For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"गुलशन" बात हमारी रखना..

मश्के सुखन को जारी रखना..
"गुलशन" बात हमारी रखना..

फूल अगर हैं महकाने तो..
गोड़ के अपनी क्यारी रखना...

शोला सिफत हो लफ्ज़ तुम्हारे..
फ़िक्र में वो चिंगारी रखना....

फन की कीमत यूँ न मिलेगी..
गजलों को मेंआरी रखना ....

इल्म अगर हासिल करना है...
मेहनत पयहम जारी रखना..

उर्दू की तो शान यही है..
ख़ुश्बू प्यारी-प्यारी रखना..

हम तो हैं आज़ार ग़ज़ल के..
तुम भी ये बीमारी रखना...

Views: 518

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Vipul Kumar on June 25, 2012 at 7:52pm

jee haaN Surya bhai. waise ye typing mistake nahiN hai. kyoNki phir us misre meN "haiN" aur "ke" alfaz bhi typing mistake maane jayenge.
waise jo misra aapne diya hai usmeN bhi aib hai bhai. "ham ko hai aazar ghazal ki" nahiN kah sakte. "beemaari" muannas(feminine) hai. iske sath "ki" lagega ja sakta hai lekin aazar ke sath "ka" lagega. aazaar muzakkar(masculine) hai. "ham ko hai aazaar ghazal ka"

lekin agar behtari se dekha jaaye to mere hisab se ise yuN kaheN to behtar hoga. "ham to haiN beemaar ghazal ke"..........

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 25, 2012 at 1:32pm

विपुल भाई मुझे भी ये मिसरा खटक रहा था शायद  टाइपिंग त्रुटि है जो "को" की जगह "तो " हो गया है.... "हमको है आज़ार (बीमारी) ग़ज़ल की ," तुम भी ये बीमारी रखना ....

Comment by Vipul Kumar on June 24, 2012 at 10:57pm

जनाब बहुत उम्दा ग़ज़ल है. वले मुझे इस मिसरे का मतलब बताएँगे तो मेहरबानी होगी " हम तो हैं आज़ार ग़ज़ल के.."

Comment by Poonam Matia on June 23, 2012 at 1:43pm

शोला सिफत हो लफ्ज़ तुम्हारे..
फ़िक्र में वो चिंगारी रखना....

फन की कीमत यूँ न मिलेगी..
गजलों को मेंआरी रखना ....

इल्म अगर हासिल करना है...
मेहनत पयहम जारी रखना..

उर्दू की तो शान यही है..
ख़ुश्बू प्यारी-प्यारी रखना..

हम तो हैं आज़ार ग़ज़ल के..
तुम भी ये बीमारी रखना...// वाह अशफ़ाक अली साहिब बहुत खूब शेर हैं इस गज़ल के 

वाकई  चमन महक गया खुशबु से इसकी ......

Comment by Er. Ambarish Srivastava on June 8, 2012 at 6:18am

//फूल अगर हैं महकाने तो..
गोड़ के अपनी क्यारी रखना...

शोला सिफत हो लफ्ज़ तुम्हारे..
फ़िक्र में वो चिंगारी रखना....

फन की कीमत यूँ न मिलेगी..
गजलों को मेंआरी रखना ....//

बहुत खूब ये गज़ल कही है.

भाया ये बीमारी रखना..

दाद कुबूलें मेरे भाई .

साथ यही दोधारी रखना..

शायर अपना खैराबादी.

इससे  मिलकर यारी रखना.. :-))

 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 5, 2012 at 4:20pm

ये नायाब हीरा कहाँ छुपा रह गया था. बधाई.

Comment by वीनस केसरी on June 5, 2012 at 2:33pm

उर्दू की तो शान यही है..
ख़ुश्बू प्यारी-प्यारी रखना..

अहा अहा
क्या प्यारा शेर कहा है
ऐसा मखमली शेर कहा नहीं जाता, बस हो जाता है.. एक बार में
ग़ज़ल का हर शेर अपने आप में एक गुलशन है
वाह वा ...

Comment by Mohd Nayab on May 26, 2012 at 11:45pm

शोला सिफत हो लफ्ज़ तुम्हारे..

फ़िक्र में वो चिंगारी रखना....

 बहुत खूब ... है  बधाई आपको


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2012 at 7:52pm

हम तो हैं आज़ार ग़ज़ल के..
तुम भी ये बीमारी रखना...

आय हाय हाय, क्या खुबसूरत ग़ज़ल कही है बस आनंद आ गया , सौरभ भईया से मैं सहमत हूँ सच में यह नगीना ही है , आज पहली दफा मैं मतला और मकता दोनों एक ही शेर में देखा, पता नहीं यह सही है की नहीं, अभी तक तो मकता अंतिम शेर के रूप में ही रखने का चलन था |

दाद कुबूल करें जनाब,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2012 at 3:33pm

आह ! इस बेशकीमती नगीने पर मेरे नज़र अब पड़ रही है.

एक एक शेर कमाल . दाद कुबूल करें भाई जी.

फूल अगर हैं महकाने तो..
गोड़ के अपनी क्यारी रखना...

गुलशन भाई, बहुत उम्दा और दिल के बेहद करीब छू गया. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"ग़ज़ल पे हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया यादव जी..."
17 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-तस्वीर तुम्हारी
"बहुत बहुत आभार आदरणीय यादव जी...."
17 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-124 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
" बहुत खूब आदरणीया  अंजलि जी .. अच्छी गज़ल के लिए ढेरों मुबारकबाद "
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"उम्दा गज़ल की ढेरों मुबारकबाद अदरणीय सालिक गणवीर जी दूसरे शेर पर अच्छी इस्लाह हुयी ...."
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,अपेक्षा थी  कि आप अपनी रचना पर इंगित त्रुटियों को या defend करेंगे या…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"धन्यवाद आ. नादिर ख़ान साहब ..लेकिन अफ़सोस है कि चर्चा का रुख़ साहित्य केन्द्रित न हो कर कल्पनाओं को…"
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नीलेश जी उम्दा गज़ल  के लिए आपको ढेरों मुबारकबाद, गुणी जनों की चर्चा से हम लोगों…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय निलेश जी ख़ाकसार की ग़ज़ल तक आने के लिये आभार। आपको भी आयोजन में सहभागिता हेतु बधाई। "
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जी कोशिश करेंगे जल्दी आने की लेकिन ... और भी ग़म हैं .........   देर हो जाती है । सादर"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service