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शिक्षक दिवस के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

शिक्षक दिवस के दोहे


बनते शिष्य महान तब, शिक्षक अगर महान
शिक्षक बिन हर इक रहा, अधकचरा इन्सान।१।


जिसने जीवन  भर किया, शिक्षक  का सम्मान
जग ने उसका  है  किया, इत उत  बड़ा बखान।२।


शिक्षक थोड़ा  सा  अगर,  दे  दे जो उत्साह
भटका बालक चल पड़े, सदा सत्य की राह।३।


पथ की बाधा नित हरी, जिसने राह बुहार
दे थोड़ा सा मान कर, शिक्षक का आभार।४।


करके विद्या दान दी, जीने की हर सीख
उसके ही आभार को, आती यह तारीख।५। 


शिक्षक बनकर जो जिये, जग में वही महान
नौकर बनके  जो  रहे, उनका  क्या  सम्मान।६।


सद्गुण सद्व्यवहार की, पायी  सीख अपार
अपनाकर  व्यवहार  में, दें  उनको  उपहार।७।


करते विद्या दान जो, धन का तज कर मोह
उनके पीछे  चल करो, पार तमस की खोह।८।


सदा नसीहत  ज्ञान से, जो  दिखलाते राह
मरकर भी पाते सदा, जग में मान अथाह।९।


दीपक सा  जल  जो सदा, देता  ज्ञान प्रकाश 
धरती से आकाश तक, उनका यश अविनाश।१०।


मौलिक अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by Samar kabeer on September 7, 2018 at 11:58am

अच्छा बदलाव किया आपने,5वें दोहे में भी बदलाव की आवश्यकता है,देखियेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 7, 2018 at 11:07am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 7, 2018 at 11:05am

आ. भाई सुरेंद्र जी, दोहों की प्रशंसा के लिए धन्यवाद । सुझावानुरूप बदलाव किया है देखियेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 7, 2018 at 11:03am

आ. बबीता जी, दोहों का मान बढ़ाने के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 7, 2018 at 11:02am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए आभार । कुछ बदलाव किये हैं देखियेगा ।

Comment by TEJ VEER SINGH on September 6, 2018 at 11:21am

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"जी। शिक्षक दिवस पर बेहतरीन दोहे प्रस्तुत किये हैं।जीवन में शिक्षक की महत्ता को बड़ी खूबी से वर्णन किया है।

सदा नसीहत  ज्ञान से, जो  दिखलाते राह
मरकर भी पाते सदा, जग में मान अथाह।९।

Comment by नाथ सोनांचली on September 5, 2018 at 6:25pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। शिक्षक दिवस पर बेहतरीन दोहे सृजित किये आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।

प्रकाश की तुकांतता आकाश उचित नहीं, ठीक इसी तरह सम्मान का मान भी उचित नहीं। गौर कीजयेगा।

Comment by babitagupta on September 5, 2018 at 5:43pm

शिक्षक की महानता का वर्णन दोहों द्वारा किया गया ,बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय लक्ष्मण सरजी।

Comment by Samar kabeer on September 5, 2018 at 3:00pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,शिक्षक दिवस पर सार्थक दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे दोहे में 'सम्मान' और 'मान' की तुकान्तता सहीह है क्या?

तीसरे दोहे में //जो  दे  दे उत्साह// को "देदे जो उत्साह" करना उचित होगा ।

//पथ की बाँधा नित हरी//

इस पंक्ति में 'बाँधा' या "बाधा"?

//करके विद्या दान दी, जीने की हर सीख
उसके ही आभार को, आती यह तारीख//

इस दोहे में 'सीख'  और "तारीख़"की तुकान्तता उचित नहीं,ग़ोर कीजियेगा ।

दसवें दोहे में 'प्रकाश' और 'आकाश' की तुकान्तता सहीह है क्या ?

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