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साल नया वह आता कब है
और पुराना जाता कब है?1

चलते रहते खेल-तमाशे
कोई राज बताता कब है?2

मन मुरझाया रहता जब भी
बोलो कुछ भी भाता कब है?3

दिलवर जो चाहत का भूखा
रखता लब से नाता कब है?4

रहता हर पल प्यासा पंछी
बूँद सुधामय पाता कब है?5
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

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Comment by Manan Kumar singh on January 4, 2017 at 7:32pm
हौसला आफजाई के लिए आपका आभारी हूँ आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
Comment by vijay nikore on January 3, 2017 at 11:27am

बढ़िया गज़ल के लिय बधाई, आदरणीय मनन जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 3, 2017 at 10:15am

आदरणीय मनन भाई , खूबसूरत गज़ल हुई है , बधाइयाँ स्वीकार करें । गज़ल के ऊपर बहर लिख दिया करें आदरणीय , सीखने वालों को आसानी होती है ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 2, 2017 at 11:51pm

आदरणीय मनन जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 3:26pm
आदरणीय मनन जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल लगी आपकी। मेरी तरफ से ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 1, 2017 at 9:55pm

आ० मनन जी , बढ़िया गजल कही आपने .  अगर ---- रहता हरदम प्यासा चातक  ---कर  दे तो बढ़िया रहेगा . सदर .

Comment by Samar kabeer on January 1, 2017 at 5:01pm
जनाब मनन कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
निवेदन है कि ग़ज़ल के साथ अरकान भी लिख दिया करें,ताकि नये सदस्यों के लिये आसानी हो ।
Comment by नाथ सोनांचली on January 1, 2017 at 1:12pm
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। नव वर्ष की हार्दिक बधाइयाँ और शुभेक्षा, आपकी उत्तम गजल सृजन पर पुनश्च बधाई निवेदित हैं
Comment by TEJ VEER SINGH on January 1, 2017 at 12:27pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार जी।बेहतरीन गज़ल।

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