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अश्क़ आंखों से उतर गाल पे आया होगा

2122 1122 1122 22

गर शराफ़त में उसे सर पे बिठाया होगा ।
ज़ुल्म उसने भी बड़े शान से ढाया होगा ।।

लोग एहसान कहाँ याद रखे हैं आलिम ।
दर्द बनकर वो बहुत याद भी आया होगा ।।

हिज्र की रात के आलम का तसव्वुर है मुझे ।
आंख से अश्क़ तिरे गाल पे आया होगा ।।

मुद्दतों बाद तलक तीरगी का है आलम ।
कोई सूरज भी वो मगरिब में उगाया होगा ।।

कर गया है वो मुहब्बत में फना की बातें ।
फिर शिकारी ने कहीं जाल बिछाया होगा ।।

कत्ल करने का हुनर सीख लिया है उसने ।
तीर आंखों से कई बार चलाया. होगा ।।

ढूढ़ मन्दिर में न मस्जिद में खुदा को अब तू ।
वो यकीनन तेरे दिल मे ही समाया होगा ।।

कौन कहता है कि वादे से मुकर जाता है ।
चाँद शरमा के तेरी बज्म में आया होगा ।।

इत्तिफाकन ही नज़र मिल गयी थी जो उनसे ।
क्या खबर थी वो मेरी जान का साया होगा ।।

मेरी बरबाद मुहब्बत की निशानी लेकर ।
ख्वाब उसने भी सरेआम जलाया होगा ।।

क्या लिखूं आज सितमगर की जफ़ा का किस्सा ।
बाद मरने के मिरे जश्न मनाया होगा ।।

-- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित
-- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2017 at 1:29pm
बहुत सुंदर , हार्दिक बधाई ।
Comment by Samar kabeer on November 28, 2017 at 4:55pm
जी,ऐडिट कर दें ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 28, 2017 at 4:41pm
आ0 कबीर सर सादर नमन ग़ज़ल को एडिट करके पोस्ट कर रहा हूँ । एडिट के उपरांत एक बार पुनः आपका अवलोकन आपेक्षित है ।
Comment by Samar kabeer on November 28, 2017 at 11:12am
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'ज़िन्दगी का ये सफ़र कैसे बिताया होगा'
दर्द बनकर वो बहुत याद भी आया होगा'
ऊला मिसरे में सफ़र बिताया नहीं,काटा जाता है,और ज़िन्दगी बिताई जाती है,इस हिसाब से ये मिसरा दुरुस्त कीजिये ।

'अश्क आँखों से उतर गाल पे आया होगा'
किसके गाल पे?,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं :-
'आँख से अश्क तिरे गाल पे आया होगा'
तीसरे शैर में कथ्य सही नहीं है ।
Comment by नादिर ख़ान on November 27, 2017 at 12:09pm

आदरणीय त्रिपाठी जी बहुत खूबसूरत शेर निकले है आपके तरकश के फन से..............,  मतला और तीसरा शेर शायद और वक़्त मांग रहा है .............. 

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 27, 2017 at 1:16am
आ0 मुहम्मद आरिफ साहब शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on November 26, 2017 at 6:11pm
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,
बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 26, 2017 at 1:19pm
आ0 कालीपद प्रसाद मण्डल साहब हार्दिक आभार
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 26, 2017 at 9:14am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी , बहुत बहुत खुबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद स्वीकार करे | बहुत उम्दा 

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