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बस दो कदम और साथ आओ तो सही
साथ चलने का वादा निभाओ तो सही

तुम ही कहते थे चलोगे साथ मेरे सदा
और कहते थे "कभी आजमाओ तो सही"

इतना बड़ा सफ़र देखो बातों में कट गया
चुप न रहो, गीत कोई सुनाओ तो सही

रूठ कर मुँह न फेरो ऐ मेरे हमसफ़र
हुई है क्या खता ये बताओ तो सही

था ये मुश्किल सफ़र, राह थी बड़ी कठिन
सामने है अब मंज़िल, मुस्कुराओ तो सही

हो जायेगा "विक्रम" आसान हर सफ़र
कोई हाथ हाथों में लेकर कदम बढाओ तो सही

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Comment

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Comment by Vikram Srivastava on September 20, 2011 at 5:19pm

अश्विनी जी, सतीश जी, मोहिनी जी ॥आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया॥:)

Comment by mohinichordia on September 20, 2011 at 9:06am

बहुत खूब विक्रम श्रीवास्तव जी |सफर सुहाना हो जाता है जब कोई मनपसंद साथी  साथ चले |

Comment by satish mapatpuri on September 19, 2011 at 11:31pm

इतना बड़ा सफ़र देखो बातों में कट गया
चुप न रहो, गीत कोई सुनाओ तो सही

ख्याल अच्छे है विक्रम जी, बधाई

 

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