For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

September 2011 Blog Posts (113)

आदरणीय योगी जी व आदरणीय सौरभ जी की प्रेरणा से जनित पाँच कह-मुकरियां :



(1)

बड़े प्यार से जो दुलरावै|

हमको अपने गले लगावै|

प्रीति-रीति में हम हों बंदी|

क्यों सखि साजन? नहिं सखि हिंदी!

_________________________



(2)

अलंकार से सज्जित सोहै|

रस की वृष्टि सदा मन मोहै  |

मिल जाता है परमानन्द |

क्यों सखि साजन? नहिं सखि छंद |

__________________________

(3)

परम संतुलित जिसका भार|

गुरु लघु रूप बना आधार!  

जन-जन को है जिसने मोहा|

क्यों सखि साजन? नहिं सखि…

Continue

Added by Er. Ambarish Srivastava on September 24, 2011 at 11:00pm — 23 Comments

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

लेखक - सतीश मापतपुरी

--------------- अंक - छः  ---------------------

बम सदृश धमाका हुआ  ......................मुझे कानों पर पर विश्वास नहीं हो रहा था पर यथार्थ हर हालत में यथार्थ ही होता है. मैं शालू का प्रस्ताव सुनकर अवाक था .

"शालू ,  जानती हो तुम क्या कह रही हो ?"

"अच्छी तरह. आपने ही तो कहा था कि बार-बार कहा जाने वाला झूठ भी सच हो जाता है . आज सब लोग मुझे आपकी प्रेमिका और महबूबा कह रहे हैं . मेरे नाम के साथ आपका नाम जोड़…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 24, 2011 at 10:20pm — No Comments

सिहर जाता हूँ, ऐसा बोलता है - ग़ज़ल : वीनस केशरी

एक नई ग़ज़ल पेश -ए- खिदमत है, मुलाहिजा फरमाए

 



सिहर जाता हूँ, ऐसा बोलता है
वो बस मीठा ही मीठा बोलता है



समय के सुर में बोलेगा वो इक दिन 

अभी तो उसका लहज़ा बोलता है



ये उसकी तिश्नगी * है या तिज़ारत…
Continue

Added by वीनस केसरी on September 24, 2011 at 2:00am — 24 Comments

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

 लेखक - सतीश मापतपुरी

--------------- अंक - पांच ---------------------

उसे देखते ही शालू तीर की तरह निकल गयी

सुबह संजय से मालूम हुआ कि रात में शालू को बेहरहमी से पीटा गया है . समाज की संकीर्णता देखकर मेरा मन क्षुब्ध हो उठा .किसी लड़की का किसी लड़के से मिलने का एक ही मतलब निकालने वाला यह समाज सजग एवं सचेत रहने के नाम पर भयंकर लापरवाही का परिचय देता रहता है . शालू पर , जो अभी यौवन के पड़ाव से कुछ दूर ही थी , उसकी मां ने सुरक्षा के ख्याल…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 23, 2011 at 9:06pm — 2 Comments

चाँद छुप जाओ बादलों में अभी

    चाँद छुप जाओ बादलों में अभी, 

    कहीं ज़माने की तुम्हें नज़र न लगे।

 …

Continue

Added by Kailash C Sharma on September 23, 2011 at 7:00pm — 1 Comment

३ कह मुकरियाँ

(१)

जब आए - तो रस बरसाए

न आए - तो बड़ा सताए

कोई न ऐसा मनभावन 

ऐ सखी साजन?? न सखी सावन ।


(२)

मोरे पास - तो करे मगन

दूजे के संग - देत जलन 

न जग मे कोई वाके जैसा 

ऐ सखी साजन?? न सखी पैसा |

 

(३)

हमरे जीवन कै आधार

वो ही तो सगरा संसार

बड़ा सोच के रचिन रचैया 

ऐ सखी साजन?? न सखी मैया

Added by Vikram Srivastava on September 23, 2011 at 3:00pm — 13 Comments

सियार का अनशन-भाग 1

प्यारे बच्चों, सुनो कहानी................



एक बार की बात है. किसी जंगल का राजा एक शेर था. 

उसकी हिंसा और आतंक से सभी जानवर परेशान थे. कुछ उसका नाम सुनकर डर से कांपते थे और कुछ गुस्से से लाल हो जाते थे. सभी जीवों ने शेर का विरोध करने का मन बनाया. लेकिन आगे कौन बढ़े? जो भी पहल करता शेर उसे मारकर खा…
Continue

Added by Vikram Pratap on September 23, 2011 at 2:25pm — 1 Comment

नहीं आऊंगी

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

लेखक - सतीश मापतपुरी

--------------- अंक - चार ---------------------

 

मैं सोच नहीं पा रहा था की इस नयी परिस्थिति का किस तरह सामना करूँ . शालू जाने लगी तो मैनें उसे पकड़ कर पुनः बिठा दिया .

