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Naveen Mani Tripathi
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Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"चाँद बनकर वो निखर जाएंगे । शाम होते ही सँवर जाएंगे ।। जख्म परदे में ही रखना अच्छा । देखकर लोग सिहर जाएंगे ।। वाह आदरणीय वाह बहुत उम्दा अशआर कहे हैं आपने। मुबारकबाद कबूल फरमाएं।"
39 seconds ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । मुबारकबाद क़ुबूल करें । शेष गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
6 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"काफिया के अलावा दो बह्रों का मिश्रण है इस ग़ज़ल में। वैसे ग़ज़ल अच्छी है बधाई"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"आदरणीय नवीन जी आदाब सुंदर ग़ज़ल के लिए आपको बधाई देता हूँ । ग़ज़ल का मतला आपने यूँ कहा है । बिजलियाँ फिर गिरा के जाएँगे । शाम होते वो सँवर जाएँगे । इसमें काफ़िया क्या है कृपा कर बताएँ ता की असमंजस दूर हो ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे

2122 1122 22चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।छेड़िये मत उसी कहानी को ।दर्द मेरे भी उभर जाएंगे ।।घूर कर देखिए नहीं मुझको ।आप नजरों से उतर जाएंगे।।वक्त रुकता नहीं है दुनिया में ।दिन हमारे भी सुधर जाएंगे ।।क्या पता था कि जुदा होते ही ।इस तरह आप बिखर जाएंगे ।।ये मुहब्बत है इबादत मेरी ।एक दिन दिल मे ठहर में जाएंगे ।।इश्क़ पर बात अभी क्या करना ।इश्क पर आप मुकर जाएंगे ।।जिद मुनासिब कहाँ है पीने की ।आप तो हद से गुजर जाएंगे ।।बज्म में…See More
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"खूबसूरत ग़ज़ल हार्दिक बधाई"
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदर्णीय नवीन भाई ,अच्छी गज़ल कही है. गज़ल के लिये आपको बधाइयाँ ।"
Saturday
पंकजोम " प्रेम " commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - जो मुद्दत से मुझे पहचानता है
"वाह भाई जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल , ख़ूब"
Friday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये

1212 1122 1212 22*ये ख्वाहिशें हैं कि दिल तक मुकाम हो जाये ।सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये ।।हैं मुन्तज़िर सी ये आंखे कभी तू मिल तो सही।नए रसूख़ पे मेरा कलाम हो जाये ।।बड़े गुरुर से उसने उठाई है बोतल ।ये मैकदा न कहीं फिर हराम हो जाये ।।फिदा है आज तलक वो भी उस की सूरत पर ।कहीं न वो भी सनम का गुलाम हो जाये ।।अदा में तेज हुकूमत की ख्वाहिशें लेकर ।खुदा करे कि वो दिल का निजाम हो जाए ।।किसी की बज्म में आना है एक दिन उसको ।मेरे नसीब में वह एहतराम हो जाये ।।जफ़ा की राह पे चलने लगे वफ़ा वाले ।वफ़ा की बात…See More
Friday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - जो मुद्दत से मुझे पहचानता है
"आदरनीय नवीन भाई < अच्छी गज़ल कही है हार्दिक बधाइयाँ । बाक़ी सब कुछ आ. समर भाई कह ही चुके हैं ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Sep 14
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"भाई अफरोज साहब इसे अविलम्ब ठीक करता हूँ"
Sep 13
Afroz 'sahr' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी अच्छी ग़जल की आपको बधाई देता हूँ ""तोहमत"" (स्त्रीलिंग) अर्थात मुअन्नस है! आपने कहा है! ""नया तोहमत लगाया जा रहा है"""
Sep 13
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये
"आ0 गिरिराज भंडारी साहब शुक्रिया"
Sep 13

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये
"आ. नवीन भाई , अच्छी गज़ल कही है . हार्दिक बधाइयाँ ।"
Sep 13
पंकजोम " प्रेम " commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह ख़ूब भाई जी वाह"
Sep 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे

2122 1122 22

चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।

शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।



जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।

देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।



छेड़िये मत उसी कहानी को ।

दर्द मेरे भी उभर जाएंगे ।।



घूर कर देखिए नहीं मुझको ।

आप नजरों से उतर जाएंगे।।



वक्त रुकता नहीं है दुनिया में ।

दिन हमारे भी सुधर जाएंगे ।।



क्या पता था कि जुदा होते ही ।

इस तरह आप बिखर जाएंगे ।।



ये मुहब्बत है इबादत मेरी ।

एक दिन दिल मे ठहर में… Continue

Posted on September 19, 2017 at 1:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

रकीबों को उठाया जा रहा है ।

किसी पर जुर्म ढाया जा रहा है ।।



मैं छोड़आया तुम्हारी सल्तनत को।

मगर चर्चा चलाया जा रहा है ।।



मुखौटे में मिले हैं यार सारे ।

नया चेहरा दिखाया जा रहा है।।



सुखनवर की किसी गंगा में देखा ।

नया सिक्का चलाया जा रहा है ।।



सही क्या है गलत क्या है ग़ज़ल में ।

नया कुछ इल्म लाया जा रहा है ।।



अदब से वास्ता जिसका नहीं था ।

उसे आलिम बताया जा रहा है ।।



सिकेंगी रोटियां अब… Continue

Posted on September 13, 2017 at 5:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल - जो मुद्दत से मुझे पहचानता है

1222 1222 122

मेरी पहचान को खारिज़ किया है ।

जो मुद्दत से मुझे पहचानता है ।।



खुशामद का हुनर बख्सा है रब ने ।

खुशामद से वो आगे बढ़ रहा है ।।



जतन कितना करोगे आप साहब ।

ये भ्रष्टाचार अब तक फल रहा है ।।



यकीं होता नही जिसको खुदा पर ।

वही इंसां खुदा से माँगता है ।।



उन्हें ही डस रहें हैं सांप अक्सर ।

जो सापों को घरों में पालता है ।।



गया मगरिब में देखो आज सूरज ।

पता वह चाँद का भी ढूढता है ।।



मदारी के लिए… Continue

Posted on September 12, 2017 at 1:58pm — 13 Comments

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये

1212 1122 1212 22*

ये ख्वाहिशें हैं कि दिल तक मुकाम हो जाये ।

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये ।।



हैं मुन्तज़िर सी ये आंखे कभी तू मिल तो सही।

नए रसूख़ पे मेरा कलाम हो जाये ।।





बड़े गुरुर से उसने उठाई है बोतल ।

ये मैकदा न कहीं फिर हराम हो जाये ।।



फिदा है आज तलक वो भी उस की सूरत पर ।

कहीं न वो भी सनम का गुलाम हो जाये ।।



अदा में तेज हुकूमत की ख्वाहिशें लेकर ।

खुदा करे कि वो दिल का निजाम हो जाए ।।





किसी… Continue

Posted on September 9, 2017 at 1:30am — 9 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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