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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post विषाक्त उजाले :
"बहुत ही उम्दा कविता है आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Jul 2
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"संक्षिप्त लेकिन उम्दा लघुकथा। हार्दिक बधाई इस उत्कृष्ट प्रस्तुति पर आदरणीया प्रतिभा जी। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"अच्छी लघुकथा है आदरणीया अर्पणा जी। पर मुझे लगता है कि कथ्य को अभी थोड़ा और उभारे जाने की आवश्यकता है। मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए, सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"सरकारी नौकरों की व्यथा पर उत्कृष्ट लघुकथा लिखी है आपने आदरणीय विरेंदर वीरमेहता जी। दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"राजनीति के सभी समीकरणों का अन्तिम लक्ष्य येन केन प्रकारेण कुर्सी प्राप्त करना है। इस विषय पर बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीय विनय कुमार जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"अच्छी लघुकथा है आदरणीया बरखा जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। आदरणीय योगराज सर की टिप्पणी से मैं भी सहमत हूँ। आपकी संशोधित लघुकथा मैंने पढ़ी है पर मुझे लगता है कि उसमें अभी और सुधार हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी लघुकथा का शीर्षक अभी भी लघुकथा…"
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आदरणीय आशीष जी, आपकी कथा को संशोधित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। शायद आपको यह प्रयास पसन्द आये। सादर।  सही-ग़लत के चक्रव्यूह में उलझी हुई सीमा अपने अतीत में खोयी हुई थी।  उस वक़्त उसकी बेटी गौरी आठ साल की थी। पति के असमय गुज़र जाने पर…"
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"त्वरित मार्गदर्शन हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर। अपेक्षित सुधार करता हूँ। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की पोल बहुत अच्छे से खोली है सर आपने। धंधे का गुणागणित हर जगह हावी है। व्यक्तिगत तौर पर मुझे यह लघुकथा बेहद पसन्द आयी। मैं स्वयं भी इस विषय पर काफ़ी दिनों से लिखने के लिए सोच रहा था। इस उम्दा लघुकथा पर दिल से ढेर सारी बधाई…"
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"अच्छी संदेशप्रद लघुकथा है आदरणीय नीलम उपाध्याय जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं जैसे : //बड़ी बहू ने आवाज लगायी।// उन्हें देख लीजिएगा। साथ ही, किलोमीटर देने की भी मेरे ख़याल से कोई आवश्यकता नहीं थी वो भी दोनों के लिए…"
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"मुझे इसका अंदेशा था सर, इसीलिए लघुकथा लिखते समय मैं बड़े असमंजस में था कि इसे किस तरह रखूँ। एक चीज़ और आपसे जानना चाहूँगा सर कि संवाद से इतर क्या इसे व्याख्यान के रूप में रखा जा सकता है? यदि नहीं तो क्या एक ही लम्बे संवाद की अपेक्षा तीन-चार छोटे…"
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपकी इस उत्साहवर्धक और समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए हृदय से आभारी हूँ आदरणीय आशीष जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीया बबिता जी। हार्दिक आभार। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर। आपकी इस टिप्पणी के लिए हृदय से आभारी हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आभारी हूँ आदरणीया बरखा जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर। "
Jun 30
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"धन्यवाद आदरणीया कनक हरलालका जी। हार्दिक आभार। सादर। "
Jun 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

कवि (अतुकान्त कविता)

संवेदनाओं की पथरीली चोटी पर बैठकर

अपने रिसते हुए घावों को देखता हुआ

ये कौन है

जो कभी कुत्ते की तरह

जीभ से उन्हें चाटता है

तो कभी मुट्ठी में नमक भर कर

उनमें उड़ेल देता है

और फिर एक तपस्वी की तरह

ध्यान लगाकर सुनता है

अपनी आहों और कराहों को?

पत्थरों को उठा कर

अपने लहू में डुबा कर

भावनाओं की लहरों पर बैठे हुए

कौन लिख रहा है उनसे

अपना मृत्यु लेख?

किसी फन्दे पर लटक कर

एक पल में शान्ति से गुज़र जाने की अपेक्षा…

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Posted on June 27, 2018 at 9:03am — 4 Comments

शहीद (लघुकथा)

संसद भवन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हुए उन युवाओं को दो महीनों से अधिक का समय हो गया था पर न तो किसी अख़बार में इसकी कोई ख़बर थी और न ही न्यूज़ चैनल्स पर चर्चा। 

“इन बेरोज़गार लौंडों के पास अब कोई काम नहीं रह गया है।” बड़ी-बड़ी मूँछों वाले उस स्थानीय बुज़ुर्ग ने अपने पास खड़े अधेड़ से कहा। “कुछ नहीं मिला तो सरकार को ही बदनाम करने में लग गए।”

“कह क्या रहे हैं ये लोग?” अधेड़ ने जिज्ञासा व्यक्त की।

“कह रहे हैं कि जब देश की जनता भूखों मर रही है तो कोई…

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Posted on June 25, 2018 at 4:30pm — 9 Comments

मानव सभ्यता का इतिहास (लघुकथा)

“कितने हसीन थे वो दिन जब पूरे आसमान पर अकेले मेरा राज हुआ करता था।” अपनी पतंग को माँझे से बाँधते हुए छोटा सा वह लड़का अपने सुनहरे अतीत में खो गया। 

अपने मोहल्ले में तब वो अकेले ही पतंग उड़ाने वाला हुआ करता था। न तो उसे कोई रोकने वाला था और न ही टोकने वाला। वह पूरी तरह से स्वतंत्र था। उस वक़्त उसकी बस एक ही हसरत होती, “एक दिन अपनी पतंग चाँद तक ले जाऊँगा।”

मगर यह ज़्यादा दिन चला नहीं। धीरे-धीरे उसके मोहल्ले में दूसरे पतंगबाज़ भी आने लगे। उनके आते ही आसमान में…

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Posted on June 22, 2018 at 5:37pm — 8 Comments

बलि (लघुकथा)

“तुम चिन्ता मत करो। मैं तुम्हें कल ही उस नर्क से दूर ले जाऊँगा।”

आज से कई दिन पहले। “ये आदमी नहीं जानवर है।” पाखी ने अपने पिता से एक बार फिर कहा। “मुझसे रोज शराब पी के मारपीट करता है। वो भी बिना किसी बात के। बस आप मुझे यहाँ से ले जाइए।”

“शादी के बाद ससुराल ही लड़की का असली घर होता है बेटी। थोड़ा सहन करो। समय सब ठीक कर देगा।” और पिता ने एक बार फिर वही जवाब दिया।

“माँ, तुम तो मुझे समझो। या तुम भी पिता जी की तरह?” पर माँ भी समझने से ज़्यादा समझाने पर…

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Posted on June 20, 2018 at 6:14pm — 6 Comments

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