For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गड़गड़ाकर

खाँसता है

एक बूढ़ा ट्रैक्टर

डगडगाता

जा रहा है

ईंट ओवरलोड कर

सरसराती कार निकली

घरघराती बस

धड़धड़ाती बाइकों ने

गालियाँ दीं दस

कह रही है

साइकिल तक

हो गया बुड्ढा अमर

न्यूनतम का भी तिहाई

पा रहा वेतन

पर चढ़ी चर्बी कहें सब

ख़ूब इसके तन

थरथराकर

कांपता है

रुख हवा का देखकर

ठीक होता सब अगर तो

इस कदर खटता?

छाँव घर की छोड़कर ये

धूप में मरता?

 

स्वाभिमानी

खा न पाया  

आज तक ये माँगकर

--------------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 254

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Chetan Prakash on June 28, 2021 at 10:40pm

 नमस्कार भाई धर्मेंद्र  कुमार सिंह, 'नवगीत' की भी कोई  विषय वस्तु अनिवार्य  रूप  से  होती है, और  आपका  नवगीत विषय को लेकर अस्पष्ट  है , चूँकि  आप तथाकथित नवगीत  के रचयिता  हैं तो आप  से बेहतर मेरे प्रश्न  का उत्तर  कौन दे सकता है ? सो, बंधु  मैंने  आप से उक्त  जानकारी  की अपेक्षा  की है !  आशा  है,  आप प्रश्न का जवाब  देकर संतुष्ट  करने की कृपा  करेंगे!

 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:21pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'' साहब 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:20pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:18pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Samar kabeer साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:16pm

आदरणीय  Chetan Prakash  जी, यदि आप बताया दें कि आपने इस नवगीत का क्या अर्थ निकाला है तो जहां अस्पष्टता है मैं उसका स्पष्टीकरण दे दूंगा 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Rahul Dangi Panchal जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 27, 2021 at 9:07pm

आ. भाई धर्मेंद्र जी, सादर अभिवादन । अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on June 27, 2021 at 4:43pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत सृजित हुआ है, बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by Samar kabeer on June 27, 2021 at 12:09pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Chetan Prakash on June 27, 2021 at 8:37am

बंधु, शिल्प की दृष्टि से आपका नवगीत ठीक है, किन्तु इसकी विषय -वस्तु मुझे स्पष्ट नहीं हो पायी, सादर !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको।"
10 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत धन्यवाद मान्यवर "
14 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 आपके विचार से सहमत हूँ ।त्रुटि हुई है । मतला अब ऐसे पढ़ें  गुज़रे हैं दर्दो ग़म लिए दौरे…"
15 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदाब, लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये! अंतिम शे'र के सानी में,…"
15 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी विशेष आभार"
17 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 चेतन साहब 100 प्रतिशत सहमत हूँ त्रुटि है । अब आप मतले को इस तरह पढ़ें । गुज़रे हैं दर्दो ग़म लिए…"
18 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221 2121 1221 212 1 बैठेंगे कब तलक सुनो यूँ बे-ज़बाँ से हम कुछ तुम कहो वहाँ से कहें कुछ यहाँ से…"
22 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 ग़ज़ल का सुंदर प्रयास हुआ है । बधाई । गुज़रे तुम्हारे वास्ते हर इम्तिहाँ से हम देने का साथ वादा(…"
34 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आभार, नवीन जी आपने मेरी ग़ज़ल का संज्ञान लिया! किन्तु चौथा शे'र आप समझ नहीं पाये, खेद है!…"
38 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी, अच्छा ।नहीं"
41 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 धामी साहब बहुत खूब ग़ज़ल हुई बधाई । "
46 minutes ago
AMAN SINHA posted a blog post

बदनाम ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी तू बड़ी बदनाम है ज़िंदा रहने की हर ख़्वाहिश को करती तू नाकाम है ऐ ज़िन्दगी तू बड़ी बदनाम है…See More
46 minutes ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service