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गजल- बिना तेरे किसकी इबादत करेंगे!

१२२ १२२ १२२ १२२

बहुत दुख दिये है कि नफरत करेंगे!
तेरी अब कभी हम न चाहत करेंगे!!

जरा सोच इतना लिया होता जालिम!
बिना तेरे किसकी इबादत करेंगे!!

समझ ही न पाये मुहब्बत मेरी तुम!
कि मर के भी तुमसे मुहब्बत करेंगे!!

वे बच्चें हैं उन पर न गुस्सा करो यूं!
वे नादां वही फिर शरारत करेंगे!!

तु जिसके लिए इतना पागल है 'राहुल'!
अदा प्यार की वो न कीमत करेंगे!!

मौलिक व अप्रकाशित!

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 13, 2015 at 10:16pm

जरा सोच इतना लिया होता जालिम!
बिना तेरे किसकी इबादत करेंगे!!

वे बच्चें हैं उन पर न गुस्सा करो यूं!
वे नादां वही फिर शरारत करेंगे!! 

ये दो शे’र खूबसूरत हुए हैं। दाद कुबूल करें

Comment by Krishnasingh Pela on January 21, 2015 at 6:46pm
इस बेहतरीन असआर के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ स्वीकार करें आदरणीय राहुल साहब ।
Comment by Rahul Dangi Panchal on January 15, 2015 at 6:46am
आदरणीय तिलक राज सर जी आपकी प्रतिक्रिया पाकर रचना सफल हुई सादर धन्यवाद! आदरणीय मुझे आशिर्वाद दे

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on January 15, 2015 at 12:01am

बहुत खूब।

फ़ऊलुन्, फ़ऊलुन्, फ़ऊलुन्, फ़ऊलुन्

इसी बह्र पर एक पुराना गीत है:
तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ

वफ़ा कर रहा हूँ, वफ़ा चाहता हूँ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 14, 2015 at 8:15pm
आदरणीय Saurabh Pandey जी बहुत बहुत धन्यवाद! मैं आपके सुझाव पर अवश्य गौर करुंगा सादर!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2015 at 7:10pm

भाई राहुलजी, आपकी इस ग़ज़ल के हवाले से कहें, तो साहब आपने हमें पूरी चौंका दिया ! ग़ज़ब ! ग़ज़ब !!

मतले के कहे में तनिक झिझक है. इस झिझक से अभ्यास करेते हुए आप अवश्य बाहर आ जायेंगे.

ऐसा इसलिए भी कह पा रहा हूँ कि आपके इन दो शेरों ने तो कमाल कर दिया है -

जरा सोच इतना लिया होता जालिम!
बिना तेरे किसकी इबादत करेंगे!!

वे बच्चें हैं उन पर न गुस्सा करो यूं!
वे नादां वही फिर शरारत करेंगे!!

इन शेरों के लिए तो बार-बार बधाइयाँ.
बहुत खूब !

Comment by Alok Mittal on January 3, 2015 at 6:07pm

जरा सोच इतना लिया होता जालिम!
बिना तेरे किसकी इबादत करेंगे!!

समझ ही न पाये मुहब्बत मेरी तुम!
कि मर के भी तुमसे मुहब्बत करेंगे!!...बहुत खूबसूरत

क्या बता है गज़ब के अशआर है लाजवाब ग़ज़ल है आपकी

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 1, 2015 at 8:51pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय! नमन!
Comment by Rahul Dangi Panchal on December 29, 2014 at 4:08pm
आदरणीय Dr Ashutosh Mishra जी व सोमेश कुमार सादर धन्यवाद स्वीकार करें!
Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 29, 2014 at 2:36pm

आदरणीय राहुल जी इस शानदार ग़ज़ल के लिए तहे दिल बधाई सादर 

कृपया ध्यान दे...

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