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Naveen Mani Tripathi
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो
"आ0 कबीर सर विशेष आभार के साथ नमन ।"
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । तीसरे शैए के सानी में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखिये । आख़री शैर में शुतरगुर्बा दोष है,देखिये ।"
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"संख्या बढ़ाने के लिए शब्द है "इज़ाफ़ा""
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"'दुश्मनों की इज़ाफ़त हुई' आपने 'इज़ाफ़त'का ये अर्थ लिया है कि दुश्मनों की तादाद(संख्या)बढ़ गई, जबकि "इज़ाफ़त"का सही अर्थ है,निस्बत,लगाव,मेल,एक कलमे से दूसरे कलमे का लगाव जो फ़ारसी और अरबी अल्फ़ाज़ में मज़ाफ़ के नीचे…"
Nov 12
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"हार्दिक बधाई।"
Nov 12
Dr Ashutosh Mishra commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ
"आदरणीय नवीन जी हर शेर उम्दा है कमाल की इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई सादर "
Nov 11
Dr Ashutosh Mishra commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आदरणीय नवीन मणि जी इस शानदार रचना पर हार्दिक बधाई सादर "
Nov 11
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Nov 11
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 कबीर सर इज़ाफ़त शब्द में मुझे अत काफिया नज़र आता है । काफ़िया कैसे गलत है कृपया शंका को दूर करने की कृपा कीजिये ।"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 गुरुप्रीत सिंह साहब सप्रेम आभार"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 मुहम्मद आरिफ साहब सादर आभार ।"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 अफरोज शहर साहब सादर आभार ।"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 कबीर सर को सादर नमन । अभी ठीक करता हूँ सर जी ।"
Nov 10
Gurpreet Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी ,, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ,, बधाई स्वीकार करें इस ग़ज़ल के लिए "
Nov 10
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर में 'इज़ाफ़त'क़ाफ़िया सही नहीं है । चौथे शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ है । आख़री शैर के ऊला मिसरे में 'फतह'ग़लत है,सही शब्द है "फ़त्ह"इसका वज़्न है 21…"
Nov 10
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"हुस्न था आपका कुछ अलग । आप ही की हुकूमत हुई ।। कितना सच है । बहुत ख़ूब! शे'र दर शे'र के साथ मुबारकबाद आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी ।"
Nov 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो

2122 2122 212

हो गई पूरी तमन्ना बस करो ।

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो ।।



फिक्र किसको है यहां इंसान की ।

फिर कोई ताज़ा बहाना , बस करो ।।



होश में मिलते कहाँ मुद्दत से तुम।

इस तरह से दिल लगाना, बस करो ।।



बेवफा की हो चुकी खातिर बहुत ।।

राह में पलकें बिछाना, बस करो ।।



घर मे कंगाली का आलम देखिये ।

गैर पर सब कुछ लुटाना ,बस करो ।।



रंजिशों से कौन जीता इश्क़ में।हार कर अब तिलमिलाना, बस करो ।।





कर गई दीवानगी… Continue

Posted on November 10, 2017 at 5:11pm — 2 Comments

आप से क्या मुहब्बत हुई

आप से क्या मुहब्बत हुई ।

रात भी अब कयामत हुई ।।



जब भी आए तेरे दर पे हम ।।

दुश्मनों की इजाफ़त हुई ।।



हुस्न था आपका कुछ अलग ।

आप ही की हुकूमत हुई ।।



यूँ संवरते गए आप भी ।

हुस्न की जब इनायत हुई ।।



अब चले आइये बज्म में ।

आपकी अब जरूरत हुई ।।



जाइये रूठ कर मत कहीं ।

आपसे कब अदावत हुई ।।



है तकाजा यहां उम्र का ।

आईनों की हिदायत हुई ।।



कुछ अदाएं मचलने लगीं ।

आंख से जब हिमाकत हुई… Continue

Posted on November 10, 2017 at 12:26pm — 13 Comments

बेबस पे नज़र से वार न कर

22112 22112 22112 22112





ये इश्क़ कहीं बदनाम न हो इतना तू मेरा दीदार न कर ।

ऐ जाने वफ़ा ऐ जाने ज़िगर बेबस पे नज़र से वार न कर ।।



इन शोख अदाओं से न अभी इतरा के चलो लहरा के चलो।

यह उम्र बड़ी कमसिन है सनम

ख़ंजर पे अभी तू धार न कर ।।





हैं दफ़्न यहाँ पर राज़ कई इस कब्र पे लिक्खी बात तो पढ़ ।

अब वक्त गया अब उम्र ढली अब और नया इजहार न कर ।।



चेहरे की लकीरों को जो पढ़ा तो राज हुआ मालूम मुझे । दिल मांग गया तुझसे है कोई यह बात अभी इनकार न कर… Continue

Posted on November 7, 2017 at 12:53pm — 11 Comments

ग़ज़ल: अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ

22 22 22 22 22 2

अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ ।

ख्वाब जलाकर रोज़ उजाला करता हूँ।।



एक झलक की ख्वाहिश लेकर मुद्दत से ।

मैं बादल में चांद निहारा करता हूँ ।।



एक लहर आती है सब बह जाता है ।

रेत पे जब जब महल बनाया करता हूँ ।।



शेर मेरे आबाद हुए एहसान तेरा ।

मैं ग़ज़लों में अक्स उतारा करता हूँ ।।





दर्द कहीं जाहिर न हो जाये मुझसे ।

हंस कर ग़म का राज छुपाया करता हूँ ।।



पूछ न मुझसे आज मुहब्बत की बातें ।

याद में…

Continue

Posted on November 7, 2017 at 12:30pm — 13 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
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मिथिलेश वामनकर
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