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यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।

21 21 21 2 ,21 21 21 2


चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।
नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।

प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।

तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।
सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।

ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।
पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है ।

'मौलिक व अप्रकाशित'

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Comment by प्रशांत "दीक्षित" on October 13, 2019 at 9:02pm

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है ।

बहुत बहुत बधाई

Comment by sunanda jha on September 7, 2017 at 10:21pm
हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया आदरणीय सुशील सर ।आपको रचना पसन्द आयी लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by sunanda jha on September 7, 2017 at 10:19pm
हौसलाफजाई के लिए हृदय तल से आभार आदरणीय रक्ताले सर ।आदरणीय जहाँ तक मुझे याद है इस छंद में कुल चार चिर्ण होते हैं ,दो चरणों की एक पंक्ति और दो दो पंक्तियों में तुकांत सुमेलित होते ,इसलिए मैंने ऐसे ही लिखा सादर ।यति न लगाने का दोष हुआ है उसे सुधार कर रिपोस्ट करुँगी और मेरा संशय तुकांत को लेकर भी है प्लीज मेरा संशय दूर करें सादर।
Comment by Ashok Kumar Raktale on September 5, 2017 at 8:22am

आदरणीया  सुनंदा झा जी सादर, समानिका छंद पर अच्छा प्रयास हुआ है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. फिरभी समानिका छंद में दो-दो चरणों की तुकांतता होती है.

चाँद खो गया कही |

रात है बता रही ||
नींद में सुहासिनी |

स्वप्न है सजा रही ||

आपकी प्रस्तुति में पदांत यति भी प्रदर्शित नहीं की गई है. यतियों को यति चिन्ह द्वारा प्रदर्शित करना आवश्यक होता है. सादर.

Comment by Sushil Sarna on August 30, 2017 at 4:06pm

ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।
पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है ।


वाह बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति हुई है आदरणीय सुनंदा जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by sunanda jha on August 30, 2017 at 3:05pm
हौसलाफजाई के लिए हृदय तल से आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव सर ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 30, 2017 at 1:13pm

बहुत बढ़िया , आ० . 

Comment by sunanda jha on August 29, 2017 at 4:06pm
तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय समर सर और आदरणीय कल्पना जी हौसलाफजाई के लिए सादर ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 29, 2017 at 1:12pm

बहुत सुंदर रचना हुई है आदरणीया सुनंदा जी | हार्दिक बधाई |

Comment by Samar kabeer on August 29, 2017 at 12:37pm
मोहतरमा सुनन्दा झा साहिबा आदाब,उम्दा रचना हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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