविश्वास छलक उठा।
कठोर, मैली, खुरदरी-सी सशक्त हथेली पर उभरती हुई मजबूत भाग्य रेखा को देख, कसी हुई हथेली में वे अपना-अपना वजूद ढूँढने लगी।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by नयना(आरती)कानिटकर on October 10, 2017 at 6:02pm

आ.राज़ नवादवी "हथेली का आत्मविश्वास छलक उठी" टंकण त्रुटी है. उसे ठीक करती हू. आभार आपका रचना सराहने के लिए

Comment by नयना(आरती)कानिटकर on October 10, 2017 at 6:00pm

आ. सुरेन्द्र जी ,आ.सलिम रजा जी,आ.समर कबीर जी,आ. नीता जी, आ
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी. आ. मोहम्मद आरिफ़ जी, आ.उस्मानी जी आप सभी का ह्रदयतल से आभार

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 10, 2017 at 1:01pm
बहुत ही उम्दा और गहरे भावों का समावेश किया आपने आदरणीया.…हार्दिक बधाई
Comment by राज़ नवादवी on October 9, 2017 at 8:07pm

आदरणीया नयना कानिटकर जी, आदाब. प्रतीकों में कही गई इस सुन्दर लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई. "हथेली का आत्मविश्वास छलक उठी" वाक्य में 'उठी' को 'उठा' कर लें, आत्मविश्वास शब्द पुल्लिंग है. सादर. 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 8, 2017 at 6:51pm
आपकी इस प्रतीकात्मक रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय नयना 'आरती' कानिटकर जी।
Comment by Mohammed Arif on October 8, 2017 at 7:38am
आदरणीया नयना आरती जी आदाब, रेखाओं का मानवीकरण करके बहुत ही उम्दा लघुकथा कही गई पने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by नाथ सोनांचली on October 8, 2017 at 4:40am
आद0 नयना जी सादर अभिवादन, बेहतरीन लघुकथा, बधाई र्आपको
Comment by Nita Kasar on October 7, 2017 at 7:50pm
सारगर्भित कथा के लिये बधाई आद० नयना जी ।
Comment by Samar kabeer on October 7, 2017 at 7:11pm
मोहतरमा नयना जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 7, 2017 at 7:09pm
नयना जी,
ख़ूबसूरत लघुकथा हस्तरेखा (लघुकथा) के लिए बधाई,

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