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Awanish Dhar Dvivedi
  • Male
  • GHAZIABAD U.P
  • India
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Latest Activity

Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post पर्यावरण बचायें
"जनाब अवनीश जी आदाब, अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । मंच की दूसरी रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दिया करें ।"
Jun 15, 2020
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post पर्यावरण बचायें
"जनाब अवनीश धर द्विवेदी जी, आदाब। सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें। "
Jun 15, 2020
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

पर्यावरण बचायें

आओ प्यारे हम सब मिलकरपर्यावरण बचायें।हरे भरे हम वृक्ष लगाकरहरियाली फैलायें।1।नदियाँ पर्वत झील बावलीऔर तलाब खुदायें।महावृक्ष पीपल वट पाकड़वृक्ष अनेक लगायें।2।धरा धधकती धक-धक धड़कनजन-जन की न बढ़ाएं।पर्यावरण संतुलित होवेऐसे कदम उठायें।3।प्राण वायु जल शीतल निर्मलप्रकृति प्रेम से पायें।आज के सुख के खातिर हमसबभावी कल न मिटायें।4।सोचो हम क्या देंगे अपनीआने वाली पीढ़ी को।सब कुछ दूषित हवा प्रदूषितचुने विनाश की सीढ़ी को?5।सुनो बुद्धिजीवी जनमानसप्रकृतिप्रेम सम्मान करो।प्रकृति की निर्मल छटा हो प्रसरितऐसा कार्य…See More
Jun 14, 2020
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post दर्द
"आदरणीय अवनीश जी विल्कुल यथार्थ चित्रण किया है बहुत बहुत बधाई"
Jun 4, 2020
Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post दर्द
"जनाब अवनीश जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । एक निवेदन ये है कि रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें,इससे रचना के बारे में कुछ कहना आसान हो जाता है ।"
Jun 2, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post दर्द
"आ. भाई अनीश जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 2, 2020
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

दर्द

दिल मेरा यह हाल देख घबराता हैशहर का अब मजदूरों से क्या नाता है।खून पसीने से अपने था सींचा जिसकोबुरे दौर में दामन शहर छुड़ाता है।आया संकट कोरोना का देश में जबसेसड़कों पर लाचार मनुज दिख जाता है।जिसने चमकाया शहरों को हो लथपथआज वही शहरों से फेंका जाता है।देख दर्द होता है दिल में अब अवनीशदुनियां को रचता क्या एक विधाता है।मेहनत करने वाला क्यूँ दर दर भटकेक्यूँ नेता साहब सेठ ऐंठ दिखलाता है।मौलिक एवं अप्रकाशितअवनीशSee More
May 31, 2020
Awanish Dhar Dvivedi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"करता रहा था जानवर रखवाली रातभर। बरबाद दिन में खेत को इंसान कर गए। बहुत ही उम्दा सर।"
May 31, 2020
Awanish Dhar Dvivedi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"करता रहा था जानवर रखवाली रातभर। बरबाद दिन में खेत को इंसान कर गए। बहुत ही उम्दा सर।"
May 31, 2020
Awanish Dhar Dvivedi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"बहुत उम्दा अशआर।बहुत बहुत धन्यवाद सर।"
May 31, 2020
Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post "हम वाणीजन"
"जनाब अवनीश धर जी आदाब,अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।"
May 13, 2020
Awanish Dhar Dvivedi posted blog posts
May 9, 2020
Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post व्यंग्य
"जनाब अवनीश धर जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
May 9, 2020
Awanish Dhar Dvivedi commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post व्यंग्य
"बहुत बहुत आभार आदरणीय सर जी।मैं एकदम नया और अज्ञ हूँ।आपके प्रोत्साहन से हौसला बढ़ेगा।आशा है कि आप सुधीजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।पुनः एकबार साधुवाद सर।"
May 8, 2020
Awanish Dhar Dvivedi commented on नाथ सोनांचली's blog post कोरोना काल पर छन्न पकैया
"बहुत सुन्दर छन्नपकैया।"
May 8, 2020
TEJ VEER SINGH commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post व्यंग्य
"हार्दिक बधाई आदरणीय अवनीश धर द्विवेदी जी।बहुत करारा व्यंग्य। जो लोग यहाँ रोटी को तरसें।मन उनका भी बोतल से हरषे। जो राशन फ्री का लाते हैं।वे दारू पर रकम लुटाते हैं।"
May 8, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Ghaziabad
Native Place
Gorakhpur
Profession
Teaching
About me
I am a Sanskrit language teacher.

