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Mohammed Arif
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Latest Activity

Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"सर से पानी कहीं हो जाए न ऊंचा देखो |एक क़ातिल बना बैठा है मसीहा देखो |बहुत ख़ूब ! बहुत अच्छा तंज़ है ।    शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आयोजन में सहभागिता हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय दंडपाणि जी ।"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब,                       बेहतरीन ग़ज़ल और अच्छा प्रयास । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"इस हक़ीक़त को फ़रामोश न करना देखोजीत होती है मियाँ सच की हमेशा देखो। सच है , सच है । सच परेशाँ हो सकता है परंतु पराजित नहीं । हर कालखंड में सच जीता है । बहुत ही बढ़िया शे'र । हो गया जैसे ही इक्कीस बरस का देखोबाप को आँख दिखाने लगा बेटा देखो । वाह!…"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ये भरम तो न रखो साथ निभाएगा कोई    वक़्त से पहले बदलता है ज़माना देखो! बहुत सच है । इस ज़माने में आज कौन साथ निभाने को बैठा है । सब अपनी-अपनी बेवफ़ाई के तसव्वुर में लगा है । “नूर जी” खेल समझना है अगर क़ुदरत काशाख़ से टूट के…"
Friday
Mohammed Arif commented on rajesh kumari's blog post लाएँगी खुशियाँ तभी जीवन में उल्लास (गीत )
"आशा, विश्वास, उल्लास, हास परिहास और जीने का जज़्बा जगाता बहुत भी बेहतरीन गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करेन आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Usha Awasthi's blog post कितने रोगों से बच जाते
"आलरणीया ऊषा अवस्थी जी आदाब, बहुत ही साधारण अंदाज़ की कविता । नोटों के बदले सिक्कों की महिमा का बखान करती कविता । काश ! बिम्बों-प्रतीकों का भी प्रयोग देखने को मिलता । बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"आदरणीय राम शिरोमणि जी आदाब, बहुत ही रोमाण्टिक अंदाज़ की ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । जमाने/ज़माने देखिएगा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आदरणीया राजेश कुमारी जी की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आदरणीय गणेश जी आदाब, नवोदित सत्ता से काफी उम्मीदें थी मगर यह भी झूठी साबित होती नज़र आ रही है । महंगाई रोकने में बिल्कुल नाकारा सिद्ध हो गई है । हरदिन नया विज़न लाती है और मीठे-मीठे स्वप्न दिखलाती है । सत्ता के प्रति गहरी टीस पूरी ग़ज़ल में देखी जा सकती…"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बोलती निगाहें (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                     अत्यंत सामयिक-प्रासंगिक लघुकथा । कथा में जीवंतता भी है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 21
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                                    पौराणिक प्रसंग को आधार बनाकर स्त्री की मनोदशा मेंं झाँकने का अच्छा प्रयास किया आपने । यह लघुकथा…"
May 21
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ग़ुलामी बहुआयामी (अतुकान्त कविता)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                      डिज़िटल आँधी ने सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया है । हम सबकुछ भूल गए हैं । आपकी अबतक की…"
May 21
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,                                   प्रदत्त चित्रानुकूल सटीक और सारगर्भित शब्द निरूपण । इसमें चिंता भी है, शिकायत भी है और शिक्षा…"
May 19
Mohammed Arif commented on ram shiromani pathak's blog post दोहे(विविधा)
"आदरणीय राम शिरोमणि जी आदाब,                           समसामयिक विषयों पर लिखें गए थोकबंद दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।      नोट:- एक साथ इतनी संख्या मेंं…"
May 18
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी आदाब,                             प्रदत्त चित्र को आधार बनाकर रचे गए चौपई छंद वाकई बेजोड़ और सटीकता लिए हुए हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 18
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब,                          प्रदत्त चित्रानुकूल सटीक और सारगर्भित चित्रण । पढ़कर अच्छा लगा । दूसरे छंद में रची गई रचना भी लाजवाब । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।…"
May 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain M.P.
Native Place
Ujjain
Profession
Teacher
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लघुकथा--शगुन

विवाह में शामिल होने आए दोस्त , रिश्तेदार क़रीबी और परिवार के सदस्य सभी यह जानने के बड़े उत्सुक थे कि आख़िर राहुल मंच से ऐसी क्या घोषणा करेगा जिससे उसकी शादी हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन जाएगी । प्रीतिभोज से निवृत्त होकर सभी मेहमान मंच के सामने एकत्रित हो गए । राहुल अपनी जीवन संगिनी वर्षा का हाथ थामे मंच पर उपस्थित हुआ । हाथ जोड़कर दोनों ने सबका अभिवादन किया और कहा-" साथियों , आप सभी का आभारी हूँ कि आपने अपनी गरिमामयी उपस्थित देकर मेरा मान बढ़ाया । ज़्यादा कुछ नहीं कहूँगा । आज के इस विवाह आयोजन को…

Continue

Posted on May 1, 2018 at 10:30am — 10 Comments

लघुकथा--बोध

प्रसंग था 'दशा और 'बोध ' किसे कहते हैं ? जिज्ञासु और दार्शनिक के बीच इस विषय को लेकर काफी वाद-विवाद चला । जिज्ञासु दार्शनिक के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रहा था । अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर जिज्ञासु अभिभूत हो गया । दार्शनिक ने उंगली से चींटियों के जाते हुए झुण्ड की ओर इशारा कर दिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 23, 2018 at 9:00am — 16 Comments

कविता -- अनकही ख़ामोशियाँ



अनकही ख़ामोशियाँ

बहुत कुछ कहती है

उनका शोर बहुत दूर तक सुनाई देता है

उन ख़ामोशियों की ज़मीन पे

बीज अंकुरित होते हैं

बहुत कुछ कहने के

मगर अनकही ख़ामोशियाँ

ख़ामोश बनकर रह जाती है

जैसे हड़ताल की अधूरी रह जाती है माँगें

जो कभी पूरी नहीं होती है

और माँगें हड़ताल को चलाती है

अतीत की स्मृतियों को भी

दबाती है अनकही ख़ामोशियाँ

धीरे-धीरे अनकही ख़ामोशियाँ

कब भीतर की तपिश बन जाती है

पता ही नहीं चलता है

यह तपिश

लावा बनकर फूट पड़ती है…

Continue

Posted on April 8, 2018 at 9:06am — 12 Comments

लघुकथा--हठ


एक दिन तंग आकर ज़िंदगी मौत से बोली-" आख़िर तू मुझे कब तक डसती रहेगी ?"
मौत खिलखिलाकर बोली-" जब तक तू जीने की हठ करती रहेगी ।"

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 1, 2018 at 9:00am — 8 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 8:39pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ मोहम्मद साहब प्रणाम
बहुत शुक्रिया
आपकी सलाह पर तुरंत अमल होगा
At 8:57am on March 6, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ सर
आपको कविता अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया
At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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