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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय..हार्दिक बधाई"
8 hours ago
laxman dhami commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लगती रही फिर भी भली
"बहुत सुंदर गीत हुआ है भाई बसंत जी हार्दिक बधाई ।"
8 hours ago
laxman dhami commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"बहुत सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
8 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"आदरणीय रवि शुक्ला जी आपकी हौसला अफजाई और सुझाव दोनों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, यूँ ही स्नेह बनाये रखें. सादर"
14 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । बाक़ी जनाब रवि जी बता ही चुके हैं ।"
14 hours ago
Ravi Shukla commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"आदरणीय बसंत सर बहुत अच्‍छी बहर चुनी आपने अपने अशआर के लिये और उतने ही अच्‍छे अशआर कहे आपने । तीसरे शेर का सानी मिसरा कुछ और बेहतर हेा सकता है । एक त्‍वरित सुझाव के रूप में ( होती है जा ब जा क्‍यूँ सियासत यहॉं हुजूर ) पर विचार कर…"
16 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलातमापनी २२१/२१२१/१२२१/२१२ करते नहीं हैं’ लोग शिकायत यहाँ हुजूर,थोड़ी तो’ हो रही है’ मुसीबत यहाँ हुजूर.बिकने लगे हैं’ राज सरे आम आजकल,चमकी खबरनबीस की’ किस्मत यहाँ हुजूर.बिछती कहीं है’ खाट, कहीं टाट हैं बिछे,हो हर जगह रही है’ सियासत यहाँ हुजूर.पलते रहे हैं’ देश में जयचंद हर जगह,पहली नहीं है’ आज ये’ आफत यहाँ हुजूर.मिल तो गई हैं कुर्सियाँ सबको बड़ी बड़ी,मुश्किल मगर दिलों पे’ हुकूमत यहाँ हुजूर"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
16 hours ago
Ravi Shukla commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"आदरणीय बसंत सर आपने हमारे कहे को मान दिया उसके लिये आभार आदरणीय समर साहब पहले ही आपकी गजल पर आ चुके है शहादत किस अर्थ में आपने लिया है ये सार्थक प्रश्‍न है । अगर आप माने तो इस शेर में तकाबुले रदीफ भी हो गया है । आपके भाव के थोड़ा सा आस पास इनायत…"
16 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on surender insan's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब "
17 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लगती रही फिर भी भली
"आदरणीय vijay nikore जी हौसला अफजाई के लिए आपका दिल से शुक्रिया "
17 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"ग़ज़ल अछि हो गई है :- 'आसमाँ ने कहाँ शहादत की' 'शहादत'शब्द के दो अर्थ हैं,एक तो धर्म या वतन पर जान क़ुर्बान करना,दूसरा किसी बात की गवाही देना, आपका मिसरा इन अर्थों में नहीं है,इसे बदलने का प्रयास करें ।"
18 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी आबाद मुहब्बत को मिटाने वाले
"वाह  बहुत खूब , सुंदर "
20 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, आदरणीय रवि शुक्ला जी, आदरणीय समर कबीर जी, आदरणीय मोहित मिश्रा जी  आप सबके स्नेह का आभारी  हूँ , आपके सुझावों के उपरान्त और थोड़ी मेहनत की है पुनः आपके समक्ष प्रस्तुत है  कब किसी से यहाँ मुहब्बत की.   जब…"
20 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Ravi Shukla's blog post गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत
"मुग्ध हूँ पढ़कर, देशभक्ति और उर्जा से भरपूर लाजबाब गीत के लिए बहुत बहुत बधाई आपको  आदरणीय रवि शुक्ला जी "
21 hours ago
Mohit mishra (mukt) commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी अच्छी कोशिश रही | महानुभावों द्वारा सुझाए गए बातों का ख्याल रखते हुए प्रयास करते रहिए | आपसे इससे कहीं ज्यादा बेहतरी की उम्मीद है | सादर "
yesterday
vijay nikore commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लगती रही फिर भी भली
"// अनगिनत ठहराव आये, बोझ कम ज्यादा हुआ. पर हमें रुकना नहीं है, रोज ये वादा हुआ.// बहुत ही सुन्दर भाव । हार्दिक बधाई, आदरणीय बसंत जी"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलात

मापनी २२१/२१२१/१२२१/२१२

 

करते नहीं हैं’ लोग शिकायत यहाँ हुजूर,

थोड़ी तो’ हो रही है’ मुसीबत यहाँ हुजूर.

बिकने लगे हैं’ राज सरे आम आजकल,

चमकी खबरनबीस की’ किस्मत यहाँ हुजूर.

बिछती कहीं है’ खाट, कहीं टाट हैं बिछे,

हो हर जगह रही है’ सियासत यहाँ हुजूर.

पलते रहे हैं’ देश में जयचंद हर जगह,

पहली नहीं है’ आज ये’…

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Posted on July 26, 2017 at 1:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की

कब किसी से यहाँ मुहब्बत की.  

जब भी' की आपने सियासत की.

 

प्यार  पूजा  सदा  ही हमने तो,

आपने कब इसकी इबादत की

 

जुल्म  धरती ने सह लिए सारे,

आसमां  ने मगर बगावत की

 

आदमी आदमी  से  जलता है,

कुछ कमी है यहाँ जहानत…

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Posted on July 25, 2017 at 10:10am — 7 Comments

लगती रही फिर भी भली

जिन्दगी की रेलगाड़ी,

भागती सरपट चली.

 

मिल न पायीं दो पटरियाँ,

साथ पर चलती रहीं.

देख कर अपनों की खुशियाँ,

दीप बन जलती रहीं.

 

दे गयी राहत सफर में,

चाय की इक केतली.

 

मौसमों की मार…

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Posted on July 23, 2017 at 1:11pm — 8 Comments

क्या बस निंदा काफी है

निर्दोषों के हत्यारों की,

क्या बस निंदा काफी है.

घाटी में आतंकी मिलकर,

दिखा रहे हैं दानवता.

हृदय विलखता लिए हुए हम,

ओढ़े बैठे सज्जनता.

तड़प रही है भारत माता,

जयचंदों को माफ़ी है.

जाति धर्म की राजनीति में,

इंसान हो रहा गायब.

चमचों की कोशिश रहती है,

रहे हमेशा खुश साहब.

भोली जनता को गोली है,

पल पल नाइंसाफी है.

टूट गए हैं सारे…

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Posted on July 18, 2017 at 4:52pm — 12 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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