For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
Share

बसंत कुमार शर्मा's Friends

  • santosh khirwadkar
  • Prakash Chandra Baranwal
  • C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"

बसंत कुमार शर्मा's Groups

 

बसंत कुमार शर्मा's Page

Latest Activity

Niraj Kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आदरणीय बसंत जी, मतले का पहला मिसरा क्लासिकल उर्दू शायरों की याद दिलाता है. आपने बाकी ग़ज़ल में भी इस अंदाज़ को बरकरार रखते हुए हिंदी शब्दों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया है. दाद के साथ मुबारकबाद. सादर  "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका , सादर नमन "
21 hours ago
बसंत कुमार शर्मा and C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" are now friends
Friday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय   बृजेश कुमार 'ब्रज' जी दिल से शुक्रिया आपका "
Sep 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय Ajay Kumar Sharma जी आभार आपका "
Sep 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आपके आशीष को सादर नमन "
Sep 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय Samar kabeer जी मार्गदर्शन हेतु दिल से शुक्रिया आपका "
Sep 6
Ajay Kumar Sharma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"सुन्दर गजल."
Sep 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय"
Sep 2

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय बसंत भाई अच्छी गज़ल कही है बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 2
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"मतले के ऊला मिसरे में,तीसरे,पांचवें,छटे,और सातवें शैर में क़ाफ़िया बदलना होगा ।"
Sep 2
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय    Samar kabeer जी ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया दिल से ,मतले का काफिया या बाकी में भी कुछ काम    करना पड़ेगा ?, मार्गदर्शन करें "
Sep 2
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय Mohammed Arif   जी ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया दिल से "
Sep 2
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय  Ram Awadh VIshwakarma  जी ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया दिल से "
Sep 2
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय  ajay sharma जी ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया दिल से "
Sep 2
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो
"आदरणीय  ajay sharma जी ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया दिल से "
Sep 2

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

मापनी 1222 1222 1222 1222

इधर  जाता तो अच्छा था, उधर जाता तो अच्छा था.

रहा भ्रम में, कहीं पर यदि, ठहर जाता तो अच्छा था.

 

उभर आता तो अच्छा था, हृदय का घाव चेहरे पर,

हमारा  दर्द  भी हद से, गुजर जाता तो अच्छा था.

 …

Continue

Posted on September 17, 2017 at 5:30pm — 14 Comments

वादों की बरसात न कर

मापनी  २२ २२ २२ २ 

इतनी ज्यादा बात न कर

वादों की बरसात न कर



टूट न  जाए नाजुक दिल,

उससे भीतरघात  न कर



ख्यात न हो, कुछ बात नहीं,…

Continue

Posted on September 15, 2017 at 8:30pm — 17 Comments

एक ग़ज़ल- दिल को लगते बहुत भले हो

मापनी २२ २२ २२ २२

 

सुबह के’ मंजर से उजले हो,

दिल को लगते बहुत भले हो.

 

एक नजर देखा है जब से,

सपने जैसा दिल में’ पले हो.

 

सारी दुनिया जान गयी है,

तुम तो नहले पर दहले हो…

Continue

Posted on August 31, 2017 at 7:08pm — 17 Comments

एक नवगीत - सूरज सन्यास लिए फिरता

अँधियारे गद्दी पर बैठा,

सूरज सन्यास लिए फिरता

 

नैतिकता सच्चाई हमने,

टाँगी कोने में खूँटी पर.

लगा रहे हैं आग घरों में,

जाति धर्म के प्रेत घूमकर.

सत्ता की गलियों में जाकर,

खेल रही खो-खो अस्थिरता.

 …

Continue

Posted on August 26, 2017 at 7:16pm — 17 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश भाई , मुस्काई लफ्ज़ मेरे खयाल से सही है ... कविता और गीत के अलावा  ''…"
1 minute ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari posted a blog post

भले ही आईने धोये हुए हैं (फिल्बदीह ग़ज़ल 'राज')

१२२२  १२२२  १२२चढ़े सूरज तलक सोए हुए हैंकिसी की याद में खोए हुए हैं ग़ज़ल लिक्खी हुई है आंसुओं सेकहें…See More
3 minutes ago
surender insan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"वाह बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई सुरेन्द्र जी। बहुत बहुत बधाई हो जी । सादर नमन जी"
5 minutes ago
Niraj Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post दायरा
"आदरणीय महेंद्र जी, मुझे आश्चर्य है कि इस रचना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है. इस विषय को कथा में…"
7 minutes ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"चाँद बनकर वो निखर जाएंगे । शाम होते ही सँवर जाएंगे ।। जख्म परदे में ही रखना अच्छा । देखकर लोग सिहर…"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय कालीपद जी सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई। "
21 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"शुक्रिया  आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुश क्षत्रप'जी  , सादर "
35 minutes ago
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"थोड़ा व्यस्त हूँ अभी,जल्द ही आता हूँ ।"
37 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर  साहिब , आदाब , आप विन्तुवत सलाह देते आये हैं मुझे और मैं उसी के मुताबिक सुधार…"
41 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब ,आदाब , इन्तेजार यही है कि गुणी जन विन्दुवत सुधार के लिए सलाह दें तो कुछ…"
47 minutes ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जय हे काली
"धन्यवाद सुरेंद्र नाथ जी।"
52 minutes ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जय हे काली
"धन्यवाद समर जी।"
53 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service