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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Manoj kumar Ahsaas commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"बहुत खूब आदरणीय"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी "
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"बहुतखूब बहुतखूब आदरणीय त्रिपाठी जी.."
Saturday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"आ0 मुहम्मद आरिफ साहब तहे दिल से शुक्रिया ।"
Saturday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आजकल
"वाह! वाह!! मज़ा आ गया ! मज़ा आ गया !!  बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही । शोर भी है, शिकवा भी है , ताज़गी भी और सामयिकता का पुट भी । हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी ।"
Saturday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल - आजकल

2122 2122 212बेखुदी की जिंदगी है आजकल ।खूब सस्ता आदमी है आजकल ।।जी रहे मजबूरियों में लोग सब।महफिलों में ख़ामुशी है आजकल ।।लग रही दूकान अब इंसाफ की ।हर तरफ़ कुछ ज़्यादती है आजकल।।छोड़ कर तन्हा मुझे मत जाइए ।कुछ जरूरत आपकी है आजकल ।।अब नहीं मिलता कोई मुझसे यहां।बर्फ रिश्तों पर जमी है आजकल ।।आपके हर कातिलाना वार से ।फैल जाती सनसनी है आजकल ।।मैकदे में शोर बरपा है बहुत ।जाम पर रस्सा कसी है आजकल।।रिन्द खोते जा रहे सारा अदब ।जाने कैसी तिश्नगी है आजकल।।हुस्न पर पर्दा न इतना कीजिये ।हुस्न की ही बन्दगी है…See More
Friday
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे
"वाह लाजबाब अशआर, बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको "
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Jan 17
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post जो शख्स मेरे चाँद सितारों की तरह है
"आ0मु0 आरिफ़ साहब सादर आभार"
Jan 17
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post जो शख्स मेरे चाँद सितारों की तरह है
"नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,                       अच्छी ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Jan 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"बहुत खूब, हार्दिक बधाई आ. भाई नवीन जी ।"
Jan 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - तेरी आँखों में अभी तक है अदावत बाकी
"अच्छी गजल हुई है ,हार्दिक बधाई आ."
Jan 16
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - तेरी आँखों में अभी तक है अदावत बाकी
"आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह जी सादर आभार ।"
Jan 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - तेरी आँखों में अभी तक है अदावत बाकी
"आद0 नवीन मणि जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही, आद0 समर साहब के इस्लाह से उत्तम। समर सहाब को नमन और आपको इस ग़ज़ल पर बधाई"
Jan 15
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । मतले में शुतरगुर्बा का दोष है,सानी मिसरे में 'तुम्हें' को "तुझे" कर लें,ऐब निकल जायेगा । नवें शैर में 'तोहफ़ा' को "तुहफ़ा" कर लें ।"
Jan 14
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"आदृणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,                          हर शे'र सामयिक-प्रासंगिक । ग़ज़ल में जब तक सामयिकता नहीं होगी मज़ा नहीं आएगा । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद…"
Jan 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल - आजकल

2122 2122 212



बेखुदी की जिंदगी है आजकल ।

खूब सस्ता आदमी है आजकल ।।

जी रहे मजबूरियों में लोग सब।

महफिलों में ख़ामुशी है आजकल ।।

लग रही दूकान अब इंसाफ की ।

हर तरफ़ कुछ ज़्यादती है आजकल।।

छोड़ कर तन्हा मुझे मत जाइए ।

कुछ जरूरत आपकी है आजकल ।।

अब नहीं मिलता कोई मुझसे यहां।

बर्फ रिश्तों पर जमी है…

Continue

Posted on January 19, 2018 at 1:07pm — 5 Comments

ग़ज़ल जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे

1212 1122 1212 22

सिला दिया है मेरे दिल में कुछ उतर के मुझे ।

जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे ।।

किया हवन तो जला हाथ इस कदर अपना ।

मिले हैं दर्द पुराने सभी उभर के मुझे ।।

तमाम जुल्म सहे रोज आजमाइस में ।

चुनौतियों से मिली जिंदगी निखर के मुझे ।।

अजीब दौर है किस किस की आरजू देखूँ ।

बुला रही है क़ज़ा भी यहाँ सँवर के मुझे ।।

मिटा रहे हैं…

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Posted on January 17, 2018 at 6:26pm — 1 Comment

जो शख्स मेरे चाँद सितारों की तरह है

221 1221 1221 122

बुझते हुए से आज चराग़ों की तरह है ।

जो शख्स मेरे चाँद सितारों की तरह है ।।

करता है वही कत्ल मिरे दिल का सरेआम ।

मिलता मुझे जो आदमी अपनों की तरह है ।।

रह रह वो कई बार मुझे देखते हैं अब ।

अंदाज मुहब्बत के इशारों की तरह है ।।

कुछ रोज से चेहरे की तबस्सुम पे फिदा वो ।

किसने कहा वो आज भी गैरों की तरह है ।।

यूँ न बिखर जाए कहीं टूट के…

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Posted on January 16, 2018 at 9:06pm — 2 Comments

गज़ल

1222 1222 122



सुकूँ के साथ कुछ दिन जी लिया क्या ।

वो अच्छा दिन तुम्हें हासिल हुआ क्या ।।

बहुत दिन से हूँ सुनता मर रहे हो ।

गरल मजबूरियों का पी लिया क्या ।।

इलक्शन में बहुत नफ़रत पढाया।

तुम्हें इनआम कोई मिल गया क्या ।।

लुटी है आज फिर बेटी की इज़्ज़त ।

जुबाँ को आपने अब सी लिया क्या ।।

सजा फिर हो गयी चारा में उसको ।

खजाना भी कोई वापस हुआ क्या ।।

नही थाली में है रोटी तुम्हारी ।…

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Posted on January 13, 2018 at 2:00am — 3 Comments

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