" शालू ,मुझे गलत मत समझो. मेरे दिल में तुम्हारे लिए अब भी वहीँ स्नेह है, पर मां की आज्ञा तुम्हें माननी चाहिए."

शालू का मेरे यहाँ आना-जाना अब काफी कम हो गया था. वह मेरे यहाँ तब ही आती थी जब उसकी मां और मधु या तो घर से बाहर हों या सो गयी…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 22, 2011 at 10:56pm — 2 Comments

कविता : सामान्य वर्ग के सामान्य बाप का सामान्य बेटा

मैं हूँ सामान्य वर्ग का एक सामान्य अधेड़

न, न, अभी उम्र पचास की नहीं हुई

केवल पैंतीस की ही है

मगर अधेड़ जैसा लगने लगा हूँ



मेरी गलती यही है

कि मैं विलक्षण प्रतिभा का स्वामी नहीं हूँ

न ही किसी पुराने जमींदार की औलाद हूँ

एक सामान्य से किसान का बेटा हूँ मैं



बचपन में न मेरे बापू ने मेरी पढ़ाई पर ध्यान दिया

न मैंने

नौंवी कक्षा में मुझे समझ में आया

कि इस दुनिया में मेरे लिए कहीं आशा बाकी है

तो वह पढ़ाई में ही है

तब मैंने पढ़ना…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 22, 2011 at 3:38pm — 17 Comments

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

 

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

लेखक - सतीश मापतपुरी

--------------- अंक - तीन  ---------------------

वह बड़ी हो चुकी थी. सदैव की भाँती एक दिन वह आकर मेरे बगल में बैठ गयी . मैं कुछ परेशान था .

"मुझसे नाराज है अंकल?" उसने पूछा .

"नहीं तो . सर में हल्का दर्द है ."  मैंने यूं ही उसे टालने के ख्याल से…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 21, 2011 at 11:26pm — 3 Comments

माँ

तेरी प्यारी सी सूरत 

ममता की मूरत 

तेरी आँखों से झरती करुणा

स्नेह का झरना

माँ! तेरी आँखों से झरती वो करुणा,

कब, मेरे अन्दर रिस गई,

मैं नहीं जान पाई?…



Continue

Added by mohinichordia on September 21, 2011 at 8:30pm — 2 Comments


प्रधान संपादक
5 कह मुकरियाँ

(१)

मेरा दिल वो मेरी धड़कन,

उसपे कुरबां मेरा जीवन !

मेरी दौलत मेरी चाहत

ऐ सखी साजन ? न सखी भारत !

---------------------------------------

(२)

अंग अंग में मस्ती भर दे

आलिम को दीवाना कर दे

महका देता है वो तन मन 

ऐ सखी साजन ? न सखी यौवन  !

---------------------------------------

(३)

मिले न गर, दुनिया रुक जाए

मिले तो जियरा खूब जलाए ! 

हो कैसा भी - है अनमोल,

ऐ सखी साजन ? न सखी पट्रोल…

Continue

Added by योगराज प्रभाकर on September 21, 2011 at 4:30pm — 59 Comments

मेरी भी समस्या का कोई तो समाधान हो

प्रभु!  नभ-जल-थल में तुम्हारा गुणगान हो,

तुमसे छुपाऊँ क्यों, तुम सर्वव्यापिमान हो! 

कैसे मैं कमाई करूँ, मुझे भी तो ज्ञान हो,

मेरी भी समस्या का कोई तो समाधान हो!

 

नियत, हैसियत प्रभु मेरी तुम जानो वैसे,

माल-असबाब यहाँ खा रहे है कैसे कैसे!

चौखट में आया तेरी, वादा चढ़ावे का ले…

Continue

Added by Subhash Trehan on September 21, 2011 at 1:30pm — 9 Comments

जीने के बहाने आ गए

सामने आँखों के सारे दिन सुहाने आ गए 

याद हमको आज वह गुज़रे ज़माने आ गए 



आज क्यूँ उन को हमारी याद आयी क्या हुआ 

जो हमें ठुकरा चुके थे हक़ जताने आ गए 



दिल के कुछ अरमान मुश्किल से गए थे दिल से दूर 

ज़िन्दगी में फिर से वह हलचल मचाने आ गए 



ग़ैर से शिकवा नहीं अपनों का बस यह हाल है 

चैन से देखा हमें फ़ौरन सताने आ गए 



उम्र भर शामो सहर मुझ से रहे जो बेख़बर 

बाद मेरे क़ब्र पे आंसू बहाने आ गए 



हैं "सिया' के…

Continue

Added by siyasachdev on September 21, 2011 at 2:19am — 7 Comments

प्रेम की सीख

बस प्रेम सिखाने आई थी ??

जो प्रेम सिखाकर जाती हो ??

ख्वाबों में आकर नींद के थैले से 

यूँ चैन चुराकर जाती हो...

