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Satyanarayan Singh
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Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हृदय से आभार सादर"
Sunday
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी इस प्रयास पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हृदय से आभार सादर"
Sunday
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"आदरणीया अनामिका जी प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया एवं त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित करने हेतु आपका हृदय से आभार"
Sunday
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"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हृदय से आभार"
Sunday
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"आदरणीय आशिफ ज़ैदी जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद"
Sunday
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी प्रदत्त चित्र पर कुंडलियां एवं सार छंद में सुंदर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय सादर"
Sunday
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"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी सुन्दर प्रस्तुति हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय"
Sunday
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"आदरणीया अनामिका जी  प्रदत्त चित्र के भाव को परिभाषित करता सार छंद आथारित अनुपम गीत के सृजन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Sunday
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"आदरणीय सतविंदर जी प्रदत्त चित्र के भाव को परिभाषित करती दोनों कुंडलियां लाजवाब हुई हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें सतविंदर कह मार्ग, एक होता मन चाहा। लेकिन देखो चार, दिखाये है चौराहा।। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सादर"
Sunday
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"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी कुंडलिया छंद में आपकी दूसरा प्रयास  सराहनीय है  शिल्प को एकबार देख लें  आदरणीय अशोक रक्ताले जी ने सुंदर सुझाव दिये हैं  सादर"
Sunday
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी प्रदत्त चित्र पर  सार छंद में सुंदर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Sunday
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी सार छंद में प्रदत्त चित्र के अनुकूल सुंदर भावाभिव्यक्ति हुई है सादर बधाई स्वीकारें आदरणीय तथा आयोजन का शुभारंभ आपकी इस प्रस्तुति से हुआ है अतएव विशेष बधाई स्वीकार करें सादर"
Sunday
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"कुंडलिया छंद होते रौनक शहर की, तथा नगर की शान।खड़े दिखे हर मोड़ पर, बना एक पहचान।।बना एक पहचान, सभी चौराहे अपनी।राहगीर को राह, दिखाते हरदम सजनी।।जन मन की अभिव्यक्ति, हदय अपने सँजोते।धरणा सभा जुलूस, यहाँ आये दिन होते।। करते अभिवादन दिखे, बाँह पसारे…"
Sunday
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-103
"आदरणीय डॉ छोटेलाल जी प्रदत्त विषयानुकूल सुंदर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें संघर्षों में टूट गया जो,कभी न बनती बातझंझावातों से टकराये, मिलती है सौगात... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सादर"
May 10
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-103
"आदरणीय हरिहर झा जी प्रदत्त विषयानुसार बहुत सुंदर प्रस्तुति हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
May 10
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-103
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी प्रदत्त विषय पर सार्थक ग़ज़ल कही है आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें सोच ले पहले जबरदस्ती तू करना बाद में किस ने जीता दिल किसी का है भला संघर्ष से । वाह लाजवाब "
May 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Kalyan (Mumbai) महाराष्ट्र
Native Place
Pratapgarh Uttar Pradesh
Profession
State Government Service
About me
passionate about poem

Satyanarayan Singh's Blog

अबला नहिं आज रही महिला

दुर्मिल सवैया

अबला नहिं आज रही महिला, सबला बन राज करे जगती।

मुहताज नहीं सब काज करे, मन ओज अदम्य सदा भरती ।।

धरती नभ नाप रही पल में, प्रतिमान नये नित है गढ़ती।

यह बात सभी जन मान गये, अब नार नहीं अबला फबती।१।

परिधान हरा तन धार खुशी, ललना गल धीरज हार गहा।

सिर बाँध दुकूल उमंग नया, मन केशरिया रँग आज लहा।।

शुभ कंगन साहस हाथ भरा, मुख आस सुहास विराज रहा।

पथ उन्नति एक चुना उसने, बिसरे सब पंथ विराग…

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Posted on June 25, 2018 at 8:26pm — 13 Comments

जताएं मातृ दिन पर हम

विधाता छंद 

जताएं मातृ दिन पर हम.....

जगत में मात के जैसा,नहीं दूजा दिखा भाई !

कहो माता कहो मम्मी, कहो चाहे उसे माई  !

पुकारे बाल माँ जब भी, तुरत वह दौडकर आई !

बुरा माना नहीं उसने, कभी मन बाल रुसवाई …

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Posted on May 13, 2018 at 3:30am — 4 Comments

कह-मुकरियाँ

कह-मुकरियाँ

जाऊँ जहाँ वहीं वह  होले,

संग संग वह मेरे डोले,

जीवन उसके बिना अलोन,

क्यों सखि साजन ? ना सेल फोन !

 

हाल चाल सब रखता मेरा,

हमदम सा वह मीत घनेरा,

मै कश्ती तो  वह है साहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

 

चहल पहल वह रौनक लाये,

महफिल में भी रंग जमाये,

उसके बिन जीवन है काहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

.

मौलिक व अप्रकाशित

 

 

 

Posted on May 1, 2018 at 3:00pm — 6 Comments

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो, अहा! मछली दबोचे है|

फँसी खग कंठ में मछली, पड़े तन पर खरोंचे हैं ||

विहग औ मीन दोनों इक, सरीखे ही अबोले हैं |

मगर इक हर्ष दूजी भय, सँजोये आँख बोले हैं |१ |

उदर की भूख मिट जाए, यही चाहत विहग पाले |

वहीं पर मीन के देखो, पड़े हैं जान के लाले ||

सलामत जान की अपने, खुदा से चाहती मछली |

निवाला छूट ना जाए, यही मन सोचती बगुली |२ |



मौलिक और अप्रकाशित…



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Posted on March 30, 2018 at 1:30pm — 12 Comments

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At 1:02pm on October 27, 2016, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जनम दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं आपको श्री सत्यनारायण सिंह जी | प्रभु आपको सदा सुखी और स्वस्थ रखे | ज्योतिर्मय पर्व की भी अग्रिम मंगल कामनाए | शुभ शुभ !

At 7:27pm on October 27, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सत्य नारायन जी

बार बार यह दिन आये i  ढेरो सी खुशिया लाये i

सादर i

At 4:41pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 10:32am on October 27, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें आदरणीय सत्यनारायण जी.."

At 9:13am on September 2, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

नारायण भाई- सप्रेम राधे- राधे॥ सावन -गीत को दिल से पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद॥

 
 
 

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