For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यार
सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

झेल रहा है बचपन देखो,
बस्तों का अभिशाप
सदा प्रथम की हसरत पाले,
दिखते हैं माँ बाप।।
पढ़ो रात दिन नम्बर पाओ, कहना छोड़ो यार
सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

गुंडे और मवाली के सिर,
सजे आजकल ताज
पढ़े लिखे हैं झोला ढोते,
पर है मौन समाज।।
सबको चिंता एक यहाँ बस, हो स्वजाति सरकार
सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

धर्म कर्म की आड़ लगाए,
हुए कई बदनाम
चाहे राम रहीम रहा हो,
या हो आशाराम।।
कुछ बाबा तो योग तले ही, करते अब व्यापार
सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

रोज सवेरे मंदिर जाएं,
और रखें उपवास
माथ भरे का तिलक लगाएँ,
यह इनका विश्वास।।
पढ़े लिखें ना कर्म करें ये, हो कैसे उद्धार
सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 895

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2018 at 5:52am

आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। रचना को अपनी प्रतिक्रिया से पुरस्कृत करने के लिए आभार

Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2018 at 5:51am

आद0 अजय तिवारी जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए कोटिश आभार

Comment by रामबली गुप्ता on October 1, 2018 at 10:58pm

सरसी छंद आधारित बढियाँ गीत लिखा है आपने आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें।सादर

Comment by Ajay Tiwari on October 1, 2018 at 8:54pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी, एक और सोद्देश्य काव्य-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई. 

Comment by नाथ सोनांचली on September 30, 2018 at 9:30am

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका

Comment by नाथ सोनांचली on September 30, 2018 at 9:30am

आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। आपके प्रतिक्रिया के लिए आभार

Comment by नाथ सोनांचली on September 30, 2018 at 9:29am

आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 29, 2018 at 10:41pm

आ. भाई सुरेंद्र जी, बहुत खूबसूरत गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 29, 2018 at 7:11pm

वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर और सार्थक गीत...बधाई

Comment by Sushil Sarna on September 27, 2018 at 7:11pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी वर्तमान को जीती इस;सुंदर रचना के लिए दिल से बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service