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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 नीलेश जी सप्रेम आभार । आपकी इस्लाह महत्वपूर्ण है । भर्ती के शब्दों से बचने का प्रयास अवश्य करूँगा ।"
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. नवीन जी ग़ज़ल विषय पर आप की ग़ज़लें मंच पर लगातार आती हैं और उत्तरोत्तर कहन भी बेहतर होता जा रहा है.आप को अब अन्य बारीकियाँ जैसे भर्ती के शब्द  (जैसे क्या हुआ आपको जो पर को कतर जाते हैं ..पर कतर जाते हैं पर्याप्त होता  लेकिन…"
Apr 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह वाह आदरणीय त्रिपाठी खूब ग़ज़ल कही..."
Apr 18
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तुझे याद हो के न याद हो
"आ0 लक्ष्ममन धामी साहब आभार ।"
Apr 18
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तुझे याद हो के न याद हो
"आ0 लक्ष्ममन धामी साहब आभार ।"
Apr 18
Harash Mahajan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"सूंदर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय नवीन जी । सादर ।"
Apr 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तुझे याद हो के न याद हो
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 18
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"वाह सर वाह । आपकी ग़ज़लें तो बहुत ही अच्छी होती हैं । आपको पढ़कर नए मफ़हूम मिलते हैं ।       बहुत ही प्रभवशाली प्रस्तुति है । तहे दिल से बधाई ।।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता-----ग़ज़ल
"वाह क्या खूब लिखा । हार्दिक बधाई आदरणीय ।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आ0 सर लाजवाब प्रस्तुति हेतु बधाई "
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Harash Mahajan's blog post ज़ुदा हुआ पर सज़ा नहीं है
"वाह अति सुंदर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई ।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post धतूरे (लघुकथा)
"बहुत अच्छी कथा के लिए हार्दिक बधाई।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on vijay nikore's blog post मुंतज़िर मुंतज़िर रहा
"लाजवाब प्रस्तुति के लिए बधाई ।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(डर लग रहा है तेवरे दिलदार देख कर )
"वाह क्या बात है बहुत खूब लिखा आपने ।"
Apr 17
Naveen Mani Tripathi commented on Sushil Sarna's blog post जीवन .....क्षणिकाएं :....
"आ0 बहुत खूब लिखा आपने । बधाई स्वीकारें।"
Apr 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

2122-1122-1122-22

टूटकर ख्वाब ज़माने में बिखर जाते हैं ।

आज़माने में बहुत लोग मुकर जाते है ।।

वो जलाता ही रहा हमको बड़ी शिद्दत से ।

हम तो सोने की तरह और निखर जाते हैं ।।

हुस्न वालों के गुनाहों पे न पर्दा डालो ।

क्यूँ भले लोग यहां इश्क से डर जाते हैं ।।

मुन्तजिर दिल है यहां एक शिकायत लेकर ।

आप चुप चाप गली से जो गुज़र जाते हैं ।।

कुछ उड़ानों की तमन्ना को लिए था जिन्दा ।

क्या हुआ…

Continue

Posted on April 16, 2018 at 1:33pm — 18 Comments

तुझे याद हो के न याद हो

11212 11212 11212 11212

तेरी रहमतों पे सवाल था तुझे याद हो के न याद हो ।

मुझे हो गया था मुगालता तुझे याद के न याद हो ।।1

तेरे इश्क़ में जो करार था तुझे याद हो के न याद हो ।

जो मिला था मुझको वो फ़लसफ़ा तुझे याद हो के न याद हो ।।2



वो गुरुर था तेरे हुस्न का जो नज़र से तेरी छलक गया ।

मेरे रास्ते का वो फ़ासला तुझे याद हो के न याद हो ।।3

वहां दफ़्न है तेरी याद सुन ,वो शजर भी कब से गवाह है ।

है मेरी वफ़ा का वो मकबरा तुझे याद हो…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 2:50pm — 9 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

जाम छलका है पास आ जाओ ।

ले के खाली गिलास आ जाओ ।।

जिंदगी फिर बुला रही है तुझे ।

लब पे आई है प्यास आ जाओ ।।

हिज्र के बाद चैन मिलता कब ।

मन अगर है उदास आ जाओ ।।

तीरगी बेहिसाब कायम है ।

चाहिए अब उजास आ जाओ ।।

कोई बैठा है मुन्तजिर होकर ।

मत लगाओ कयास आ जाओ ।।

आ रहे हैं तमाम भौरे अब ।

गंध में है मिठास आ जाओ…

Continue

Posted on April 11, 2018 at 10:03pm — 7 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

जिस दिन वो मुझसे प्यार का इजहार कर दिया ।

इस जिंदगी को और भी दुस्वार कर दिया ।।

चिंगारियों से खेलने पे कुछ सबक मिला ।

घर को जला के मैंने भी अंगार कर दिया ।।

उठने लगीं हैं उंगलियां उस पर हजार बार ।

मुझको वो जब से हुस्न का हकदार कर दिया ।।

शायद पड़ी दरार है रिश्तों की नींव में ।

किसने दिलों के बीच मे दीवार कर दिया ।।

मांगा था मैंने एक तबस्सुम भरी नज़र…

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Posted on April 11, 2018 at 12:05am — 13 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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