 

तुमने ही सिखाया था मुझको 

सूनी…

Continue

Added by Vikram Srivastava on September 21, 2011 at 12:28am — 4 Comments

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

नहीं आऊंगी ( धारावाहिक कहानी)

                   लेखक - सतीश मापतपुरी

--------------- अंक - दो ---------------------

तब मैं बी. ए. पार्ट -1 का छात्र था जब वर्माजी मेरे मकान में बतौर किरायेदार रहने आये थे . वे पिताजी का एक सिफारिशी खत अपने साथ लाये थे कि वर्मा जी मेरे आज्ञाकारी छात्र रहे हैं, बगलवाले फ्लैट में इनके रहने की व्यवस्था करा देना . मुझे भला क्यों आपत्ति होती . वर्माजी रहने लगे और मैं…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 20, 2011 at 11:00pm — No Comments

बोध कथा: शब्द और अर्थ -- संजीव 'सलिल'



बोध कथा:

शब्द और अर्थ 

संजीव 'सलिल'

*

शब्द कोशकार ने अपना कार्य समाप्त होने पर चैन की साँस ली और कमर सीधी करने के लिये लेटा ही था कि काम करने की मेज पर कुछ हलचल सुनाई दी. वह मन मारकर उठा, देखा मेज पर शब्द समूहों में से कुछ शब्द बाहर आ गये थे. उसने पढ़ा - वे शब्द थे प्रजातंत्र, गणतंत्र, जनतंत्र और…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on September 20, 2011 at 2:30am — 3 Comments

'रिश्तो का सच'

मां की ममता, पिताजी का त्याग,

बहन की समझदारी, भाई का प्यार!

क्या यही है रिश्तो की बुनियाद,

ये रिश्ते कभी नहीं होते बेकार!

माँ की ममता हमारे दुख भूलती,

हमको हमेशा सही राह दिखाती!

पिताजी कात्याग देता देता अनुशासन का पाठ,

बनता है हमको और भी महान!

बहन की समझदारी हमें हमेशा हौसला दिलाती,…

Continue

Added by Smrit Mishra on September 20, 2011 at 1:14am — 1 Comment

नहीं आऊँगी (कहानी )

नहीं आऊँगी (कहानी )

           लेखक - सतीश मापतपुरी

----------------- अंक - एक --------------------

मैं जब कभी बरामदे में बैठता हूँ , अनायास मेरी निगाहें उस दरवाजे पर जा टिकती है, जिससे कभी शालू निकलती थी और यह कहते हुए मेरे गले लग जाती थी - " अंकल, आप बहुत अच्छे हैं."

         कई साल गुजर गए उस  मनहूस घटना को बीते हुए. वक़्त ने उस घटना को अतीत का रूप तो दे दिया, किन्तु ...............  मेरे लिए वह घटना आज भी ................. शालू की यादें शायद कभी भी मेरा पीछा…

Continue

Added by satish mapatpuri on September 20, 2011 at 12:43am — No Comments

हमसफ़र

बस दो कदम और साथ आओ तो सही
साथ चलने का वादा निभाओ तो सही

तुम ही कहते थे चलोगे साथ मेरे सदा
और कहते थे "कभी आजमाओ तो सही"

इतना बड़ा सफ़र देखो बातों में कट गया
चुप न रहो, गीत कोई सुनाओ तो सही

रूठ कर मुँह न फेरो ऐ मेरे हमसफ़र
हुई है क्या खता ये बताओ तो सही

था ये मुश्किल सफ़र, राह थी बड़ी कठिन
सामने है अब मंज़िल, मुस्कुराओ तो सही

हो जायेगा "विक्रम" आसान हर सफ़र
कोई हाथ हाथों में लेकर कदम बढाओ तो सही

Added by Vikram Srivastava on September 19, 2011 at 9:59pm — 3 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted blog posts
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, गज़ल पर हुए मेरे प्रयास को सराहने के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, हार्दिक आभार आपका. बहुत कम ही  होता है जब मैं गज़ल पर प्रयास…"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"हर्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।"
2 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है
"आद0 अमीरुद्दीन अमीर जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर इस्लाह का बहुत बहुत शुक्रिया। आपके बताए जग्गो पर…"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल की सराहना के लिए कपटी कोटि आभार आपका "
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। बेहतरीन लघुकथा लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post राजन तुम्हें पता - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। उस्ताद ए मुहतरम की बातों का…"
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, अचछी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। कुछ…"
12 hours ago
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post वहाँ एक आशिक खड़ा है ।
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आपको भी अदब भरा प्रणाम आदाब सलाम , जी आपके मार्गदर्शन के…"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dimple Sharma's blog post वहाँ एक आशिक खड़ा है ।
"मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी, आदाब। छोटी बह्र में बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें, मगर ये…"
14 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service