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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"वाह वाह वाह बहुत खूब सर लाजवाब ग़ज़ल हुई । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 14
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या
"हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी। बेहतरीन गज़ल। विष को नदियों में निरन्तर घोलते तुम।सृष्टि के प्रति यह कोई मनुहार है क्या ।।"
May 14
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या
"आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ आभार ।"
May 13
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Naveen Mani Tripathi left a comment for Naveen Mani Tripathi
"आ0 मिथिलेश वामनकर साहब आ0 किशोर कान्त साहब आ0तेजवीर सिंह साहब आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।"
May 11
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या

ग़ज़ल 2122 2122 2122मृत्यु  के अनुरक्ति का अभिसार है क्या । मुक्ति पथ पर चल पड़ा संसार है क्या ।।काल शव से कर चुका श्रृंगार है क्या । यह प्रलय का इक नया हुंकार है क्या ।।आत्माओं  का समर्पण  हो रहा है । दृष्टिगोचर मृत्यु का उदगार है क्या ।।कर्म  की अपने समीक्षा कीजिये कुछ । इस धरा पर आपका अधिकार है क्या ।।विष को नदियों में निरन्तर घोलते तुम। सृष्टि के प्रति यह कोई मनुहार है क्या ।।तृप्त हो मानव पिपासा रक्त से ही । तर्क में कुछ सत्य का आधार है क्या ।।शस्त्र संहारक बनाते ही रहे हम । यह प्रकृति…See More
May 11
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 डॉ छोटे लाल सिंह साहब तहेदिल से शुक्रिया ।"
May 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर साहब हार्दिक आभार ।"
May 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 सूबे सिंह सुजान साहब विशेष आभार।"
May 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 समर कबीर साहब सप्रेम नमन के साथ आभार ।"
May 9
TEJ VEER SINGH left a comment for Naveen Mani Tripathi
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।"
May 8
सूबे सिंह सुजान commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"नवीन जी,शुद्ध हिन्दी में ग़ज़ल और वह भी महामारी पर कही गई है बहुत सुंदर रचना बन पड़ी है ।बहुत बधाई "
May 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 4
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
May 4
सूबे सिंह सुजान commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई हो "
May 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या

ग़ज़ल

2122 2122 2122

मृत्यु  के अनुरक्ति का अभिसार है क्या ।

मुक्ति पथ पर चल पड़ा संसार है क्या ।।

काल शव से कर चुका श्रृंगार है क्या ।

यह प्रलय का इक नया हुंकार है क्या ।।

आत्माओं  का समर्पण  हो रहा है ।

दृष्टिगोचर मृत्यु का उदगार है क्या ।।…

Continue

Posted on May 11, 2020 at 5:39pm — 4 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1222 1222 1222 122

करेगा दम्भ का यह काल भी अवसान किंचित ।

करें मत आप सत्ता का कहीं अभिमान किंचित ।।

क्षुधा की अग्नि से जलते उदर की वेदना का ।

कदाचित ले रहा होता कोई संज्ञान किंचित ।।

जलधि के उर में देखो अनगिनत ज्वाला मुखी हैं।

असम्भव है अभी से ज्वार का अनुमान किंचित।।

प्रत्यञ्चा पर है घातक तीर शायद मृत्यु का अब ।

मनुजता पर महामारी का ये संधान किंचित ।।

चयन…

Continue

Posted on May 2, 2020 at 4:23pm — 9 Comments

ग़ज़ल - जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है

1222 1222 122



निगाहों से हुई कोई ख़ता है ।

जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है ।।

रवानी जिस मे होती है समंदर ।

उसी दरिया से रिश्ता जोड़ता है ।।

हमारी ज़िन्दगी को रफ्ता रफ्ता ।

कोई सांचे में अपने ढालता है ।।

तुम्हारे हुस्न के दीदार ख़ातिर ।

यहाँ शब भर ज़माना जागता है ।।

कभी तुम हिचकियों से पूछ तो लो ।

तुम्हे अब कौन इतना चाहता है ।।

ठहर जाती हैं नज़रें…

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Posted on April 25, 2020 at 12:35pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 212

जाने कैसी तिश्नगी है ज़िंदगी ।

ख्वाहिशों की बेबसी है जिंदगी ।।

हर तरफ़ मजबूरियों का दौर है ।

ज़ह्र कितना पी रही है जिंदगी ।।

फ़िक्र किसको है सियासत तू बता ।

भूख से दम तोड़ती है जिंदगी ।।

दर्दो ग़म मत पूछिए मेरा सनम ।

बेवफ़ा सी हो गयी है ज़िन्दगी ।।

इस वबा के जश्न में तू देख तो ।

क्यूँ बहुत सहमी हुई है ज़िन्दगी ।।

है तबाही का नया मंज़र यहां…

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Posted on April 25, 2020 at 12:27pm — 1 Comment

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At 10:37pm on May 11, 2020, Naveen Mani Tripathi said…

आ0 मिथिलेश वामनकर साहब

आ0 किशोर कान्त साहब

आ0तेजवीर सिंह साहब

आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब

आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।

At 12:06pm on May 8, 2020, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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