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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"भाई सौरभ पांडेय जी और अनिल सिंह साहब चर्चा ज्ञान वर्धक रही । चर्चा में मुख्य तत्व सर्वहारा और बुजुरवा समाज की भाषा से निकलता हुआ प्रतीत होता है ।  निश्चय ही सत्य दो नहीं हो सकते । दो दूना 4 ही होगा ।  ग़ज़ल एक ऐसी विधा है जहाँ किसी भी भाषा…"
Sep 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 रचना जी तहेदिल से शुक्रिया"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 समर कबीर साहब तहेदिल से शुक्रिया और नमन"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको।"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 आपके विचार से सहमत हूँ ।त्रुटि हुई है । मतला अब ऐसे पढ़ें  गुज़रे हैं दर्दो ग़म लिए दौरे खिजाँ से हम ।होते रहे तबाह यहाँ इम्तिहाँ से हम ।।"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी विशेष आभार"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 चेतन साहब 100 प्रतिशत सहमत हूँ त्रुटि है । अब आप मतले को इस तरह पढ़ें । गुज़रे हैं दर्दो ग़म लिए दौरे खिजाँ से हम ।होते रहे तबाह यहाँ इम्तिहाँ से हम ।।"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 ग़ज़ल का सुंदर प्रयास हुआ है । बधाई । गुज़रे तुम्हारे वास्ते हर इम्तिहाँ से हम देने का साथ वादा( करें) बोलता है असर आशिकी का (ये) 5 में रब्त का अभाव"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 धामी साहब बहुत खूब ग़ज़ल हुई बधाई । "
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें । चौथे शेर में मुझे लगता है कारवां का ज़िक्र है तो रह शब्द कम किया जा सकता है । यूँ ही जुदा हुए हैं नहीं कारवां से हम ।"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 ग़ज़ल का सुंदर प्रयास हुआ है । 1मुझे लगता है सांस स्त्री लिंग है । 2 चौथा शेर स्पष्ट नहीं है । रदीफ़ भी निभता हुआ नजर नहीं आया । पांचवा शेर में क्या कहना चाह रहे हैं ? रहने दो मेरे वास्ते अब तो जमीं कहीं । इसके सानी में भी सुधार की जरूरत है।"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 अनिल कुमार सिंह साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें । "
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"लगा दिया साहब"
Sep 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221        2121       1221         212 देखे हैं दर्दो ग़म भी वो दौरे खिजाँ में हम । गुज़रे हैं ज़माने में बहुत इम्तिहाँ से हम ।।1 तुमको खबर नहीं है मग़र तिश्नगी लिए लौटे हैं बार बार…"
Sep 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
Sep 1
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 मोहतरम उस्ताद समर कबीर साहब तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया । आपकी इस्लाह अत्यंत महत्वपूर्ण है सर । सादर नमन।"
Aug 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

   1212        1122         1212               112

हैं मुन्तज़िर मेरे अहबाब देखने के लिए ।

जमीं पे उतरेगा महताब देखने के लिए ।।1

न जाने कैसा नशा है तुम्हारी सूरत में ।

सुना है रिन्द हैं बेताब देखने के लिए ।।2

तू अपनी तिश्नगी पे यार आज काबू रख ।

मिलेंगे और भी ज़हराब देखने के लिए ।।3

बहेंगे आप भी दरिया ए अश्क़ में इक दिन ।

अगर यूँ आएंगे शैलाब देखने के लिए ।।4

कुछ इस तरह से ख़ुदा ने नसीब बख़्शा है ।

हमें मिला ही…

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Posted on August 29, 2021 at 8:52am — 4 Comments

ग़ज़ल-क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत

2122 2122 2122 2122

कैसे कह दें मुल्क में कितनी निखर आयी सियासत ।

क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत ।।

चाहतें सब खो गईं और खो गए अम्नो सुकूँ भी ।

इक तबाही का लिए मंज़र जिधर आई सियासत ।।

नफ़रतों के ज़ह्र से भीगा मिला हर शख़्स मुझको ।

कुर्सियों के वास्ते जब गाँव- घर आई सियासत।।

मन्दिरो मस्ज़िद में बैठे खून के प्यासे बहुत हैं ।

क्या हुआ इस मुल्क में जो इस कदर आई सियासत ।।

आदमी का ख़्वाब देखो फिर ठगा सा…

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Posted on December 23, 2020 at 1:00am — 8 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



ख़ाक हो गयी खुशी, था आग का पता नहीं ।

ख़्वाब सारे जल गए, मगर धुआँ उठा नहीं ।

पूछिये न हाले दिल यूँ बारहा मेरा सनम ।

ये हमारे दर्दोगम का सिलसिला नया नहीं ।।

इक नज़र से दिल मेरा वो लूट कर चला गया ।

इस सितम पे क्यूँ अभी तलक कोई खफ़ा नहीं ।।

रूबरू था हुस्न …

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Posted on August 4, 2020 at 11:31pm — 7 Comments

ग़ज़ल

2212 2212 2212 2212

मैं ठोकरें खाता रहा मुझ पर तरस आता था कब ।

इस ज़िंदगी पर सच बताएं आपका साया था कब ।।1

जीता रहा मैं बेखुदी में मुस्कुरा कर उम्र भर।

अब याद क्या करना कि मैंने होश को खोया था कब ।।2

वो कहकशां की बज़्म थी, उन बादलों के दरमियां ।

मुझको अभी तक याद है वो चाँद शर्माया था कब ।।3

जलते रहे क्यूँ शमअ में परवाने सारी रात तक ।

तू वस्ल के अंज़ाम का ये फ़लसफ़ा समझा था कब ।।4

जो अश्क़ में डूबा मिला था…

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Posted on August 4, 2020 at 5:44pm — 4 Comments

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At 10:37pm on May 11, 2020, Naveen Mani Tripathi said…

आ0 मिथिलेश वामनकर साहब

आ0 किशोर कान्त साहब

आ0तेजवीर सिंह साहब

आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब

आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।

At 12:06pm on May 8, 2020, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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यह भूला-बिसरा पत्र ...तुम्हारे लिए

तेरे स्नेह के आंचल की छाँह तलेपल रहा अविरल कैसा ख़याल है यहकि रिश्ते की हर मुस्कान कोया ज़िन्दगी की…See More
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