               कविता
जब हो हृदय अतिशय व्यथित
मन में उठें लहरें अमिट।
तब काव्य सरिता का निकलना
शब्द के जल से द्रवित हो
अश्रु से बन धार बहना
है यही कविता का कहना।।काव्य सरिता का...

या परम सुख की घड़ी में
याद करके जिस कड़ी को।
अपने मन मन्दिर से सुंदर
शब्द गुच्छों का निकलना
काव्य सरिता का है बहना।काव्य सरिता का....

या विरह की वेदना का
जब स्वयं वर्णन हो करना।
बिन कहे सब कुछ हो कहना
शब्द की नौका पे चढ़कर
दर्द की दरिया में बहना
है यही कविता का करना।काव्य सरिता का.....

या हृदय की वेदना में
शब्दभावों की तथा सं-
कल्पना से प्राण भरना।
और समुचित छन्दमात्रा रस
गणों से प्रिय का हो श्रृंगार करना।
काव्य सरिता का.....

है यही कविता नदी का
कलकलाते बह निकलना।
और कविता की कली का
फूल सा खिलकर महकना।
काव्य सरिता का है बहना।

मौलिक एवं अप्रकाशित।

अवनीश धर द्विवेदी।।

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Awanish Dhar Dvivedi's Blog

पर्यावरण बचायें

आओ प्यारे हम सब मिलकर

पर्यावरण बचायें।

हरे भरे हम वृक्ष लगाकर

हरियाली फैलायें।1।

नदियाँ पर्वत झील बावली

और तलाब खुदायें।

महावृक्ष पीपल वट पाकड़

वृक्ष अनेक लगायें।2।

धरा धधकती धक-धक धड़कन

जन-जन की न बढ़ाएं।

पर्यावरण संतुलित होवे

ऐसे कदम उठायें।3।

प्राण वायु जल शीतल निर्मल

प्रकृति प्रेम से पायें।

आज के सुख के खातिर हमसब

भावी कल न मिटायें।4।

सोचो हम क्या देंगे अपनी

आने वाली पीढ़ी को।

सब कुछ दूषित हवा…

Continue

Posted on June 13, 2020 at 10:52pm — 2 Comments

दर्द

दिल मेरा यह हाल देख घबराता है

शहर का अब मजदूरों से क्या नाता है।

खून पसीने से अपने था सींचा जिसको

बुरे दौर में दामन शहर छुड़ाता है।

आया संकट कोरोना का देश में जबसे

सड़कों पर लाचार मनुज दिख जाता है।

जिसने चमकाया शहरों को हो लथपथ

आज वही शहरों से फेंका जाता है।

देख दर्द होता है दिल में अब अवनीश

दुनियां को रचता क्या एक विधाता है।

मेहनत करने वाला क्यूँ दर दर भटके

क्यूँ नेता साहब सेठ ऐंठ दिखलाता…

Continue

Posted on May 31, 2020 at 10:34pm — 3 Comments

"हम वाणीजन"

हम वाणी जन हैं वाणी के

कवि लेखक हैं कलमकार।

मन जिनके निर्मल कोमल से

बहती निर्झर करुणा अपार।

हर तप्त हृदय की तपनक्रिया

का करते हैं सम्मान सदा।

जो दीन-हीन दुखियारे हैं

वे अपने हैं अभियान सदा।

जिनकी वाणी में द्रवित यहाँ

होता है बल नित अबला का।

जिनकी चर्चा में दुःख रहता

है मातृशक्ति हर विमला का।

जिनकी कलमों की धार सदा

निज संस्कृति का सम्मान करें।

जिनकी चिन्ता नित बाबू जी

की परिचर्चा का ध्यान…

Continue

Posted on May 9, 2020 at 7:06pm — 1 Comment

व्यंग्य

यह हैरत यहाँ ही सम्भव है।

इस भारत में क्या असम्भव है।

जो लोग यहाँ रोटी को तरसें।

मन उनका भी बोतल से हरषे।

जो राशन फ्री का लाते हैं।

वे दारू पर रकम लुटाते हैं।

कुछ ने तो हद इतनी कर दी।

पूड़ी तक दश में धर दी।

जो कुछ था कमाया रोटी का।

उसको दारू पर लुटा दिया।

क्या खूब है हिम्मत जज़्बा भी

इन अतिशय भूखे प्यासों का।

इन विषम दिनों में भी सबने।

क्या देश के हित में काम…

Continue

Posted on May 7, 2020 at 7:00pm — 3 Comments

 
 
 

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