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समस्या - समाधान ( लघु-कथा ) -- डॉo विजय शंकर

राजा बहुत चिंतित था। चिंतायुक्त विचार विमर्श के लिए वह अपने राजपरिवार के गुरु जी के पास निर्जन वन में गया। कुशल क्षेम के बाद बोला , " गुरु जी , मेरे राज्य में बहुत से बाबा हो गए हैं , प्रजाजन भी उनके पास अक्सर जाते हैं , उनसे आशा करते हैं कि वे परलोक छोड़ इहि लोक में भी उनका कल्याण करेंगे ? क्या ये सही है , वे क्यों जाते हैं ? "
गुरु जी बोले , " क्योंकि तुम उनका अभीष्ट कल्याण नहीं करते हो ,तुम उनका कल्याण करो। फिर देखो।"

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on October 19, 2016 at 9:30am
आदरणीय सुरेश कुमार कल्याण जी , कहानी आपको अच्छी लगी , आभार ह्रदय से , प्रशस्ति के लिए धन्यवाद , सादर।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 18, 2016 at 1:00pm
आदरणीय डॉ विजय शंकर जी गागर में सागर भरती इस लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें । सादर ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2016 at 10:19am
आदरणीय सुश्री राजेश कुमारी जी , आपको लघु-अच्छी लगी , आपने दोनों पक्षों की कमजोरी को पकड़ा , कथा आप तक पूर्ण रूप में पहुँची और स्वयं में सार्थक हुयी। आपका ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2016 at 10:19am
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , रचना आपको पसंद आई , आभार। आपकी विवेचना रचना का मान बढ़ा देती है , आप लेखन को पूर्ण मान सम्मान देते हैं। लेखक का इससे अच्छा उत्साह वर्धन और क्या हो सकता है। आपका और आपकी पारखी नज़र का आभार और ह्रदय से धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2016 at 10:19am
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , लघु - कथा आप तक पूर्ण रूप में पहुँची , आपने उसे पूरा मान दिया और उसकी एक बहुत ही सुन्दर व्याख्या प्रस्तुत की। हर बिंदु पर आपका अलग अलग आभार और धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2016 at 10:18am
आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपको लघु-कथा अच्छी लगी , इसके लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 18, 2016 at 10:17am
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी , आपको लघु-कथा अच्छी लगी , आभार एवं धन्यवाद , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 17, 2016 at 9:26pm

अच्छा कटाक्ष है इन ढोंगी बाबाओं के उपर भी और प्रशासक  के ऊपर भी बहुत  खूब  हार्दिक बधाई आद०  डॉ० विजय शंकर जी | 

Comment by Samar kabeer on October 17, 2016 at 8:32pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,कम शब्दों में बड़ी बात करना कोई आपसे सीखे,हालात-ए-हाज़रा पर बहुत शानदार तरीक़े से तंज़ किया है आपने,बाबा गिरी आज का सबसे सफल व्यापार बन गई है,और सीधे सादे मासूम लोग उनका आसानी से शिकार होते हैं ।
वाह बहुत ख़ूब, इस बहतरीन लघुकथा के लिये ढेरों बधाई स्वीकार कीजिये ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 17, 2016 at 4:04pm
दायित्व निर्वहन, कर्तव्य निभाने व अभीष्ट कल्याण कर पाने में असमर्थ/असफल शासन, प्रशासन, व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए तथाकथित बाबाओं को कटघरे में खड़ा करती रचना के साथ बेहतरीन कथ्य सम्प्रेषित करती रचना के लिए बहुत बहुत हार्दिक बधाई आपको आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।

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