For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 22  22  22  22  22  2

 

मोद-सुमन  जो नित्य हृदय के पास रहे

सौरभ  का  भी  जीवन  में  आवास  रहे

 

मार्ग भले  ही छोटा  या  फिर  लम्बा हो

पैरों पर  प्रति  पल  अपने  विश्वास  रहे

 

सौहार्द  रखे   आँगन  यदि   बारहमासा

मुखड़ा  कोई   एक न   मित्र  उदास  रहे

 

उर्वरता  न  कभी  खोये  मिटटी  अपनी

इतना  केवल  सबका  नित्य प्रयास  रहे

 

नित्य नया यदि ऋतुएँ पुष्प खिलाए तो

और अधिक जीवन की मन में आस रहे

#

मौलिक/अप्रकाशित.

Views: 591

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 12, 2022 at 7:02pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका अतिशय आभार. सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 12, 2022 at 7:02pm

आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 12, 2022 at 7:01pm

आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर साहब सादर, 'बारहमासा' शब्द को किसी क्रिया विशेष से जोड़कर देखा जाना उचित नहीं है. बारहमासा एक विशेषण अवश्य है. /खिलाएँ/ जी ! यह त्रुटि अवश्य रह गई है. प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 12, 2022 at 6:54pm

आदरणीय महेंद्र कुमार जी प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2022 at 8:18pm

 हिंदी शब्दों को पिरोते हुए अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय

Comment by Sushil Sarna on October 3, 2022 at 4:44pm
वाह आदरणीय जी बहुत खूबसूरत सृजन हुआ है सर । हार्दिक बधाई सर
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 2, 2022 at 6:18pm

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें, आदरणीय... 

'सौहार्द रखे आँगन यदि बारहमासा' इस ऊला मिसरे में आया शब्द "बारहमासा" का अर्थ शब्दकोश में - विरह प्रधान लोकगीत; वह पद्य या गीत जिसमें बारह महीनों की प्राकृतिक विशेषताओं का वर्णन किसी विरही या विरहिणी के मुँह से कराया गया हो; वर्ष भर के बारह मास में नायक-नायिका की श्रृंगारिक विरह एवं मिलन की क्रियाओं के चित्रण। बताया गया है, इन अर्थों में ऊला मिसरे का सानी मिसरे के साथ रब्त नहीं है, क्या इस मिसरे को यूँ किया जा सकता है? - 

'यदि सौहार्द रहे मन आँगन जीवन में'

आख़िरी शे'र में 'खिलाएं' में टंकण त्रुटि हो गयी है... देखियेगा।

Comment by Mahendra Kumar on October 2, 2022 at 7:27am

अच्छी ग़ज़ल है कही है आपने आदरणीय अशोक रक्ताले जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 1, 2022 at 9:17am

आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत प्रयास पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by Samar kabeer on September 30, 2022 at 7:09pm

जनाब अशोक रक्ताले जी आदाब, हिन्दी शब्दों में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"  आदरणीय रवि भसीन ’शाहिद’ जी, प्रस्तुति पर आपका स्वागत है। इस गजल को आपका अनुमोदन…"
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। इस प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। हर शेर में सार्थक विचार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"आदरणीय सौरभ पांडे जी, नमस्कार। बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने, इस पे शेर-दर-शेर हार्दिक बधाई स्वीकार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। काफ़ी देर के बाद मिल रहे हैं। इस सुंदर प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार जी, नमस्कार। इस सुंदर ग़ज़ल पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। /रास्तों …"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

प्रवाह, बुद्धिमत्ता और भ्रम का खेल सिद्धांत (लेख)

मनुष्य और भाषा के बीच का संबंध केवल अभिव्यक्ति का नहीं है, अगर ध्यान से सोचें तो यह एक तरह का खेल…See More
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी इस छन्द प्रस्तुति की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी प्रस्तुत छंदों पर  उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सूरज होता उत्तरगामी, बढ़ता थोड़ा ताप। मगर ठंड की अभी विदाई, समझ न लेना आप।।...  जी ! अभी ठण्ड…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदयतल से आभार.…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत सरसी छंदों की सराहना के लिए आपका हृदय से आभार. मैं…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service