For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शाइरी भी यार अब हम क्या करें

बह्र 2122 2122 212

हर जगह नफरत का आलम, क्या करें
ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||

मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ
और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||

जो सहारे भाग्य के बैठा रहे
ऐसे का फिर राम गौतम क्या करें ||

कुछ नही अपना यहाँ यह जानकर
*जाने वाले चीज का ग़म क्या करें*

वक़्त से कोई बड़ा जब है नही
सर किसी के सामने ख़म क्या करें ||

इस हुनर पर हावी हैं मजबूरियाँ
शाइरी भी यार अब हम क्या करें ||

दोस्त भी बदले जो कपड़ों की तरह
आँख उसके वास्ते नम क्या करें ||

रोज़ जो मेहमाँ बने घर पर मिरे
यार उसका ख़ैरमक़दम क्या करें ||

हैं जुबाँ जिनकी सियासत की तरह
'नाथ' उनपर अब यकीं हम क्या करें ||

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 867

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on April 25, 2017 at 5:35pm

हर जगह नफरत का आलम, क्या करें
ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||

मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ
और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||

वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी इस ग़ज़ल में बहुत ही दिलकश और हकीकी अशआर कहे हैं आपने ... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई कबूल फरमाएं।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 20, 2017 at 4:14pm
आदर सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा गजल कही है आपने। शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें!
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 5:39am
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपके हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 5:33am
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपके हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 3:51am
आद0 श्रध्येय रवि शुक्ल सर सादर प्रणाम, हौसला अफजाई के लिए आभार।
Comment by Samar kabeer on April 18, 2017 at 6:13pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Ravi Shukla on April 18, 2017 at 2:30pm

आदरणीय सुरेन्‍द्र जी अच्‍छी गजल कही  आपने बधाई स्‍वीकार करें

Comment by नाथ सोनांचली on April 18, 2017 at 2:14pm
भाई मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on April 18, 2017 at 2:13pm
आदरणीय भाई नीलेश जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार,निश्चय ही आगे से कुछ बेहतर सोचूँगा
Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2017 at 11:42am

बहुत खूब ग़ज़ल के लाइट बधाई स्वीकार करें ....
आगामी अभ्यास के रूप में अब   हर मिसरे को पूरा कसने का प्रयास कीजिये ...
बधाई 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई * बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।   रूप  मनोहर …"
3 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
8 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
20 hours ago
Admin posted discussions
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Feb 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Feb 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Feb 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service